तेहरानः ईरान की राजधानी तेहरान समेत अन्य शहरों में बीते कई दिनों से विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इससे सरकार पर भारी दबाव की स्थिति है और सरकार ने इंटरनेट और टेलीफोन नेटवर्क बंद कर दिए हैं।
गौरतलब है कि बीते साल जून में इजराइल द्वारा युद्ध शुरू किए जाने के बाद अमेरिका ने परमाणु ठिकानों पर बमबारी की थी। वहीं, सितंबर महीने में यूएन ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर दोबारा प्रतिबंध लगाए थे जिससे ईरान की आर्थिक स्थिति और भी बिगड़ गई। ईरान की मुद्रा रियाल अमेरिकी डॉलर के मुकाबले काफी तेजी से नीचे गिरी है।
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रियाल बहुत पीछे
1 डॉलर के मुकाबले करीब 14 लाख ईरानी रियाल हैं। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान को चुनौती दी है कि अगर वह शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों ही हिंसक हत्या करता है तो अमेरिका कार्रवाई करेगा और उनकी मदद के लिए आगे आएगा।
बीते दिनों अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला करके राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को बंधक बना लिया था। ईरान को लेकर ट्रंप ने चेतावनी दी कि “हम इस पर कड़ी नजर रख रहे हैं। अगर वे पहले की तरह लोगों को मारना शुरू कर देते हैं, तो मुझे लगता है कि अमेरिका उन्हें कड़ी टक्कर देगा।”
ईरान में कितने व्यापक प्रदर्शन?
अमेरिका स्थित मानवाधिकार कार्यकर्ता समाचार एजेंसी ने रविवार तड़के बताया कि ईरान के सभी 31 प्रांतों में 570 से अधिक विरोध प्रदर्शन हुए हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि मृतकों की संख्या कम से कम 116 हो गई है और 2,600 से अधिक गिरफ्तारियां हुई हैं। यह समूह अपनी रिपोर्टिंग के लिए ईरान के भीतर मौजूद कार्यकर्ताओं के नेटवर्क पर निर्भर करता है और अतीत में हुए अशांति के दौरों में भी इसने सटीक जानकारी दी है।
विरोध प्रदर्शनों के पैमाने को समझना मुश्किल रहा है। ईरानी सरकारी मीडिया ने प्रदर्शनों के बारे में बहुत कम जानकारी दी है।
ऑनलाइन वीडियो में सड़कों पर लोगों की धुंधली और अस्पष्ट झलकियां या गोलियों की आवाज ही सुनाई देती है। ईरान में पत्रकारों को आम तौर पर रिपोर्टिंग में कई तरह की पाबंदियों का सामना करना पड़ता है जैसे कि देश भर में यात्रा करने के लिए अनुमति लेना साथ ही अधिकारियों द्वारा उत्पीड़न या गिरफ्तारी का खतरा। इंटरनेट बंद होने से स्थिति और भी जटिल हो गई है।
लेकिन विरोध प्रदर्शन रुकने के आसार नहीं दिख रहे हैं, यहां तक कि सर्वोच्च नेता आयातोल्ला अली खामेनेई के यह कहने के बाद भी कि “दंगाइयों को उनकी जगह पर रखना होगा।”
ईरान में गिरती मुद्रा के साथ-साथ महंगाई दर भी बड़े पैमाने पर बढ़ी जिससे चावल और अन्य जरूरी खाद्य सामग्री भी महंगी हो गई। देश लगभग 40% की वार्षिक मुद्रास्फीति दर से जूझ रहा है। बीते साल दिसंबर में ईरान ने अपने राष्ट्रीय स्तर पर सब्सिडी वाले गैसोलीन के लिए एक नया मूल्य निर्धारण स्तर पेश किया जिससे दुनिया के कुछ सबसे सस्ते गैसोलीन की कीमत बढ़ गई और आबादी पर और दबाव पड़ा।
आने वाले समय में कीमतें और भी बढ़ सकती हैं क्योंकि ईरान के केंद्रीय बैंक ने हाल ही में दवाइयों और गेहूं को छोड़कर सभी उत्पादों के लिए रियायती डॉलर-रियाल विनिमय दर को समाप्त कर दिया है।
देश ने विरोध प्रदर्शन पहले राजधानी तेहरान में व्यापारियों द्वारा शुरू किए गए थे जो बाद में अन्य शहरों तक फैल गया। गौरतलब है कि 2022 में पुलिस हिरासत में 22 वर्षीय महसा अमिनी की मौत के बाद से देशव्यापी प्रदर्शनों का सिलसिला शुरू हो गया था, जिसके चलते वर्षों से आक्रोश पनप रहा है। कुछ लोगों ने ईरान के निर्वासित युवराज रजा पहलवी के समर्थन में नारे लगाए हैं , जिन्होंने विरोध प्रदर्शनों का आह्वान किया है।
बीते कुछ दिनों से जारी प्रदर्शनों में अब तक 116 लोगों की मौत हो चुकी है और 2 हजार से अधिक लोग गिरफ्तार हुए हैं।

