पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध लगातार गंभीर होता जा रहा है। एक हफ्ते से अधिक समय से चल रहे इस संघर्ष में मिसाइल और ड्रोन हमलों का दायरा कई देशों तक फैल गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जहां दावा किया है कि संयुक्त हमलों के बाद ईरान की सैन्य ताकत लगभग खत्म होने की स्थिति में पहुंच गई है, वहीं, ईरान का कहना है कि वह अमेरिका और इजराइल के खिलाफ कम से कम छह महीने तक युद्ध जारी रख सकता है।
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के प्रवक्ता अली मोहम्मद नईनी ने सरकारी समाचार एजेंसी फार्स से कहा कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की सशस्त्र सेनाएं मौजूदा सैन्य अभियान की गति से कम से कम छह महीने तक युद्ध जारी रखने की क्षमता रखती हैं। उन्होंने कहा कि ईरान ने अब तक अमेरिका और इजराइल से जुड़े 200 से अधिक सैन्य ठिकानों और सुविधाओं को निशाना बनाया है।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने भी बयान जारी कर कहा कि अमेरिका और इजराइल की सैन्य आक्रामकता का जवाब देना ईरान का वैध आत्मरक्षा का अधिकार है। मंत्रालय ने कहा कि जब तक हमले बंद नहीं होते या संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करती, तब तक जवाबी कार्रवाई जारी रहेगी।
तेहरान के ऊर्जा ठिकानों पर इजराइल का बड़ा हमला
संघर्ष के बीच इजराइल ने शनिवार रात तेहरान के आसपास कई ऊर्जा और ईंधन भंडारण केंद्रों को निशाना बनाया। रिपोर्टों के मुताबिक ईरान की सबसे बड़ी रिफाइनरियों में से एक शहर-ए-रेय ऑयल रिफाइनरी के करीब 30 बड़े तेल टैंकों पर हमला किया गया। कराज शहर के फर्दिस ऑयल डिपो में भी विस्फोट हुआ, जिसके बाद वहां भीषण आग लग गई।
ईरान के तेल मंत्रालय के एक सूत्र ने बताया कि तेहरान के कूहक और शहरान सहित कराज के तीन तेल डिपो पर इज़राइली लड़ाकू विमानों ने हमला किया। इजराइल का कहना है कि ईरान के ऊर्जा क्षेत्र को कमजोर करने से उसकी सैन्य और आर्थिक क्षमता पर बड़ा असर पड़ेगा।
खाड़ी देशों में भी मिसाइल और ड्रोन हमले
इस युद्ध का असर अब पश्चिम एशिया के कई अन्य देशों में भी दिखाई दे रहा है। ईरान ने जहां कहा था कि वह अब पड़ोसी देशों पर हमले नहीं करेगा, इसके बावजूद उसने अपने हमले तेज कर दिए हैं।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने शनिवार पड़ोसी देशों से माफी मांगते हुए कहा था कि ईरान उन्हें निशाना नहीं बनाएगा जब तक उनके क्षेत्र से ईरान पर हमला नहीं किया जाता। इसके बावजूद पूरे पश्चिम एशिया में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं।
कतर, सऊदी अरब, बहरीन और कुवैत ने मिसाइल और ड्रोन हमलों की सूचना दी है। कतर के रक्षा मंत्रालय के अनुसार ईरान से दागी गई 10 बैलिस्टिक और दो क्रूज मिसाइलों को निशाना बनाया गया, जिनमें से अधिकांश को हवा में ही मार गिराया गया।
सऊदी अरब ने अपने हवाई क्षेत्र में घुसे 14 ड्रोन को नष्ट करने का दावा किया है, जबकि बहरीन की राजधानी मनामा में मिसाइल के टुकड़े गिरने से एक व्यक्ति घायल हो गया और कई दुकानों को नुकसान पहुंचा। बहरीन के मीना सलमान बंदरगाह के पास एक सुविधा पर हमले के बाद आग लगने की भी सूचना है।
बेरूत और इराकी कुर्दिस्तान तक पहुंचे हमले
इजराइल ने लेबनान की राजधानी बेरूत में भी एक सटीक हमला करने की पुष्टि की है। इज़राइली सेना के मुताबिक इस हमले में ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की कुद्स फोर्स के कुछ कमांडरों को निशाना बनाया गया, जिन पर इजराइल के खिलाफ हमलों की योजना बनाने का आरोप था।
स्थानीय मीडिया के अनुसार बेरूत के समुद्र किनारे स्थित राउचे इलाके में रामादा होटल के एक कमरे पर ड्रोन हमला हुआ, हालांकि तत्काल किसी हताहत की पुष्टि नहीं हुई।
उधर इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र के सुलेमानिया शहर में भी कई ड्रोन हमले हुए। कुछ ड्रोन शहर के व्यावसायिक इलाकों में गिरे, जबकि एक हमले में एक व्यक्ति की मौत की खबर है।
ट्रंप का दावा- ईरान की सैन्य क्षमता लगभग खत्म
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि संयुक्त अमेरिकी–इज़राइली हमलों से ईरान की सैन्य क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा है। एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि शुरुआती हमलों में ही ईरान की सेना को बड़ा झटका दिया गया।
ट्रंप के मुताबिक अमेरिकी हमलों में ईरान की नौसेना लगभग पूरी तरह तबाह कर दी गई और उसके 44 जहाज नष्ट कर दिए गए। उन्होंने कहा कि ईरान की वायुसेना को भी भारी नुकसान हुआ है और उसके अधिकांश विमान नष्ट हो चुके हैं।
उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिकी हमलों में ईरान के करीब 70 प्रतिशत रॉकेट लॉन्चर और मिसाइल सिस्टम तबाह कर दिए गए हैं। उनके अनुसार इन लॉन्चरों के खत्म होने से ईरान की जवाबी हमले की क्षमता काफी कम हो गई है और अब उसके हमलों की तीव्रता पहले की तुलना में बहुत घट गई है।
ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान की सैन्य नेतृत्व संरचना भी कमजोर हो गई है। उनके अनुसार पहले शीर्ष नेतृत्व और फिर दूसरे स्तर के कई कमांडरों को निशाना बनाया गया, जिसके बाद अब वहां ऐसे लोग नेतृत्व कर रहे हैं जिन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत कम लोग जानते हैं।
ट्रंप ने कहा- समझौते की जल्दबाजी नहीं
ट्रंप ने यह स्पष्ट किया कि अमेरिका फिलहाल ईरान के साथ किसी समझौते की जल्दी में नहीं है। उन्होंने कहा कि वाशिंगटन के पास बातचीत में काफी मजबूत बढ़त है, लेकिन अभी समझौते की तलाश नहीं की जा रही।
इस बीच चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने सभी बड़ी शक्तियों से संयम बरतने और सैन्य कार्रवाई तुरंत रोकने की अपील की है। वहीं ओमान सहित कई देशों ने कूटनीतिक दबाव बढ़ाकर युद्ध रोकने की जरूरत पर जोर दिया है।
लगातार बढ़ते हमलों के बीच मौतों का आंकड़ा भी तेजी से बढ़ रहा है। विभिन्न देशों के अधिकारियों के अनुसार अब तक ईरान में लगभग 1,230 लोगों की मौत हो चुकी है, लेबनान में 200 से अधिक लोग मारे गए हैं और इजराइल में भी करीब एक दर्जन लोगों की जान गई है। इस संघर्ष में छह अमेरिकी सैनिकों की मौत की भी पुष्टि हुई है।

