Friday, March 20, 2026
Homeभारतलैंड फॉर जॉब केस में लालू यादव, राबड़ी, तेजस्वी, तेज प्रताप समेत...

लैंड फॉर जॉब केस में लालू यादव, राबड़ी, तेजस्वी, तेज प्रताप समेत अन्य पर आरोप तय, 52 बरी

यह मामला CBI के आरोपों से जुड़ा है। जांच एजेंसी के आरोपों के अनुसार 2004 से 2009 के बीच जब लालू यादव रेल मंत्री थे, तब लैंड फॉर जॉब यानी नौकरी के बदले जमीन स्कैम को अंजाम दिया गया।

नई दिल्ली: नौकरी के बदले जमीन लेने के मामले (लैंड फॉर जॉब केस) में लालू परिवार की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बच्चों तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव, मीसा भारती, हेमा यादव सहित कई अन्य लोगों पर कथित तौर पर रेलवे में नौकरी दिलाने के बदले जमीन के लेने के घोटाले में आरोप तय करने के आदेश दिए। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज विशाल गोगने ने यह आदेश दिया।

वेबसाइट बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार कोर्ट ने लालू यादव पर भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम के तहत भ्रष्टाचार के अपराध के साथ-साथ भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत अन्य अपराधों का भी आरोप लगाया है। उनके परिवार के सदस्यों पर धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश का आरोप लगाया गया है। इन लोगों पर अब इसे मामले में मुकदमा चलेगा।

यह मामला CBI के आरोपों से जुड़ा है। जांच एजेंसी के आरोपों के अनुसार 2004 से 2009 के बीच जब लालू यादव रेल मंत्री थे, तो उन्होंने उम्मीदवारों को ग्रुप D की नौकरियाँ दीं, जिसके बदले में जमीन बेहद मामलू कीमतों पर उनके परिवार को ट्रांसफर किए गए। मामले में सीबीआई ने लालू और उनके बेटों समेत उनकी बेटियों को भी आरोपी बनाया है। चार्जशीट में सांसद मीसा भारती और हेमा यादव के खिलाफ आरोप दर्ज हैं। मामले में 52 लोगों को बरी करने का आदेश ने कोर्ट ने सुनाया।

आरोपों के मुताबिक रेलवे में नौकरी चाहने वालों या उनके रिश्तेदारों द्वारा कथित तौर पर पटना और दूसरे इलाकों में लालू के परिवार और उनसे जुड़ी कंपनियों को जमीन बेची या ‘तोहफे’ में दी गई। जांच एजेंसी का दावा है कि इस दौरान किसी भी भर्ती प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और ये लेन-देन का सौदा था।

हालांकि, यादव परिवार इन आरोपों से इनकार करता रहा है, और कहता रहा है कि ये आरोप राजनीतिक मकसद से लगाए गए हैं। इस बीच, प्रवर्तन निदेशालय (ED) इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से भी जांच कर रहा है और उसने कथित अपराध से हासिल 600 करोड़ रुपये से ज्यादा की प्रॉपर्टी जब्त भी की है।

कोर्ट ने अपने आदेश में क्या कहा?

कोर्ट में शुक्रवार को जज गोगने द्वारा पढ़े गए आदेश में कहा गया कि आरोप है कि लालू यादव और उनके परिवार के सदस्य एक क्रिमिनल इंटरप्राइजेज की तरह काम कर रहे थे और एक बड़ी साजिश में शामिल थे। उन्होंने प्रॉपर्टी हासिल करने के लिए सरकारी नौकरी का इस्तेमाल सौदेबाजी के तौर पर किया।

कोर्ट ने कहा कि चार्जशीट से पता चलता है कि लालू यादव के करीबी लोगों ने रेलवे में नौकरियों और देश भर में प्लेसमेंट के बदले जमीन हासिल करने में मदद की। कोर्ट ने कहा, ‘लालू यादव और उनके परिवार के सदस्यों की बरी किए जाने की अपील पूरी तरह से गलत है।’

कोर्ट ने आगे कहा कि लालू यादव ने रेल मंत्रालय को अपनी निजी जागीर की तरह इस्तेमाल किया। आखिर में कोर्ट ने कहा कि इस मामले में बचे हुए 98 आरोपियों में से वह 46 लोगों (जिसमें लालू यादव और उनका परिवार शामिल है) के खिलाफ आरोप तय कर रहा है और 52 लोगों को बरी कर रहा है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में 5 आरोपियों की मृत्यु हो चुकी है, ऐसे में अब 41 लोगों के खिलाफ मुकदमा चलेगा। इस मामले में अगली सुनवाई अब 29 जनवरी को होगी।

इस मामले में अदालत ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 420 और 120बी के तहत आरोप तय किए हैं। इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट) की धारा 13(1)(डी) और 13(2) के तहत भी आरोप तय किए गए हैं।

सीबीआई ने अपने आरोपपत्र में कहा है कि जमीन के बदले ये नौकरियां मुख्य तौर पर मुंबई, जबलपुर, कोलकाता, जयपुर और हाजीपुर जोन में दी गई। बेहद कम पैसे में जमीन लेने के बाद ज्यादातर मामलों में जमीन मालिक को कैश में भुगतान किया गया।

विनीत कुमार
विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments