बेंगलुरुः कर्नाटक हाई कोर्ट ने गुरुवार (9 अप्रैल) को केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में सभी स्कूलों में वंदे मातरम गाने के निर्देशों के खिलाफ दायर जनहित याचिका खारिज कर दी है। सरकार ने स्कूलों को निर्देश दिया था कि वे दिन की शुरुआत राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के सभी छह छंद गाकर करें। इन श्लोकों में हिंदू देवी-देवताओं से संबंधित श्लोक भी शामिल हैं।
जस्टिस विभु बखरु और जस्टिस सीएम पूनाचा की पीठ ने कहा कि वह इस याचिका पर सुनवई की इच्छुक नहीं है। अदालत ने कहा कि राष्ट्रीय गीत को गाने का कोई वैधानिक आदेश नहीं है।
कर्नाटक हाई कोर्ट ने क्या टिप्पणी की?
अदालत ने इस दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अरविंद कामथ द्वारा प्रस्तुत इस बात पर भी ध्यान दिलाया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस मामले में ‘हो सकता है’ लिखा है और यह अनिवार्य नहीं है। आगे एएसजी ने अदालत को बताया कि इसी तरह की एक अन्य याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था।
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इसके बाद कर्नाटक हाई कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि ” यह स्वीकार किया जाता है कि राष्ट्र गीत किसी भी वैधानिक ढांचे के तहत नहीं आता है।…राष्ट्रगान के विपरीत राष्ट्र गीत का प्रदर्शन अनिवार्य नहीं है।”
याचिकाकर्ता के वकील सोमशेखर राजवंशी ने तर्क दिया कि केंद्र सरकार की हालिया सलाह राज्य द्वारा पोषित स्कूलों में बच्चों को भक्ति गीत गाने के लिए बाध्य कर दिया है।
शुरुआती दो छंदों पर नहीं है कोई विवादः याचिकाकर्ता के वकील
उन्होंने कहा कि वे गीत के पहले दो छंदों जो कि देशभक्ति स्वरूप वाले हैं, पर कोई विवाद नहीं है। गीत का यह संक्षिप्त संस्करण आमतौर पर राष्ट्रगीत के रूप में गाया जाता था जब तक कि केंद्र सरकार ने पिछले महीने एक प्रोटोकॉल सलाह जारी नहीं की थी। इसमें मूल गीत के सभी छह छंदों को राष्ट्रगान के रूप में निर्धारित किया गया था।
याचिकाकर्ता ने चार अतिरिक्त छंदों को गाने को लेकर सवाल किये हैं जिनमें हिंदू देवी-देवताओं का उल्लेख है। विशेष रूप से याचिकाकर्ता ने कहा कि केंद्र द्वारा आधिकारिक संस्करण के रूप में निर्धारित गीत के पांचवें छंद में स्पष्ट रूप से हिंदू देवियों दुर्गा, कमला (लक्ष्मी) और वाणी (सरस्वती) का नाम लेकर आह्वान किया गया है।
उन्होंने तर्क दिया कि यह संविधान के अनुच्छेद 25-28 (अंतरात्मा की स्वतंत्रता, राज्य द्वारा वित्तपोषित संस्थानों में धार्मिक शिक्षा पर प्रतिबंध) और अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) के साथ-साथ संविधान की धर्मनिरपेक्ष संरचना का उल्लंघन करता है।
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उन्होंने यह भी तर्क दिया कि सरकार किसी कार्यकारी आदेश के जरिए सभी नागरिकों और स्कूली बच्चों पर राष्ट्रीय गीत का धार्मिक रूप से विवादास्पद संस्करण थोप नहीं सकती क्योंकि यह संवैधानिक व्यवस्था का उल्लंघन करता है।
इसलिए याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत से यह घोषणा करने की मांग की कि इस मामले में केंद्र की फरवरी 2026 की प्रोटोकॉल अधिसूचना असंवैधानिक है क्योंकि इसमें वंदे मातरम के श्लोक 3-6 को आधिकारिक संस्करण के हिस्से के रूप में निर्धारित किया गया है और स्कूलों में इसके दैनिक पाठ को अनिवार्य किया गया है।
अदालत ने हालांकि यह स्पष्ट कर दिया कि वह जनहित याचिका के मामले पर विचार करने या किसी ऐसे गीत का विश्लेषण करने में अधिक न्यायिक समय व्यतीत करने के लिए इच्छुक नहीं है जो अनिवार्य नहीं है।

