वॉशिंगटन: अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस सप्ताह के अंत में पाकिस्तान का दौरा कर सकते हैं। अमेरिकी न्यूज चैनल सीएनएन अपनी रिपोर्ट में कहा है कि वेंस का यह दौरा पश्चिम एशिया में छिड़े संघर्ष के मद्देनजर है। रिपोर्ट के अनुसार वेंस यह यात्रा अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ छेड़े गए युद्ध से बाहर निकलने के विकल्पों पर चर्चा के लिए होगी।
यह घटनाक्रम तब सामने आया जब ईरानी प्रतिनिधियों ने कथित तौर पर ट्रंप प्रशासन के बातचीत के दावे को ठुकरा दिया है। ईरान ने ये भी बताया दिया है कि वे स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर जैसे अमेरिकी दूतों के साथ बातचीत फिर से शुरू नहीं करना चाहते। इसके बाद इस्लामाबाद ने वेंस का नाम आगे बढ़ाया है। बताया जा रहा है कि ईरान ने बातचीत के लिए वेंस को अपनी पसंद बताया है।
‘कुछ नहीं बदला है…जेडी वेंस हमेशा से हिस्सा हैं’
इस बीच व्हाइट हाउस ने इस बदलाव को कम करके दिखाने की कोशिश की है जिसमें कहा जा रहा है कि अब ट्रंप के उपराष्ट्रपति तेहरान के साथ बातचीत में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने जा रहे हैं। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने बुधवार को कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि कुछ बदला है। उपराष्ट्रपति हमेशा से ही राष्ट्रपति के प्रमुख सदस्य रहे हैं – राष्ट्रपति के दाहिने हाथ और राष्ट्रपति की राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य। वे प्रशासन के पूरे कार्यकाल के दौरान इन चर्चाओं का हिस्सा रहे हैं।’
लीविट ने जोर देकर कहा कि ट्रंप विदेश और घरेलू दोनों ही मामलों में वेंस से सलाह लेते रहे हैं। लीविट ने फिलहाल बताने से इनकार किया कि अमेरिका ईरान में किन लोगों से बातचीत कर रहा है। हालांकि, सीएनएन ने अपनी रिपोर्ट में घटनाक्रम से परिचित सूत्रों का हवाला देते हुए बताया है कि ट्रंप की टीम इस वीकेंड पाकिस्तान में वेंस सहित कुछ अन्य अधिकारियों के साथ युद्ध को रोकने के लिए एक बैठक आयोजित करने की कोशिश कर रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि संभावित यात्रा का समय, स्थान और उसमें शामिल होने वाले लोगों के बारे में अभी निश्चित रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता।
जेरेड कुशनर और विटकॉफ से क्यों चिढ़ा ईरान?
मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ईरानी वार्ताकारों ने ट्रंप के मध्य पूर्व दूत स्टीव विटकॉफ या ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर के साथ बातचीत करने से साफ तौर पर इनकार किया है। ईरान का मानना है कि इन दोनों के साथ बातचीत चल ही रही थी, तभी अमेरिका-इजराइल ने अचानक हमला कर दिया था। सीएनएन ने एक राजनयिक सूत्र के हवाले से बताया कि ईरान को लगता है कि बातचीत का प्रस्ताव केवल अमेरिका और इजराइल के लिए एक और चाल है, ताकि उन्हें हमले के लिए कुछ और समय मिल सके।
इसके अलावा ऐसी खबरें हैं कि खाड़ी देशों ने मध्यस्थता से पहले ही दूरी बना ली है। दरअसल, ईरान कई खाड़ी देशों पर भी हमला कर रहा है, जिससे वे इस कूटनीतिक प्रक्रिया से दूरी बनाते नजर आ रहे हैं। ऐसे में पाकिस्तान की भूमिका बढ़ गई है।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा है कि उनका देश पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध को समाप्त करने के लिए सार्थक और निर्णायक वार्ता को बढ़ावा देने के लिए तैयार है। साथ ही, उन्होंने अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता के लिए इस्लामाबाद को एक संभावित स्थल के रूप में पेश करने का प्रयास किया है।
‘द गार्डियन’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के अधिकारियों ने कहा कि अमेरिका और ईरान इस सप्ताह के अंत तक इस्लामाबाद में वार्ता के लिए मिल सकते हैं, ताकि लगभग एक महीने पहले शुरू हुए इस युद्ध को समाप्त करने पर चर्चा की जा सके।
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