इस्लामाबाद: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आज ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधिमंडल शांति वार्ता के लिए ‘आमने-सामने’ होंगे। एक महीने से ज्यादा दिनों तक चले संघर्ष के बाद इसी हफ्ते दोनों देशों ने दो हफ्ते के लिए सीजफायर पर सहमति जताई है। सीजफायर के बरकरार रहने को लेकर बेहद नाजुक संभावनाओं के बीच ये शांति वार्ता होने जा रही है। वार्ता में अमेरिकी दल का नेतृत्व उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस करेंगे।
दूसरी ओर ईरान की ओर से डेलिगेशन देर रात इस्लाबाद पहुंच गया। भारत समेत पूरी दुनिया भी इस घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है, क्योंकि खाड़ी क्षेत्र की स्थिरता और ऊर्जा आपूर्ति पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। अमेरिका-ईरान वार्ता में किसी भी तरह की प्रगति या विफलता का असर तेल की कीमतों और क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों पर पड़ सकता है।
ईरान ने अपने डेलीगेशन का नाम ‘मीनाब 168’ रखा है। ये नाम ईरान के मीनाब शहर में एक स्कूल पर हुए हमले की याद में रखा गया है, जिसमें 168 बच्चों की मौत हो गई थी। उन्होंने एक तस्वीर भी ट्वीट की है।
ईरान और अमेरिका की ओर से कौन-कौन?
ईरान की तसनीम समाचार एजेंसी के अनुसार इस्लामाबाद में तेहरान के प्रतिनिधिमंडल में 71 सदस्य शामिल हैं। इनमें मुख्य वार्ता दल, विशेषज्ञ सलाहकार, मीडियाकर्मी और राजनयिक एवं सुरक्षा अधिकारी शामिल हैं। ईरान के प्रतिनिधिमंडल के कुछ महत्वपूर्ण सदस्य जो पाकिस्तान पहुंचे हैं, उनमें ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची, ईरानी संसद स्पीकर एमबी ग़ालिबाफ, ईरानी केंद्रीय बैंक के गवर्नर अब्दोलनासेर हेम्मती, सुप्रीम नेशनल डिफेंस काउंसिल के सचिव अली अकबर अहमदीन, विदेश मामलों के उप मंत्री केजेम गरीबाबादी और ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई शामिल हैं।
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वैंस करेंगे। उनके साथ विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर भी होंगे। इसके अलावा वाइस एडमिरल ब्रैड कूपर भी इसमें शामिल होंगे।
किन विषयों पर बात होगी?
ईरान का परमाणु कार्यक्रम एक अहम मुद्दा होगा। अमेरिकी न्यूज चैनल सीएनएन के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ‘कोई परमाणु हथियार नहीं। यही 99% सच है।’
हालांकि, दोनों पक्षों के प्रस्तावों को लेकर अभी असमंजस की स्थिति है। हालांकि, इससे पहले ट्रंप ने ‘ईरान की ओर से सौंपे गए 10 सूत्री प्रस्ताव’ को लेकर कहा था कि इन पर बातचीत की जा सकती है। वैसे इसमें ये भी गौर करना होगा कि ईरान की मांगों में सभी प्रतिबंध हटाना और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान के नियंत्रण को एक तरहसे मान्यता देना भी शामिल है। इसे अमेरिका शायद ही स्वीकार करेगा।
इसके अलावा लेबनान का मुद्दा भी है। ईरान लगातार जोर दे रहा है कि लेबनान पर इजराइल की ओर से हमले रूकने चाहिए, इसके बाद ही बातचीत सही मायनों में आगे बढ़ेगी। ईरान का कहना है कि युद्धविराम में उसका सहयोगी हिज्बुल्लाह भी शामिल है, जबकि अमेरिका और इजराइल का कहना है कि ऐसा नहीं है। इस सप्ताह लेबनान में हुए इजराइली हमलों में 250 से ज्यादा लोग मारे गए, जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हुई।
इस्लामाबाद में सुरक्षा चाक-चौबंद
हाई प्रोफाइल बैठक को देखते हुए इस्लामाबाद में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। बैठकों की तैयारी के लिए इस्लामाबाद में दो दिनों के लिए सार्वजनिक छुट्टी की घोषणा पहले ही की जा चुकी है। सड़कों पर बैरिकेड लगा दिए गए हैं। संसद, प्रमुख सरकारी प्रतिष्ठान, होटल, दूतावास और विदेशी संगठनों के कार्यालय वाली जगहों पर सुरक्षा लगाई गई है।
बैठक में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, पाकिस्तानी सेना के फील्ड मार्शल असीम मुनीर, विदेश मंत्री इशाक डार भी बतौर मेजबान शामिल होंगे। बैठक की रूपरेखा क्या होगी, इसे लेकर फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है। दोनों पक्ष आमने-सामने बैठ सकते हैं। ऐसा भी संभव है कि दोनों पक्ष अलग-अलग कमरे में हों और इनके बीच संवाद अप्रत्यक्ष तरीके से अधिकारियों को मध्यस्थ बनाकर किया जाए।

