Google ने उन वायरल दावों का पुरजोर तरीके से विरोध किया है जिनमें कहा गया है कि वह अपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को प्रशिक्षित करने के लिए जीमेल संदेशों को गुप्त रूप से स्कैन कर रहा है। गूगल ने इन रिपोर्टों को ‘भ्रामक’ बताया है और साफ किया है कि कोई नीतिगत बदलाव नहीं हुआ है।
गूगल की प्रवक्ता जेनी थॉमसन ने शुक्रवार को कहा, ‘हम अपने जेमिनी एआई मॉडल को ट्रेन करने के लिए आपके जीमेल कंटेंट का इस्तेमाल नहीं करते हैं।’ यह बात उन्होंने एक सिक्योरिटी ब्लॉग पोस्ट से उपजे हंगामे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कही। इस ब्लॉग में दावा किया गया था कि कंपनी यूजरों की सहमति के बिना निजी ईमेल को खंगाल रही है। हालांकि कंपनी ने जोर देकर कहा कि जीमेल के स्मार्ट फीचर सालों से मौजूद हैं और यूजरों की जानकारी के बिना कोई भी सेटिंग नहीं बदली गई है।
कैसे और कहां से शुरू हुआ पूरा विवाद
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब मैलवेयरबाइट्स (Malwarebytes) ने अपने निष्कर्ष प्रकाशित किए, जिसमें दावा किया गया कि गूगल स्मार्ट कंपोज और स्मार्ट रिप्लाई जैसे एआई टूल्स को बेहतर बनाने के लिए निजी ईमेल और अटैचमेंट को देख रहा है। इसके बाद सोशल मीडिया पर इस बात को लेकर हंगामा मच गया। हंगामा इसलिए भी और बढ़ा क्योंकि यूजरों ने पाया कि उनके स्मार्ट फीचर डिफॉल्ट रूप से पहले से ही इनेबल थे, जिससे गोपनीयता के उल्लंघन की आशंकाएँ और गहरी हो गई। इसके बाद कई लोगों ने तत्काल अपने सेटिंग्स में बदलाव करते हुए स्मार्ट फीचर को डिसेबल करना शुरू कर दिया।
गूगल ने बताया- स्मार्ट फीचर और AI ट्रेनिंग में क्या अंतर है?
आइए जानते हैं कि ये स्मार्ट फीचर्स क्या हैं? दरअसल ये वही टूल हैं जिन पर Gmail यूजर सालों से भरोसा करते आए हैं। इसमें स्पेल चेकिंग, प्रेडिक्टिव टेक्स्ट, ऑटोमैटिक पैकेज ट्रैकिंग, और आपकी फ्लाइट, इवेंट आदि के लिए कैलेंडर इंटीग्रेशन शामिल है। Google Workspace के लिए इनेबल होने पर ये फीचर आपके अनुभव को और व्यक्तिगत करने के लिए कंटेंट का इस्तेमाल करते हैं। स्मार्ट फीचर आपके ईमेल का विश्लेषण करके तुरंत जवाब देने या महत्वपूर्ण संदेशों को चिह्नित करने का भी सुझाव देते हैं। Google ने कहा है कि इसे Gemini के ट्रेनिंग डेटा से अलग ही रखा गया है।
गूगल ने उठ रही चिंताओं पर स्पष्टीकरण तो दिया है लेकिन इससे अभी सभी विवाद शांत नहीं हुए हैं। 11 नवंबर को दायर एक प्रस्तावित सामूहिक मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि कंपनी ने जीमेल, चैट और मीट में निजी संचार तक को जेमिनी को पहुँच प्रदान करके कैलिफोर्निया के गोपनीयता हनन अधिनियम का उल्लंघन किया है। गूगल ने इस मुकदमे में उठे विषयों को लेकर अभी सार्वजनिक रूप से जवाब नहीं दिया है।
इस बीच यूजरों के संदेह को और बढ़ाने वाले कुछ दावे सामने आए हैं। दरअसल, कुछ लोगों ने बताया कि उनकी ओर पहले डिसेबल किए गए स्मार्ट फीचर रहस्यमय तरीके से अपने आप फिर से इनेबल हो गए थे। हालाँकि गूगल ने इस तरह किसी की भी सेटिंग बदलने से इनकार किया है।

