Friday, March 20, 2026
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इसरो ने LVM3 से BlueBird Block-2 सैटेलाइट लॉन्च कर रचा इतिहास, संचार क्षेत्र के लिए क्यों मानी जा रही बड़ी उपलब्धि?

यह मिशन इसरो और AST SpaceMobile के बीच हुए एक वाणिज्यिक समझौते का हिस्सा है। ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 अगली पीढ़ी का कम्युनिकेशन सैटेलाइट है, जिसे सीधे आम मोबाइल स्मार्टफोन्स तक हाई-स्पीड सेल्युलर ब्रॉडबैंड उपलब्ध कराने के लिए डिजाइन किया गया है।

श्रीहरिकोटाः भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बुधवार एक और बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली। इसरो ने अपने सबसे शक्तिशाली रॉकेट LVM3 के छठे परिचालन मिशन LVM3-M6 को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। यह मिशन सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च हुआ, जिसमें अमेरिकी कंपनी एएसटी स्पेसमोबाइल (AST SpaceMobile) का ब्लूबर्ड ब्लॉक (BlueBird Block-2) संचार उपग्रह लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में स्थापित किया गया। इसरो ने पुष्टि की है कि उपग्रह को उसके निर्धारित कक्षा में सटीक रूप से स्थापित कर दिया गया है।

यह मिशन इसरो और एएसटी स्पेसमोबाइल के बीच हुए एक वाणिज्यिक समझौते का हिस्सा है। ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 अगली पीढ़ी का कम्युनिकेशन सैटेलाइट है, जिसे सीधे आम मोबाइल स्मार्टफोन्स तक हाई-स्पीड सेल्युलर ब्रॉडबैंड उपलब्ध कराने के लिए डिजाइन किया गया है। यह तकनीक भविष्य में दूरदराज और नेटवर्क से वंचित इलाकों में कनेक्टिविटी की तस्वीर बदल सकती है।

इसरो के चेयरमैन वी. नारायणन ने मिशन की सफलता पर कहा कि लॉन्च व्हीकल ने ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 कम्युनिकेशन सैटेलाइट को उसकी निर्धारित कक्षा में पूरी सटीकता के साथ स्थापित किया है। उन्होंने बताया कि यह अमेरिका की कंपनी एएसटी स्पेसमोबाइल के लिए पहला पूरी तरह डेडिकेटेड कमर्शियल लॉन्च है।

वी. नारायणन के मुताबिक यह श्रीहरिकोटा से किया गया 104वां लॉन्च है और LVM-3 लॉन्च व्हीकल का नौवां सफल मिशन, जो इसकी शत-प्रतिशत विश्वसनीयता को दर्शाता है। उन्होंने यह भी बताया कि यह सिर्फ 52 दिनों के भीतर LVM-3 का लगातार दूसरा मिशन है, जो लॉन्च सिस्टम की तैयारी और संचालन क्षमता को दिखाता है।

इसरो चेयरमैन ने कहा कि यह भारतीय लॉन्च व्हीकल के जरिए भारतीय धरती से अंतरिक्ष में भेजा गया अब तक का सबसे भारी उपग्रह है। साथ ही यह LVM-3 का तीसरा पूरी तरह कमर्शियल मिशन भी है, जिसने एक बार फिर इस रॉकेट के मजबूत और भरोसेमंद ट्रैक रिकॉर्ड को साबित किया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी बधाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने LVM3-M6 मिशन की सफलता पर इसरो को बधाई दी है। उन्होंने इसे भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में एक अहम उपलब्धि बताते हुए कहा कि भारतीय धरती से अब तक लॉन्च किया गया यह सबसे भारी उपग्रह मिशन देश के लिए गर्व का क्षण है।

पीएम मोदी ने कहा कि LVM3-M6 की सफलता के साथ अमेरिकी उपग्रह ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 को उसकी निर्धारित कक्षा में स्थापित किया गया है, जो भारत की अंतरिक्ष यात्रा में एक नया मील का पत्थर है। यह मिशन न सिर्फ भारत की हेवी-लिफ्ट लॉन्च क्षमता को और मजबूत करता है, बल्कि वैश्विक कमर्शियल लॉन्च बाजार में भारत की बढ़ती भूमिका को भी रेखांकित करता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को भी दर्शाती है। उन्होंने इसरो के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की कड़ी मेहनत की सराहना करते हुए उन्हें बधाई दी। पीएम मोदी ने अपने संदेश में कहा कि भारत अंतरिक्ष की दुनिया में लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

BlueBird Block-2 क्या है?

BlueBird Block-2 अमेरिका की कंपनी एएसटी स्पेसमोबाइल का एक अत्याधुनिक कम्युनिकेशन सैटेलाइट है, जिसे लो अर्थ ऑर्बिट में तैनात किया गया है। ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 का वजन इसरो के अब तक के एलईओ पेलोड रिकॉर्ड से करीब 1,700 किलोग्राम ज्यादा है, जो एलवीएम3 की बढ़ती क्षमता को साफ तौर पर दिखाता है।

यह एक ऐसे सैटेलाइट नेटवर्क का हिस्सा है, जिसका मकसद मोबाइल सिग्नल को सीधे स्मार्टफोन तक पहुंचाना है। इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके लिए न तो मोबाइल टावरों की जरूरत होती है और न ही किसी खास डिवाइस की। सामान्य 4G और 5G स्मार्टफोन से ही कॉल, वीडियो, मैसेज और डेटा सेवाएं दुनिया के किसी भी कोने में उपलब्ध कराई जा सकेंगी। ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह सीधे आम स्मार्टफोन्स तक 4G और 5G सिग्नल पहुंचा सके। इसका उद्देश्य दुनिया के उन दूरदराज इलाकों को कनेक्ट करना है, जहां आज भी मोबाइल नेटवर्क कमजोर या पूरी तरह नदारद है। इस परियोजना में AT&T और वोडाफोन आइडिया जैसी बड़ी टेलीकॉम कंपनियां भी साझेदार हैं।

यह उपग्रह पृथ्वी से करीब 600 किलोमीटर की ऊंचाई पर परिक्रमा करता है। इसका वजन लगभग 6,500 किलोग्राम है और इसमें 223 वर्ग मीटर का विशाल एंटीना लगा है। इसी बड़े एंटीना के कारण इसे लो अर्थ ऑर्बिट में तैनात अब तक का सबसे बड़ा वाणिज्यिक संचार उपग्रह माना जा रहा है। ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 को खास तौर पर उन इलाकों के लिए गेम-चेंजर माना जा रहा है, जहां आज भी मोबाइल नेटवर्क या तो कमजोर है या बिल्कुल मौजूद नहीं है।

‘बाहुबली’ रॉकेट LVM3 के नाम एक और रिकॉर्ड

ब्लूबर्ड ब्लॉक-2, LVM3 रॉकेट द्वारा लो अर्थ ऑर्बिट में भेजा गया अब तक का सबसे भारी पेलोड है। इसके साथ ही यह एलईओ में तैनात होने वाला सबसे बड़ा वाणिज्यिक संचार उपग्रह भी माना जा रहा है। इस उपलब्धि ने एक बार फिर LVM3 की क्षमता और भरोसे को साबित किया है।

भारत का LVM3 अपनी जबरदस्त शक्ति और विश्वसनीयता के कारण लोकप्रिय रूप से ‘बाहुबली रॉकेट’ कहा जाता है। यह उपनाम तेलुगु फिल्म बाहुबली के ताकतवर नायक से प्रेरित है।

LVM3 भारत का सबसे भारी और शक्तिशाली लॉन्च व्हीकल है, जो जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (जीटीओ) में करीब 4.2 टन और लो अर्थ ऑर्बिट में 8 से 10 टन तक का पेलोड ले जाने में सक्षम है। इसे इसरो ने खास तौर पर कठिन और उच्च-जोखिम वाले मिशनों के लिए विकसित किया है। यही रॉकेट भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ के लिए भी चुना गया है, जो इसकी अहमियत को और बढ़ाता है।

इसरो द्वारा विकसित LVM3 एक तीन-चरणीय लॉन्च व्हीकल है। इसमें दो ठोस ईंधन वाले S200 स्ट्रैप-ऑन मोटर्स, एक तरल ईंधन कोर स्टेज L110 और एक शक्तिशाली क्रायोजेनिक अपर स्टेज C25 शामिल है। इसका कुल वजन लगभग 640 टन, ऊंचाई 43.5 मीटर और जीटीओ तक पेलोड क्षमता 4,200 किलोग्राम है।

LVM3 इससे पहले चंद्रयान-2, चंद्रयान-3 और वनवेब के दो मिशनों सहित कुल 72 उपग्रहों को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेज चुका है। इसका पिछला मिशन LVM3-M5/CMS-03, 2 नवंबर 2025 को सफलतापूर्वक पूरा हुआ था।

छात्रों के लिए यादगार पल

इस ऐतिहासिक लॉन्च को देखने के लिए कई स्कूलों के छात्र सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र पहुंचे। छात्रों ने इसे अपने जीवन का यादगार और “एक बार मिलने वाला अवसर” बताया। उन्होंने इसरो, अपने स्कूलों और शिक्षकों के प्रति आभार जताया और भविष्य में भारत की और भी अंतरिक्ष सफलताओं को देखने की उम्मीद व्यक्त की।

LVM3-M6 मिशन की सफलता न केवल भारत की तकनीकी क्षमता का प्रमाण है, बल्कि यह भी दिखाती है कि इसरो अब वैश्विक वाणिज्यिक अंतरिक्ष बाजार में एक मजबूत और भरोसेमंद भागीदार बन चुका है।

अनिल शर्मा
अनिल शर्माhttp://bolebharat.in
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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