Friday, March 20, 2026
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खामेनेई की मौत पर भारत में उबाल, कश्मीर से लखनऊ-कर्नाटक तक सड़कों पर उतरा शिया समुदाय

लखनऊ में शिया धर्म गुरु मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि इस घटना ने पूरे मध्य पूर्व को युद्ध की स्थिति में धकेल दिया है। यह पूरे मुस्लिम समुदाय के लिए एक दुखद दिन है, क्योंकि ईरान के सर्वोच्च नेता ने हमेशा सभी मुसलमानों की बात की।

अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हवाई हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर फैलते ही भारत के कई हिस्सों में भारी तनाव और विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। जम्मू कश्मीर के श्रीनगर और बडगाम समेत कई इलाकों में लोग सड़कों पर उतर आए, जबकि उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ और कर्नाटक के बेंगलुरु में भी शिया समुदाय सड़कों पर उतर आया है।

श्रीनगर और बडगाम में रविवार सुबह से ही शिया समुदाय के लोग बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और इसे ‘धोखे से की गई हत्या’ करार दिया। श्रीनगर के ऐतिहासिक लाल चौक पर भारी भीड़ जमा होने के कारण पुलिस को ट्रैफिक डायवर्ट करना पड़ा। प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है लेकिन किसी भी तरह की अनहोनी को रोकने के लिए पुलिस-प्रशासन पूरी तरह सतर्क है।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गहरी चिंता व्यक्त की है। मुख्यमंत्री ने सभी समुदायों से शांति और संयम बरतने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर सरकार भारतीय विदेश मंत्रालय के साथ संपर्क में है ताकि ईरान में मौजूद कश्मीरी छात्रों और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

पीडीपी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने इस घटना को इतिहास का दुखद और शर्मनाक मोड़ बताया। उन्होंने कहा कि इज़रायल और अमेरिका इस हत्या पर शेखी बघार रहे हैं और कुछ मुस्लिम देशों ने भी प्रत्यक्ष या परोक्ष समर्थन दिया है। उनकी बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने भी सोशल मीडिया पर शोक व्यक्त किया।

जम्मू कश्मीर के धर्मगुरु मीरवाइज उमर फारूक ने भी इस घटना पर गहरा दुख और गुस्सा जताते हुए इसे मुस्लिम दुनिया को हिला देने वाली घटना बताया।

उन्होंने एक्स पर लिखा, “ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह सैयद अली खामेनेई की अमेरिका और इजराइल द्वारा की गई निर्मम हत्या से गहरा दुख और आक्रोश है, जिसने पूरी मुस्लिम दुनिया को झकझोर दिया है। जम्मू-कश्मीर के लोग इस बर्बरता और ईरान के खिलाफ जारी आक्रामक कार्रवाई के साथ-साथ मिनाब में मासूम छात्राओं के कत्लेआम की सामूहिक रूप से निंदा करते हैं।”

“इस गहरे शोक की घड़ी में हमारे दिल ईरान के जुझारू लोगों के साथ धड़कते हैं। अल्लाह मजलूमों को ताकत दे, शहीदों को बुलंदी अता करे और जिम्मेदार लोगों को जल्द से जल्द इंसाफ के कटघरे में लाए।”

मीरवाइज ने आगे लिखा, “यह वक्त उम्माह के लिए आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर एकजुट होने, इस हत्या और क्षेत्र में जारी आक्रामकता के खिलाफ अपना विरोध और एकजुटता दर्ज कराने का है। मुताहिदा मजलिस-ए-उलेमा (एमएमयू) ने कल पूर्ण बंद का आह्वान किया है। हम लोगों से अपील करते हैं कि इसे एकता, गरिमा और पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से मनाएं।”

जम्मू-कश्मीर के साथ ही उत्तर प्रदेश के लखनऊ में भी शिया समुदाय के लोगों ने विरोध जताया। एक महिला प्रदर्शनकारी ने कहा कि अगर एक ख़ामेनेई मारे गए हैं तो हजार खामेनेई उठ खड़े होंगे।

शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद ने इसे सदी की सबसे दुखद घटनाओं में से एक बताया और कहा कि खामेनेई ने हमेशा दबे कुचले लोगों की आवाज उठाई। इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के चेयरमैन और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के कार्यकारी सदस्य खालिद रशीद फरंगी महली ने हमले को अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ बताते हुए इसकी निंदा की और जिम्मेदार लोगों पर अंतरराष्ट्रीय अदालत में मुकदमा चलाने की मांग की।

लखनऊ में शिया धर्म गुरु मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि इस घटना ने पूरे मध्य पूर्व को युद्ध की स्थिति में धकेल दिया है। यह पूरे मुस्लिम समुदाय के लिए एक दुखद दिन है, क्योंकि ईरान के सर्वोच्च नेता ने हमेशा सभी मुसलमानों की बात की। वहीं शिया समुदाय के नेता सैयद समर काजमी ने आरोप लगाया कि खामेनेई को इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि उन्होंने फिलीस्तीन के मुद्दे पर आवाज उठाई थी।

कर्नाटक के अलीपुर गांव में मातम

कर्नाटक के बेंगलुरु में भी विरोध दर्ज किए गए हैं। इसके साथ ही राज्य के चिक्कबल्लापुर जिले के गौरिबिदनूर तालुक स्थित अलीपुर गांव में भी ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत की खबर के बाद गहरा शोक और बेचैनी का माहौल है। शिया मुस्लिम समुदाय के सदस्यों ने विरोध मार्च निकालने और तीन दिन के मातम का ऐलान किया है।

यह प्रदर्शन अंजुमन-ए-जाफरिया कमेटी के नेतृत्व में आयोजित किया जा रहा है। बेंगलुरु से करीब 70 किलोमीटर दूर स्थित अलीपुर की आबादी लगभग 25 हजार है, जिनमें अनुमानित 90 प्रतिशत शिया मुस्लिम हैं।

द हिंदू के अनुसार खामेनेई की मौत की खबर का अलीपुर के लोगों पर गहरा भावनात्मक असर पड़ा है। स्थानीय निवासियों के धार्मिक और सांस्कृतिक संबंध ईरान से जुड़े रहे हैं, जिसके चलते इस घटना को लेकर गांव में व्यापक शोक और आक्रोश देखा जा रहा है।

समुदाय के नेताओं ने लोगों से अपील की है कि विरोध शांतिपूर्ण ढंग से किया जाए और तीन दिन के मातम के दौरान अनुशासन और एकजुटता बनाए रखी जाए। स्थानीय प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

आयतुल्लाह अली खामेनेई के मारे जाने पर हैदराबाद में ऑल इंडिया शिया मजालिस-ए-उलेमा-वा-जाकिरीन के डॉ. निसार हुसैन हैदर आगा ने कहा कि ईरान पर 30 से अधिक बम गिराए जाने के बाद खामेनेई की मौत की खबर मिली। उन्होंने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की और कहा कि इस हमले के खिलाफ दुनिया भर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।

ओवैसी ने क्या कहा?

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने खामेनेई को ईरान का सम्मानित नेता बताते हुए कहा कि ईरान निश्चित रूप से जवाबी कार्रवाई करेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि जिनेवा में शांति वार्ता चल रही थी, उसी दौरान हमला किया गया, जिसे उन्होंने कायराना और अमानवीय करार दिया।

ओवैसी ने आगाह किया कि अगर यह युद्ध जारी रहा तो कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। उनका कहना था कि तेल की कीमत में एक डॉलर की बढ़ोतरी का भी भारतीय अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ेगा।

एक अन्य बयान में ओवैसी ने कहा कि भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान और इजरायल दोनों ही अपने पड़ोसियों को शांति से नहीं रहने देते। उन्होंने अफगानिस्तान और ईरान पर हुए हमलों का जिक्र करते हुए चेतावनी दी कि अगर युद्ध नहीं रुका तो इसके परिणाम बेहद गंभीर होंगे।

जनता दल यूनाइटेड के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने बताया कि खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों के परिवारों से लगातार फोन आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विदेश मंत्री से बात की है। कई हवाई अड्डे बंद होने की खबर है और लोगों को घरों में रहने की सलाह दी गई है। स्थिति सामान्य होने पर आगे की व्यवस्था की जाएगी।

सिद्धरामैया ने कहा, अमेरिका का हमला अनावश्यक

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरामैया ने कहा कि राज्य सरकार विदेश मंत्रालय के लगातार संपर्क में है और अरब देशों में फंसे कन्नड़वासियों को सुरक्षित वापस लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, “राज्य सरकार विदेश मंत्रालय के लगातार संपर्क में है, और अरब देशों में फंसे कन्नड़ लोगों को बिना किसी परेशानी के वापस लाने की कोशिश की जा रही है… ईरान पर अमेरिका का हमला गैर-जरूरी है।

उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका, जो शांति का उपदेश देता है, दूसरों पर युद्ध छेड़ रहा है। अमेरिका का रवैया उल्टा है… मैं इसकी निंदा करता हूं… ईरानी नेता अयातुल्ला खामेनेई की हत्या कर दी गई, और मैं उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करूंगा।

अनिल शर्मा
अनिल शर्माhttp://bolebharat.in
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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