Friday, March 20, 2026
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राष्ट्रपति ट्रम्प की तस्वीर सहित 16 एपस्टीन फाइलें वेबसाइट से अचानक गायब; क्या था उन फाइलों में?

ये सभी फाइलें शुक्रवार तक सार्वजनिक रूप से उपलब्ध थीं, लेकिन शनिवार तक वेबसाइट से हट चुकी थीं। न्याय विभाग ने न तो इनके हटाए जाने की कोई वजह बताई और न ही इस बदलाव को लेकर कोई सार्वजनिक सूचना जारी की।

वाशिंगटनः अमेरिकी न्याय विभाग (डीओजे) की वेबसाइट से जेफ्री एपस्टीन से जुड़े कम से कम 16 दस्तावेज अचानक गायब हो जाने से अमेरिका में नया राजनीतिक और सार्वजनिक विवाद खड़ा हो गया है। इनमें एक ऐसा फाइल भी शामिल है, जिसमें अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तस्वीर (फाइल नंबर 468) बताई जा रही है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ये सभी फाइलें शुक्रवार तक सार्वजनिक रूप से उपलब्ध थीं, लेकिन शनिवार तक वेबसाइट से हट चुकी थीं। न्याय विभाग ने न तो इनके हटाए जाने की कोई वजह बताई और न ही इस बदलाव को लेकर कोई सार्वजनिक सूचना जारी की।

एसोसिएट प्रेस के मुताबिक, न्याय विभाग के प्रवक्ता ने इस मामले पर पूछे गए सवालों का भी कोई जवाब नहीं दिया।

क्या था उन गायब फाइलों में?

गायब दस्तावेजों में कुछ पेंटिंग्स की तस्वीरें थीं, जिनमें नग्न महिलाओं को दिखाया गया था। एक फोटो ऐसा था जिसमें अलमारियों और दराजों में रखी कई तस्वीरें नजर आ रही थीं। इन्हीं में से एक तस्वीर में डोनाल्ड ट्रंप, जेफ्री एपस्टीन, मेलानिया ट्रंप और एपस्टीन की करीबी सहयोगी घिस्लेन मैक्सवेल साथ दिखाई दे रहे थे।

हाउस ओवरसाइट कमेटी के डेमोक्रेट सदस्यों ने इस मुद्दे को एक्स पर उठाते हुए सवाल किया, “आखिर क्या छुपाया जा रहा है? अमेरिकी जनता के लिए पारदर्शिता जरूरी है।” बाद में डेमोक्रेट्स ने खास तौर पर फाइल नंबर 468 का जिक्र किया, जिसके बारे में उनका दावा किया गया है कि उसमें ट्रंप की एक तस्वीर थी और उसे अब अमेरिकी न्याय विभाग की रिलीज से हटा दिया गया है। कमेटी ने अमेरिकी अटॉर्नी जनरल पैम बॉन्डी से भी सीधे सवाल किए कि क्या यह सच है और अगर हां, तो और क्या-क्या दबाया जा रहा है।

इन फाइलों का अचानक गायब होना ऐसे वक्त में हुआ है, जब पहले से ही एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों की रिलीज को लेकर न्याय विभाग सवालों के घेरे में है। कांग्रेस के एक कानून के तहत अमेरिकी न्याय विभाग को एपस्टीन फाइलें सार्वजनिक करनी थीं और इसके तहत हजारों पन्ने जारी भी किए गए। लेकिन इन दस्तावेजों में एपस्टीन के अपराधों या उन फैसलों को लेकर बहुत कम नई जानकारी मिली, जिनके चलते वह वर्षों तक संघीय आरोपों से बचता रहा।

कई अहम रिकॉर्ड अब भी सामने नहीं आए हैं। इनमें पीड़ितों से जुड़े एफबीआई इंटरव्यू और न्याय विभाग के आंतरिक मेमो शामिल हैं, जिनमें यह चर्चा थी कि एपस्टीन पर आरोप क्यों लगाए जाएं या क्यों न लगाए जाएं। हालांकि कुछ नई बातें जरूर सामने आईं, जैसे 1996 की एक पहले न देखी गई शिकायत, जिसमें एपस्टीन पर बच्चों की तस्वीरें चुराने का आरोप था, और यह जानकारी कि 2000 के दशक में एक संघीय जांच पर विचार किया गया था, जिसे बाद में छोड़ दिया गया।

अब तक जारी फाइलों में एपस्टीन के न्यूयॉर्क और यूएस वर्जिन आइलैंड्स स्थित घरों की कई तस्वीरें हैं, साथ ही कई राजनेताओं और मशहूर हस्तियों के फोटो भी शामिल हैं। पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की कुछ नई तस्वीरें जरूर सामने आई हैं, लेकिन ट्रंप से जुड़ी सामग्री सीमित बताई जा रही है। न तो ट्रंप और न ही क्लिंटन पर एपस्टीन से जुड़े किसी अपराध का आरोप लगाया गया है और दोनों ही उससे दूरी बना चुके हैं।

कई दस्तावेज या तो बुरी तरह से सेंसर किए गए हैं या बिना संदर्भ के हैं। न्यूयॉर्क की एक ग्रैंड जूरी जांच से जुड़ा 119 पन्नों का एक दस्तावेज पूरी तरह काला किया गया है। न्याय विभाग का कहना है कि पीड़ितों की पहचान की सुरक्षा के लिए ऐसा किया गया है और आगे और रिकॉर्ड जारी किए जाएंगे, लेकिन यह नहीं बताया गया कि कब।

पीड़ितों ने जताई नाराजगी

फाइलों को अधूरा छोड़ने और प्रकाशित सामग्री को वापस हटाने से एपस्टीन के पीड़ित नाराज हैं। एपस्टीन पर किशोरावस्था में यौन शोषण का आरोप लगाने वाली मरीना लासेर्दा ने कहा कि मुझे लगता है कि एक बार फिर न्याय विभाग और पूरी न्याय व्यवस्था हमें निराश कर रही है।

गौरतलब है कि जेफ्री एपस्टीन को 2019 में संघीय सेक्स ट्रैफिकिंग के आरोपों में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन मुकदमे से पहले ही जेल में उसकी मौत हो गई। आधिकारिक तौर पर उसकी मौत को आत्महत्या बताया गया। संघीय अभियोजकों का कहना है कि एपस्टीन और घिस्लेन मैक्सवेल से जुड़े लाखों पन्नों के रिकॉर्ड उनके पास हैं, जिनमें से बड़ा हिस्सा अब भी सार्वजनिक नहीं किया गया है।

अनिल शर्मा
अनिल शर्माhttp://bolebharat.in
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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