लखनऊ: उत्तर प्रदेश में बसपा के एकमात्र विधायक उमाशंकर सिंह के घर और दफ्तर पर बुधवार को शुरू हुई आयकर विभाग की छापेमारी को लेकर सियासी बयानबाजी और चर्चाएं तेज हो गई हैं। सामने आई जानकारी के अनुसार छापेमारी गुरुवार को भी जारी है। उमाशंकर सिंह रसड़ा से विधायक होने के साथ-साथ एक बड़े कारोबारी भी हैं। उनकी अपनी कंस्ट्रक्शन कंपनी है। उनके आवास और ऑफिस में छापेमारी को लेकर बसपा सुप्रीमो मायावती ने नाराजगी जताई है। दूसरी ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार में मंत्री भाजपा के दिनेश प्रताप सिंह ने भी छापेमारी की टाइमिंग को लेकर सवाल उठाए हैं।
भाजपा मंत्री ने टाइमिंग पर क्यों उठाया सवाल?
दिनेश प्रताप सिंह ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ‘दो साल से अधिक समय से वह जीवन और मृत्यु के बीच जूझ रहे हैं। मौजूदा हालात में उनका सारा समय और पैसा कमाने पर नहीं, बल्कि अपनी जान बचाने पर खर्च हो रहा है। उनके लगभग सभी व्यवसाय ठप्प हो गए हैं।’
दरअसल, 55 साल के उमाशंकर सिंह कैंसर से जूझ रहे हैं। आयकर विभाग की ओर से छापेमारी के कारणों के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है लेकिन चर्चाएं कई तरह की चल पड़ी हैं। राजनीतिक हलकों में ये चर्चा भी रही है कि बसपा के विधायक होने के बावजूद उमाशंकर सिंह मौजूदा योगी सरकार के करीबी रहे हैं। सीएम योगी इस समय विदेश दौरे पर हैं तो यह समय छापेमारी के लिए क्यों चुना गया। सोशल मीडिया पर तमाम तरह की अटकलें चल रही हैं। कई इसे भाजपा के अंदरुनी दिल्ली बनाम लखनऊ के एंगल से भी जोड़ रहे हैं।
वहीं, भाजपा मंत्री दिनेश प्रताप के अनुसार बलिया जिले के रसड़ा से बसपा के विधायक फिलहाल अपने आवास पर एकांतवास में हैं और विधानसभा सत्र में शामिल नहीं हो पा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि तलाशी के दौरान चिकित्सा कर्मचारियों को भी परिसर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी गई।
उन्होंने कहा, ‘इस समय तो नर्स या डॉक्टर को भी उनके घर जाने की इजाजत नहीं दी जा रही है। अगर उनकी जान को कोई खतरा होता है, तो इसके लिए ये असंवेदनशील संस्थाएं जिम्मेदार होंगी। उन्होंने आगे कहा कि अदालतें भी बहुत ही दुर्लभ मामलों में मानवीय आधार पर राहत देती हैं और सवाल उठाया कि क्या यह कार्रवाई ‘राजनीतिक बदले की भावना’ से प्रेरित है।
उन्होंने कहा, ‘ईश्वर ऐसे राजनीतिक नेताओं और संस्थाओं को अक्ल दे।’
मंत्री के अनुसार, उमा शंकर सिंह पिछले दो वर्षों से कैंसर का इलाज करा रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘केंद्रीय गृह मंत्री (अमित शाह) ने मानवीय आधार पर उनके इलाज में बहुत मदद की। प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी अमेरिका में उनका मामला उठाकर मदद की।’
उन्होंने आगे कहा, ‘राजनीति छोड़ी जा सकती है, लेकिन बेटी को त्यागा नहीं जा सकता, और जो व्यक्ति अपनी बेटी को त्याग सकता है, उस पर राजनीति में भरोसा नहीं किया जा सकता।’
असल में विधान परिषद के सदस्य दिनेश प्रताप सिंह, जिनके पास बागवानी, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार और कृषि निर्यात मंत्रालय का प्रभार है, रिश्ते में उमाशंकर सिंह के समधी हैं। दिनेश प्रताप की बेटी की शादी उमाशंकर सिंह के इकलौते बेटे से हुई है। यह विवाह 2024 में हुआ था और काफी चर्चित रहा था।
दिनेश प्रताप पहले कांग्रेस से जुड़े थे। वे 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले 2018 में भाजपा में शामिल हुए थे। इसके बाद रायबरेली से सोनिया गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ा। सिंह ने कड़ी टक्कर दी और सोनिया गांधी की जीत का अंतर काफी कम कर दिया, जो इस सीट से भाजपा उम्मीदवार का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। भाजपा ने उन्हें उसी सीट से राहुल गांधी के खिलाफ फिर से मैदान में उतारा, लेकिन कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगाने में नाकाम रही।
उमाशंकर सिंह के यहां छापेमारी मानवता के खिलाफ: मायावती
इस बीच बसपा सुप्रीमो मायावती की भी तीखी प्रतिक्रिया आई है। उन्होंने कहा कि अति-गंभीर बीमारी के दौरान की गई यह कार्रवाई अति दुर्भाग्यपूर्ण और मानवता के खिलाफ है। मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि विधायक उमा शंकर सिंह जबसे बीएसपी में आए हैं, उन्होंने पूरी ईमानदारी और निष्ठा से अपनी जिम्मेदारी निभाई है और आज तक उनके क्षेत्र से उनके बारे में किसी भी प्रकार से अवैध तरीके से संपत्ति अर्जित करने या अन्य कोई भी गलत कार्य करने की शिकायत नहीं आई है।
पिछले लगभग दो वर्षों से वे काफी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं, ऐसी स्थिति में आयकर विभाग को अगर उनके संबंध में कोई शिकायत मिली थी तो वे उनके स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर उनके ठीक हो जाने के बाद पूछताछ कर सकते थे। हम किसी भी विभाग के कार्य में दखल नहीं दे रहे हैं, लेकिन आज जिस तरह से उनके ऊपर अति-गंभीर बीमारी के दौरान कार्रवाई की गई है, वह अति दुर्भाग्यपूर्ण और मानवता के खिलाफ है।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने क्या कहा?
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी छापेमारी पर सवाल उठाए हैं। अखिलेश ने पत्रकारों से कहा, ‘मुद्दा यह नहीं है कि बसपा के इकलौते विधायक के घर पर छापा मारा गया है। सवाल यह है कि आयकर विभाग को कौन निर्देश देता है कि छापे कहाँ मारे जाएं?’
उन्होंने आगे कहा, ‘मुद्दा यह नहीं है कि उमा शंकर सिंह बसपा के इकलौते विधायक हैं। मुद्दा यह है कि भाजपा के किसी भी विधायक पर इस तरह के छापे नहीं पड़ते। अगर आप भाजपा को खुश रखेंगे, तो आपके परिसर पर कभी छापा नहीं पड़ेगा।’
उन्होंने आरोप लगाया कि ‘भाजपा नेता अपने ही लोगों के प्रति वफादार नहीं हैं।’ बताते चलें कि बुधवार सुबह जल्दी तीन दर्जन से अधिक अधिकारी भारी पुलिस सुरक्षा के साथ बसपा विधायक उमाशंकर सिंह के घर पहुंचे। आयकर अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी के कारण इलाके में हलचल बढ़ गई।
सूत्रों के अनुसार, आयकर टीम सुबह करीब 7 बजे पहुंची और परिसर को सील कर दिया। लगभग 30 अधिकारियों का एक दल स्थानीय पुलिस की मदद से वित्तीय लेनदेन और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी। तलाशी के दौरान अधिकारियों ने घर में पाई गई फाइलें, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य रिकॉर्ड की समीक्षा शुरू कर दी है।

