रविवार, मार्च 22, 2026
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ट्रंप का होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अल्टीमेटम के बाद ईरान ने कहा- दुश्मनों को छोड़ सबके लिए खुला है

यूएई समेत 22 देशों ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर ईरान की गतिविधियों पर कड़ा रुख अपनाते हुए संयुक्त बयान जारी किया है। इन देशों ने कमर्शियल जहाजों पर हमलों, तेल-गैस प्रतिष्ठानों और नागरिक ढांचे को निशाना बनाने की घटनाओं की निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया।

लंदन/तेहरान: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड के होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को 48 घंटों के भीतर पूरी तरह खोलने के अल्टीमेटम पर ईरान ने पलटवार किया है। रविवार को ईरान ने कहा कि यह रणनीतिक जलमार्ग सभी जहाजों के लिए खुला है, सिवाय उसके ‘दुश्मनों’- यानी अमेरिका और इजराइल के।

ईरान के अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) में स्थायी प्रतिनिधि अली मौसवी ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा बढ़ाने और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तेहरान सहयोग को तैयार है। उन्होंने साफ किया कि जो जहाज ईरान के दुश्मनों से जुड़े नहीं हैं, वे सुरक्षा समन्वय के साथ इस जलमार्ग से गुजर सकते हैं।

मौसवी, जो यूनाइटेड किंगडम में ईरान के राजदूत भी हैं, ने जारी संघर्ष को खत्म करने की अपील करते हुए कहा कि कूटनीति ही ईरान की प्राथमिकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि मौजूदा हालात की जड़ में अमेरिका और इजरायल के हमले हैं, इसलिए स्थायी समाधान के लिए आपसी विश्वास बहाली जरूरी है।

डोनाल्ड ट्रंप का ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम-होर्मुज स्ट्रेट खोलें वरना तबाह कर देंगे पावर प्लांट

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान को ट्रंप ने क्या चेतावनी दी है?

गौरतलब है कि 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इसराइल के हमले के बाद से ही होर्मुज पर तेल सप्लाई लगभग रुकी हुई है। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम है, क्योंकि दुनिया के करीब 20 फीसदी कच्चे तेल की सप्लाई इसी रास्ते से होती है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर वह 48 घंटे के भीतर होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा नहीं खोलता है तो अमेरिका उसके पावर प्लांट्स को निशाना बनाकर तबाह कर देगा।

ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान 48 घंटों के भीतर बिना किसी धमकी केहोर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह से नहीं खोलता है, तो संयुक्त राज्य अमेरिका उनके विभिन्न पावर प्लांट्स पर हमला करके उन्हें नष्ट कर देगा, जिसकी शुरुआत सबसे बड़े संयंत्र से होगी।

ट्रंप ने कुछ दिनों पहले यह भी कहा था कि हम होर्मुज स्ट्रेट का उपयोग नहीं करते, अमेरिका को इसकी आवश्यकता नहीं है। यूरोप, कोरिया, जापान, चीन को इसकी आवश्यकता है, इसलिए उन्हें इसमें शामिल होना होगा।

यूएई समेत 22 देशों ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर ईरान की गतिविधियों पर कड़ा रुख अपनाते हुए संयुक्त बयान जारी किया है। इन देशों ने कमर्शियल जहाजों पर हमलों, तेल-गैस प्रतिष्ठानों और नागरिक ढांचे को निशाना बनाने की घटनाओं की निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया। साथ ही ईरान से अपील की गई कि वह यूएन सिक्योरिटी काउंसिल के प्रस्ताव 2817 का पालन करे और स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही पर रोक से जुड़ी अपनी कार्रवाइयों को तुरंत बंद करे।

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ईरान ने युद्ध खत्म करने की क्या शर्तें रखी हैं?

इस बीच, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने पश्चिम एशिया में बिना किसी विदेशी दखल के शांति, सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए क्षेत्र के देशों को मिलाकर एक सुरक्षा ढांचा बनाने का प्रस्ताव रखा। इसके साथ ही उन्होंने चल रहे युद्ध को खत्म करने की शर्तें दोहराईं।

ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी आईआरएनए के हवाले से न्यूज एजेंसी सिन्हुआ ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक फोन कॉल में यह बात कही, जिसमें दोनों पक्षों ने आपसी संबंधों के साथ-साथ ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद हुए नए क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर भी चर्चा की।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पेजेश्कियन ने कहा कि युद्ध खत्म करने के लिए ईरान की पहली शर्त अमेरिका और इजराइल के हमलों को तुरंत रोकना और यह गारंटी देना है कि भविष्य में ऐसे हमले दोबारा नहीं होंगे।

ये भी पढ़ेंः इजराइल के न्यूक्लियर सिटी डिमोना–अराद पर ईरान का मिसाइल हमला, 100 से ज्यादा घायल

समाचार एजेंसी आईएएनएस इनपुट के साथ

अनिल शर्मा
अनिल शर्माhttp://bolebharat.in
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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