श्रीनगरः खुफिया एजेंसियों के आकलन के मुताबिक जम्मू क्षेत्र में पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठनों से जुड़े करीब 30–35 आतंकवादी सक्रिय हैं। हालांकि भारतीय सेना ने इस बार सर्दियों को लो-एक्टिविटी पीरियड मानने से इनकार करते हुए चिल्लई कलां के दौरान भी अपने काउंटर-टेरर ऑपरेशनों को और तेज कर दिया है।
शोपियां जिले में पुलिस ने सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम के तहत शनिवार तीन ओवरग्राउंड वर्कर्स को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान ओवैस अहमद लोन, मशूक अहमद शाह और सुब्जार अहमद गनी के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक ये लोग बार-बार राज्य की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाली गतिविधियों में शामिल पाए गए थे। पहले भी उनके खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धाराओं के तहत कार्रवाई की गई थी, लेकिन गैरकानूनी गतिविधियां जारी रहने के चलते जिला मजिस्ट्रेट से हिरासत आदेश लेकर उन्हें जम्मू की कोट भलवाल केंद्रीय जेल भेज दिया गया। पुलिस ने साफ किया कि आतंकियों के सहयोगी तंत्र को खत्म करने और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए ऐसी सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
रक्षा और खुफिया सूत्रों के अनुसार, लगातार दबाव और सुरक्षा बलों की सक्रियता के चलते आतंकवादी अब किश्तवाड़ और डोडा के ऊंचे और मध्य पर्वतीय इलाकों में शिफ्ट हो गए हैं, जहां नागरिक आबादी बेहद कम है। इसे सर्दियों में छिपने, दोबारा संगठित होने और सुरक्षा बलों की नजर से बचने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। परंपरागत रूप से चिल्लई कलां के दौरान भारी बर्फबारी और संपर्क मार्ग बंद होने के कारण आतंकी गतिविधियों में कमी आती रही है, लेकिन इस बार हालात अलग हैं।
आतंकवाद के पूरे नेटवर्क पर शिकंजा कसने के प्रयास तेज

21 दिसंबर से शुरू हुए 40 दिन के चिल्लई कलां के साथ ही सेना ने अपनी ऑपरेशनल पहुंच को बर्फ से ढके और दुर्गम इलाकों तक बढ़ा दिया है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अस्थायी विंटर बेस और सर्विलांस पोस्ट स्थापित किए गए हैं, ताकि आतंकी ठिकानों पर लगातार दबाव बना रहे। सेना की गश्त अब पहाड़ी चोटियों, जंगलों और दूरदराज की घाटियों तक नियमित रूप से की जा रही है, जिससे आतंकियों को किसी भी तरह का सुरक्षित ठिकाना न मिल सके।
अधिकारियों के मुताबिक आतंकी समूहों को दुर्गम और प्रतिकूल इलाकों तक सीमित रखना, उनकी सप्लाई लाइनों को बाधित करना और आबादी वाले क्षेत्रों की ओर किसी भी तरह की आवाजाही को रोकना है। इस अभियान में जम्मू-कश्मीर पुलिस, सीआरपीएफ, स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप, वन विभाग के गार्ड और विलेज डिफेंस गार्ड्स के साथ करीबी तालमेल में कार्रवाई की जा रही है। साझा खुफिया इनपुट के आधार पर आतंकियों की गतिविधियों का मैप तैयार किया जा रहा है और बिना देरी के लक्षित ऑपरेशन अंजाम दिए जा रहे हैं।
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि स्थानीय समर्थन में कमी और निचले इलाकों में बढ़ी सतर्कता के कारण आतंकी अब काफी हद तक अलग-थलग पड़ चुके हैं। कुछ इलाकों से ग्रामीणों पर भोजन और शरण के लिए दबाव बनाने की कोशिशों की सूचना भी मिली है, लेकिन इन प्रयासों को खास सफलता नहीं मिली है।
विंटर वॉरफेयर यूनिट्स भी तैनात

बर्फीले और ऊंचाई वाले इलाकों की चुनौती से निपटने के लिए सेना ने विशेष रूप से प्रशिक्षित विंटर वॉरफेयर यूनिट्स तैनात की हैं। इन इकाइयों को हाई-एल्टीट्यूड सर्वाइवल, बर्फ में नेविगेशन और एवलांच रिस्पॉन्स का प्रशिक्षण मिला है। इसके साथ ही ड्रोन, थर्मल इमेजर्स, ग्राउंड सेंसर्स और सर्विलांस रडार जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर बर्फीले इलाकों में भी हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। सर्च और सर्विलांस ऑपरेशन्स को रोटेशन में जारी रखा जा रहा है, ताकि एक बार साफ किए गए इलाके दोबारा खाली न हो सकें।
साथ ही, संभावित हमलों से निपटने की तैयारी के तहत कठुआ जिले में अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे इलाकों और पुलिस थानों में फिदायीन विरोधी मॉक ड्रिल भी की गई। इस अभ्यास का मकसद किसी भी आतंकी हमले की स्थिति में पुलिस की प्रतिक्रिया क्षमता, सतर्कता और ऑपरेशनल तत्परता को परखना और मजबूत करना था।

