Friday, March 20, 2026
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कर्नाटकः विपक्ष के हंगामे के बीच सदन में पास हुआ हेट स्पीच संबंधी बिल, हो सकती है 7 साल की जेल

कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के हंगामे के बीच हेट स्पीच संबंधी बिल पास हो गया। इसके तहत 7 साल तक की सजा का प्रावधान है। इसके साथ ही 1 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लग सकता है।

बेंगलुरुः कर्नाटक विधानसभा में गुरुवार, 18 दिसंबर को हेट स्पीच एंड हेट क्राइम्स प्रिवेंशन बिल, 2025 ( घृणास्पद भाषण और घृणास्पद अपराध निवारण विधेयक, 2025) विपक्ष के हंगामे के बीच पारित हो गया। इस दौरान सदन में कई बार रुकावट भी देखने को मिली।

कर्नाटक सरकार के गृहमंत्री जी परमेश्वर ने विधेयक पर कहा कि हाल में समाज को ठेस पहुंचाने वाले बयानों में तेजी से वृद्धि हुई है। देश में इस तरह का यह पहला विधेयक पारित हुआ है। इसके तहत अधिकतम सात साल की सजा तथा एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।

कर्नाटक सरकार ने क्या कहा?

गृहमंत्री जी परमेश्वर ने हत्याओं, हमलों और बढ़ते सामाजिक तनावों का जिक्र करते हुए कहा कि “हाल के दिनों में कई लोग समाज को ठेस पहुंचाने वाले बयान दे रहे हैं और इसमें काफी वृद्धि हुई है। हम नहीं जानते कि इनका क्या प्रभाव होगा?”

परमेश्वर ने आगे कहा कि नफरत धर्म, जाति और लिंग के आधार पर भेदभाव से उपजती है। उन्होंने इसे रोकने पर जोर दिया। इस दौरान उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभवों को याद करते हुए कहा कि बहिष्कार और भेदभाव केवल शब्द नहीं हैं।

उन्होंने कहा “जब मैं युवा था तो स्कूल जाते समय लोग मुझ पर पानी फेंकते थे।” उन्होंने आगे कहा बसवन्ना की शिक्षाओं को सदियां बीत जाने के बावजूद समानता अभी पूरी तरह से साकार नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर को सभी स्वीकार करते हैं और हमें उनके द्वारा दिए गए संविधान को लागू करना चाहिए।

गृह मंत्री ने घृणास्पद भाषण और घृणा अपराध निवारण विधेयक, 2025 के प्रावधानों की व्याख्या करते हुए कहा कि यह कानून भाषणों, पुस्तकों या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से घृणा फैलाने वाले व्यक्तियों या संगठनों को नियंत्रित करेगा।

उन्होंने कहा कि यह विधेयक पुरानी पत्रिकाओं पर भी लागू होगा। इस कानून के तहत अधिकतम सात साल तक की कैद और 50,000 रुपये से लेकर 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

विपक्ष ने साधा निशाना

विपक्ष ने हालांकि इस विधेयक का विरोध किया। नेता प्रतिपक्ष आर अशोक ने विधेयक की आलोचना करते हुए इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला बताया। उन्होंने सवाल किया कि आजादी के 75 वर्षों बाद ऐसे किसी विधेयक की क्या जरूरत है और आरोप लगाया कि इसका इस्तेमाल लोगों को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है। अशोक ने दावा किया कि इसमें जमानत का कोई प्रावधान नहीं है और चेतावनी दी कि इस कानून के तहत पत्रकारों को भी जेल भेजा जा सकता है।

उन्होंने कहा, “यह विधेयक राजनीतिक प्रतिबल निपटाने का ब्रह्मास्त्र बन गया है,” और चेतावनी दी कि दोष सिद्ध होने से पहले निर्दोष लोगों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।

अशोक ने आगे सत्तारूढ़ पार्टी को चेतावनी देते हुए कहा कि कानून भविष्य में उनके खिलाफ ही जा सकता है और उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इस तरह का कानून बनाने से पहले सावधानी बरतें।

वहीं, लोकसभा सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने भी इस विधेयक को लेकर निशाना साधा और कहा कि भाजपा इसके खिलाफ एक कानूनी लड़ाई लड़ेगा क्योंकि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को कमजोर करता है।

सदन में इस कानून पर चर्चा के दौरान तीखी बहस छिड़ गई जिसमें विपक्षी सदस्यों ने विधेयक को अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला बताया।

अमरेन्द्र यादव
अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...
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