नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आने वाले दिनों में क्या असर डालेगा, इसे लेकर चल रही कई प्रकार की अटकलों के बीच Citrini Research की एक रिपोर्ट वायरल है। द 2028 ग्लोबल इंटेलिजेंस क्राइसिस शीर्षक वाले इस रिपोर्ट ने एआई के जमाने में अर्थव्यवस्था के भविष्य को लेकर तीखी बहस छेड़ दी है। इस पेपर में एक काल्पनिक ‘डूम्सडे’ (महाविनाश का दिन) की परिकल्पना को भी पेश किया गया है, जिसमें 2028 तक तेज एआई ऑटोमेशन के कारण बड़े पैमाने पर बेरोजगारी और वित्तीय अस्थिरता पैदा हो जाती है।
रिपोर्ट में खास तौर पर भारत की बड़ी आईटी कंपनियों मसलन- टीसीएस, इंफोसिस और विप्रो को बड़े जोखिम में बताया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि एआई आधारित ऑटोमेशन से आने वाले दिनों में इनके बिजनेस मॉडल को गंभीर खतरा होता है।
रिपोर्ट के अनुसार 2028 तक भारत का आईटी सर्विस सेक्टर, जो सालाना 200 अरब डॉलर से अधिक का निर्यात करता था, लगभग ठप होने की स्थिति में होगा क्योंकि क्लाइंट्स बेहद कम लागत पर उपलब्ध एआई कोडिंग एजेंट्स का इस्तेमाल शुरू करेंगे।
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘पूरा मॉडल एक ही वैल्यू प्रपोजिशन पर बना था कि भारतीय डेवलपर्स अमेरिकी डेवलपर्स से काफी सस्ते हैं। लेकिन एआई कोडिंग एजेंट की लागत लगभग बिजली की कीमत के बराबर रह गई है।’ इसमें आगे कहा गया कि जैसे-जैसे सर्विस एक्सपोर्ट कमजोर पड़े, रुपये की डॉलर के मुकाबले कीमत चार महीनों में तेजी से गिर गई।
रिपोर्ट के मुताबिक- 2027 के दौरान TCS, Infosys और Wipro में कॉन्ट्रैक्ट तेजी से रद्द होने लगेंगे। भारत के सर्विस सरप्लस के खत्म होने से रुपया चार महीनों में डॉलर के मुकाबले 18 प्रतिशत गिर गया। 2028 की पहली तिमाही तक इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (आईएमएफ) ने नई दिल्ली के साथ ‘प्रारंभिक बातचीत’ शुरू कर दी।
डूम्सडे की कल्पना वाले इस रिपोर्ट में कहा गया है कि एआई के आगमन ने एक ऐसा ‘फीडबैक लूप’ पैदा कर दिया। कंपनियाँ लगातार एआई में निवेश कर रहीं, भले ही लोगों की खर्च करने की क्षमता घटती जा रही थी।
रिपोर्ट के अनुसार- ‘एआई लगातार बेहतर और सस्ता होता गया। कंपनियों ने कर्मचारियों की छंटनी की, फिर उस बचत का इस्तेमाल और अधिक एआई क्षमता खरीदने में किया, जिससे वे और ज्यादा कर्मचारियों की छंटनी कर सकीं। नौकरी गंवाने वाले लोग कम खर्च करने लगे।’
रिपोर्ट में आगे कहा गया है, ‘जो कंपनियाँ उपभोक्ताओं को सामान बेचती हैं, उनकी बिक्री घटने लगी है। वे कमजोर हुईं और मुनाफे को बनाए रखने के लिए और अधिक एआई में निवेश करने लगीं। एआई और बेहतर व सस्ता होता गया। यह एक ऐसा फीडबैक लूप था, जिसमें कोई रोक नहीं थी।’
रिपोर्ट में इस स्थिति की विडंबना यह बताई गई कि मौजूदा समय के एआई के प्रमुख खिलाड़ी- NVIDIA और TSMC लगातार बेहतर प्रदर्शन करते रहे, जबकि अर्थव्यवस्था, जिसे वे तकनीकी रूप से बदल रहे थे, धीरे-धीरे कमजोर होती जा रही है।
रिपोर्ट में कहा गया कि ‘NVIDIA अब भी रिकॉर्ड कमाई अर्जित कर रहा है। हाइपरस्केल कंपनियां अब भी डेटा सेंटर पूंजीगत व्यय पर प्रति तिमाही 150-200 अरब डॉलर खर्च कर रही हैं। ताइवान और कोरिया जैसी अर्थव्यवस्थाएं, जो इस प्रवृत्ति के बिल्कुल विपरीत थीं, इन्होंने जबरदस्त प्रदर्शन किया।”

