नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को सर्वदलीय बैठक में कहा कि इजराइल ने भारत को कई सैन्य संघर्षों में मदद की है। उन्होंने कहा कि इजराइल रक्षा प्रौद्योगिकी में भी भारत का एक विश्वसनीय स्रोत रहा है। साथ ही साथ जयशंकर ने यह भी बताया कि ईरान के साथ संबंध मैत्रीपूर्ण बने हुए हैं। इसके लिए उदाहरण के तौर पर विदेश मंत्री ने होर्मुज जलडमरूमध्य से चार भारतीय जहाजों को ईरान द्वारा गुजरने की अनुमति देने के फैसले का हवाला दिया।
सूत्रों के अनुसार सर्वदलीय बैठक में जयशंकर ने एनसीपी की सुप्रिया सुले के सवाल पर यह बातें कही। सुले ने सवाल उठाया था कि आखिर अमेरिका और इजराइल के साथ संबंधों को रखने से क्या लाभ हैं।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार मंत्री ने बैठक में कहा कि अमेरिका भारत का एक बड़ा व्यापारिक साझेदार और उच्च स्तरीय प्रौद्योगिकी का स्रोत है। वहीं इजराइल एक प्रमुख तकनीकी सहयोगी है और उसने सैन्य संघर्षों के दौरान भारत की मदद भी की है। हालांकि मंत्री ने इस बारे में विस्तार से नहीं बताया कि इजराइल ने कब और कैसे भारत की मदद की। वैसे, सैन्य संघर्षों के दौरान इजराइली सहायता पर उनकी टिप्पणी को पाकिस्तान के साथ हुए टकराव से जोड़ कर देखा जा रहा है।
इजराइल के सहयोग की पहली बार पुष्टि!
इजराइल से भारत को मिली सहायता के कयास पहले भी लगाए जा रहे रहे हैं। लेकिन सूत्रों के अनुसार मंत्री ने पहली बार इसकी पुष्टि की है। मंत्री का बयान और इसका कारण अमेरिका-इजराइल संबंधों की ओर भारत के झुकाव जैसी चल रही बातों के बीच आया है। विपक्ष इसे लेकर सवाल खड़े करता रहा है।
जयशंकर ने इस आरोप को भी खारिज किया कि भारत ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या पर चुप्पी साधे रखी और शोक संवेदना व्यक्त करने में देरी की। उन्होंने कहा कि जिस दिन शोक पुस्तिका (condolence book) खोली गई, उसी दिन विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने उस पर हस्ताक्षर किए थे।
ईरान पर हमले की निंदा न करने के फैसले से शिया देश के साथ संबंधों को नुकसान पहुंचने की बात से इनकार करते हुए एस जयशंकर ने कहा कि सरकार को ईरानी ड्रोन और मिसाइलों से हुए नुकसान को लेकर संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब में फैले आक्रोश को भी ध्यान में रखना था। उन्होंने कहा कि इन दोनों देशों में 80 लाख से अधिक भारतीय काम करते हैं।
एस जयशंकर बोले- ईरान ने भारत की तारीफ की
जयशंकर ने यह भी कहा कि ईरान ने जंग के बीच भारत द्वारा अपने नौसैनिक जहाज, आईरिस लावन (IRIS Lavan) को कोच्चि बंदरगाह पर लंगर डालने की अनुमति देकर उसकी रक्षा करने के लिए काफी सराहना व्यक्त की है। जबकि इससे पहले एक अमेरिकी परमाणु पनडुब्बी ने IRIS Dena नाम के एक अजहाज को डुबो दिया था।
मंत्री ने कहा कि अगर IRIS Dena ने भारत के सुरक्षित बंदरगाह पर बने रहने के प्रस्ताव का लाभ उठाया होता और अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र की ओर न बढ़ा होता, तो वह भी बचा रह सकता था। बैठक में सरकारी अधिकारियों ने बताया कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से चार भारतीय जहाजों को गुजरने की अनुमति दी है, जिसे उसने युद्ध शुरू होने के बाद से अवरुद्ध कर रखा था, और पांच और जहाज रास्ते में हैं।
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