Friday, March 20, 2026
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‘ये अस्वीकार्य..’, स्कूलों में वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ मनाने के निर्देश पर कश्मीरी मौलवियों के संगठन ने जताई आपत्ति

संगठन ने वंदे मातरम के पाठ को इस्लामी शिक्षाओं के विपरीत बताया है। बयान में कहा गया है, ‘इस्लाम ऐसे किसी भी कार्य की अनुमति नहीं देता जिसमें रचना करने वाले के अलावा किसी अन्य व्यक्ति या वस्तु के प्रति पूजा या श्रद्धा शामिल हो।’

जम्मू: जम्मू-कश्मीर में मीरवाइज उमर फारूक के नेतृत्व वाले मुस्लिम धार्मिक संगठनों के एक समूह- मुताहिदा मजलिस-ए-उलेमा (एमएमयू) ने संस्कृति विभाग के उस हालिया निर्देश को लेकर नाराजगी जताई है, जिसमें स्कूलों को संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए से वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ मनाने के लिए कहा गया है।

एमएमयू ने बुधवार को जारी एक बयान में कहा कि छात्रों और कर्मचारियों के लिए भागीदारी अनिवार्य करने का यह कदम जबरदस्ती है और धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करता है।

संगठन ने वंदे मातरम के पाठ को इस्लामी शिक्षाओं के विपरीत बताया और कहा कि इसमें श्रद्धा के भाव हैं और यह एक अल्लाह की अवधारणा के विपरीत हैं। बयान में कहा गया है, ‘इस्लाम ऐसे किसी भी कार्य की अनुमति नहीं देता जिसमें रचना करने वाले के अलावा किसी अन्य व्यक्ति या वस्तु के प्रति पूजा या श्रद्धा शामिल हो।’

इसमें कहा गया है, ‘मुस्लिम छात्रों या संस्थानों को ऐसी गतिविधियों में भाग लेने के लिए मजबूर करना जो उनके धर्म के विपरीत हों, अन्यायपूर्ण और अस्वीकार्य दोनों है।’

बयान में कहा गया है कि इस्लाम सेवा, करुणा और सामाजिक योगदान के माध्यम से देशभक्ति को प्रोत्साहित करता है। एमएमयू ने कहा कि मुस्लिम छात्रों को ऐसी गतिविधियों में भाग लेने के लिए मजबूर करना ‘अन्यायपूर्ण और अस्वीकार्य है।’

साथ ही इसमें आरोप लगाया गया है कि यह निर्देश सांस्कृतिक उत्सव की आड़ में मुस्लिम बहुल क्षेत्र पर आरएसएस द्वारा संचालित हिंदुत्व विचारधारा को थोपने के प्रयास को दर्शाता है।

बयान में कहा गया है, ‘…यह निर्देश वास्तविक एकता और विविधता के सम्मान को बढ़ावा देने की बजाय, सांस्कृतिक उत्सव की आड़ में मुस्लिम-बहुल क्षेत्र पर आरएसएस द्वारा संचालित हिंदुत्व विचारधारा थोपने का एक जानबूझकर किया गया प्रयास प्रतीत होता है।’

एमएमयू ने उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री दोनों के नेतृत्व वाले प्रशासन से अपील की है कि वे मुस्लिम समुदाय में और अधिक आक्रोश को रोकने के लिए इस निर्देश को तुरंत वापस लें और यह सुनिश्चित करें कि किसी भी छात्र या संस्थान को अपने धर्म के विरुद्ध कार्य करने के लिए मजबूर न किया जाए।

वंदे मातरम के 150 साल

भारत के राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150वें साल पूरे होने का 7 नवंबर से जश्न मनाया जाना है। वंदे मातरम की रचना बंकिमचंद्र चटोपाध्याय ने 1875 में की थी। 1896 में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने पहली बार इसे गाया था। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने पर राष्ट्रव्यापी उत्सव मनाने का फैसला लिया है। भाजपा भी इसे लेकर उत्साहित है और देश भर में इसे लेकर तैयारियां जारी हैं। पीएम मोदी ने भी अक्टूबर की ‘मन की बात’ कार्यक्रम में उत्सव मनाने को लेकर लोगों से सुझाव मांगे थे।

पीएम मोदी ने कहा, ‘वंदे मातरम एक ऐसा गीत है, जिसका पहला शब्द ही हमारे ह्रदय में भावनाओं का उफान ला देता है। वंदे मातरम इस एक शब्द में कितने भाव हैं, कितनी ऊर्जाएं हैं। सहज भाव में ये हमें मां-भारती के वात्सल्य का अनुभव कराता है। यही हमें मां-भारती की संतानों के रूप में अपने दायित्वों का बोध कराता है।’

उन्होंने कहा कि वंदेमातरम भले ही 19वीं शताब्दी में लिखा गया था, लेकिन इसकी भावना भारत की हजारों वर्ष पुरानी अमर चेतना से जुड़ी थी। वेदों ने जिस भाव को माता भूमिः पुत्रो अहं पृथिव्याः (धरती हमारी माता है, और मैं उनका बेटा हूं) कहकर भारतीय सभ्यता की नींव रखी थी।उन्होंने कहा कि साथियों, वंदे मातरम के गान में करोड़ों देशवासियों ने हमेशा राष्ट्र प्रेम के अपार उफान को महसूस किया है। हमारी पीढ़ियों ने वंदेमातरम के शब्दों में भारत के एक जीवंत और भव्य स्वरूप के दर्शन किए हैं।

विनीत कुमार
विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
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