ईरान की ‘सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल’ ने बुधवार सुबह पुष्टि की है कि उसके सचिव और देश के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी की एक हमले में मौत हो गई है। ईरान की तस्नीम न्यूज एजेंसी ने बुधवार सुबह इस रिपोर्ट की जानकारी दी।
तस्नीम न्यूज एजेंसी के अनुसार, मंगलवार सुबह हुए हमले में अली लारीजानी के साथ उनके बेटे मोर्तेजा लारीजानी और सुरक्षा मामलों के उप-प्रमुख अलीरेजा बायात सहित कई अन्य अधिकारी मारे गए। सिन्हुआ न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, काउंसिल ने ईरान के विकास में लारीजानी की लंबी सेवा की सराहना की और बाहरी खतरों का सामना करने के लिए राष्ट्रीय एकता की अपील की।
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावा किया था कि ईरान पर जारी सैन्य कार्रवाई के दौरान लारिजानी को निशाना बनाया गया। वहीं, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने भी पुष्टि की कि बसीज स्वयंसेवक बल के प्रमुख घोलमरेजा सोलेमानी की मौत अमेरिका-इजराइल के हमले में हुई है।
लारीजानी की हत्या के बाद ईरान ने इजराइल पर कई मिसाइलें दागीं। फार्स समाचार एजेंसी के अनुसार, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने दावा किया कि उसकी मिसाइलों ने इजराइल के कब्जे वाले इलाकों के अंदर 100 से ज्यादा सैन्य और सुरक्षा ठिकानों को निशाना बनाया।
ईरान के हमले में तेल अवील और रमत गन के कई इलाकों में भारी नुकसान हुआ है। दो लोगों के मारे जाने का दावा भी किया है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने कहा है कि तेल अवीव पर किया गया हमला अली लारीजानी की हत्या का बदला था।
अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास बड़े हमले किए
इसी बीच, अमेरिका ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत अपनी सैन्य कार्रवाई को और तेज करते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरान के मिसाइल ठिकानों पर बड़े हमले किए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, इन ठिकानों से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों को खतरा था, इसलिए इन्हें निशाना बनाया गया। हमलों में भारी बमों का इस्तेमाल किया गया, जो मजबूत और सुरक्षित ठिकानों को भी नष्ट करने में सक्षम हैं।
अमेरिकी सेना ने बताया कि इस अभियान के दौरान अब तक 7,000 से अधिक लक्ष्यों पर हमला किया जा चुका है और 6,500 से ज्यादा लड़ाकू उड़ानें भरी गई हैं। 100 से अधिक ईरानी जहाजों को नुकसान पहुंचाया गया है या नष्ट किया गया है। इस अभियान में बी-1, बी-2 और बी-52 जैसे बमवर्षक विमान, एफ-22 और एफ-35 जैसे आधुनिक फाइटर जेट, ड्रोन, विमानवाहक पोत और पनडुब्बियों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
हमलों के निशाने पर बैलिस्टिक मिसाइल साइट, एंटी-शिप मिसाइल ठिकाने, आईआरजीसी के मुख्यालय, एयर डिफेंस सिस्टम और सैन्य संचार नेटवर्क शामिल हैं। खासतौर पर एंटी-शिप मिसाइल ठिकानों पर ध्यान इसलिए दिया जा रहा है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अहम मार्ग है। यहां किसी भी तरह की बाधा का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।
28 फरवरी से शुरू हुए अमेरिका-इजराइल के संयुक्त हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। जवाब में ईरान और उसके सहयोगियों ने भी मध्य पूर्व में अमेरिकी और इजराइली हितों को निशाना बनाया है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिका के साथ किसी भी नए संपर्क की संभावना से इनकार किया है, जबकि देश के शीर्ष नेतृत्व ने भी तनाव कम करने के प्रस्ताव ठुकरा दिए हैं।
समाचार एजेंसी आईएएनएस इनपुट के साथ

