श्रीहरिकोटा: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के लिए साल का पहला मिशन बड़ी चुनौती लेकर आया। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सोमवार सुबह लॉन्च हुए PSLV-C62 मिशन के तीसरे चरण में गड़बड़ी आई है। इसरो ने बताया है कि चरण के आखिर में एक गड़बड़ी हुई और इसकी जांच शुरू कर दी गई है।
यह लॉन्चिंग सोमवार सुबह 10.17 बजे सफलतापूर्वक हुई थी। इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने बताया, ‘आज हमने PSLV C62/EOS- N1 मिशन का प्रयास किया। PSLV व्हीकल चार स्टेज वाला व्हीकल है जिसमें दो सॉलिड स्टेज और दो लिक्विड स्टेज हैं।’
उन्होंने आगे कहा, ‘तीसरे स्टेज के आखिर तक व्हीकल का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक था। तीसरे स्टेज के आखिर में हमें व्हीकल में ज्यादा गड़बड़ी दिखने लगी। इसके बाद, फ्लाइट पाथ में व्हीकल में एक डेविएशन देखा गया। हम डेटा का एनालिसिस कर रहे हैं और जल्द से जल्द वापस आएंगे।’
15 सैटेलाइट लेकर उड़ा था PSLV-C62
इसरो ने साल 2026 के अपने इस पहले मिशन में अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट (EOS-N1) ‘अन्वेषा’ सहित 14 सैटेलाइट भेजा था। इन कुल 15 सैटेलाइट में 7 भारतीय और 8 विदेशी सैटेलाइट थे। हैदराबाद स्थित ध्रुवा स्पेस ने भी इस लॉन्च के जरिए अपने सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजे थे। वहीं, 8 विदेशी सैटेलाइट फ्रांस, नेपाल, ब्राजील और यूनाइटेड किंगडम के थे।
वहीं, भारत के अन्वेषा सैटेलाइट को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने विकसित किया था। इस लॉन्च का मकसद खेती, अर्बन मैपिंग और पर्यावरण मॉनिटरिंग में भारत की रिमोट सेंसिंग क्षमताओं को बढ़ाना था। यह उन्नत इमेजिंग क्षमताओं से लैस है।
अन्वेषा उन्नत इमेजिंग क्षमताओं से लैस स्पाई (खुफिया) सैटेलाइट भी है। इसमें सटीक निगरानी की जबर्दस्त क्षमता है। यह धरती से कई सौ किलोमीटर ऊपर होने के बावजूद जंगलों या जंग के मैदानों में बंकरों में छिपे दुश्मनों की तस्वीरें भी खींच सकता है।
पिछले साल PSLV-C61 मिशन को भी लगा था झटका
इससे पहले 18 मई, 2025 को लॉन्च किया गया PSLV-C61 भी तीसरे स्टेज में खराबी के कारण EOS-09 अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट को कक्षा में स्थापित करने में विफल रहा था। यह इसरो को अपने मिशन में मिलने वाली दुर्लभ नाकामियों में से एक थी। यह लॉन्च PSLV की 64वीं उड़ान और PSLV-DL वेरिएंट का पाँचवाँ मिशन था।
यह मिशन भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए इसलिए भी अहम माना जा रहा था क्योंकि पहली बार किसी भारतीय निजी कंपनी ने पीएसएलवी मिशन में बड़ी हिस्सेदारी की। पीएसएलवी की दुनिया के सबसे भरोसेमंद लॉन्च वाहनों में गिनती होती रही है। इसी रॉकेट से चंद्रयान-1, मंगलयान और आदित्य-एल1 जैसे मिशन लॉन्च किए जा चुके हैं। साल 2017 में पीएसएलवी ने एक ही मिशन में 104 सैटेलाइट लॉन्च करके वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था।
बताते चलें कि 2026 का PSLV-C62 मिशन PSLV-C61 में मिली विफलता को लेकर इसरो की विस्तृत समीक्षा के बाद आया था, जो PSLV के तीन दशक के ऑपरेशनल इतिहास में मिली बेहद कम असफलताओं में से एक है। इसरो ने मई 2025 के मिशन के बाद एक समिति का भी गठन किया था जिसने विफलताओं की वजहों की समीक्षा की थी और लॉन्चर को फिर से उड़ान भरने से पहले नए बेहतर उपाय लागू किए थे।

