तेहरानः ईरान में बढ़ती महंगाई और बुनियादी चीजों के बढ़ते दामों के खिलाफ शुरू हुए विरोध प्रदर्शन को 9 दिन हो चुके हैं। प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में अब तक कम से कम 35 लोगों की जान जा चुकी है।
अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी के अनुसार, मरने वालों में प्रदर्शनकारी, बच्चे और सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं। वहीं, अब तक 1200 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है। एजेंसी के अनुसार, प्रदर्शन देश के 31 में से 27 प्रांतों के 250 से ज्यादा इलाकों तक फैल चुके हैं।
उधर, रिवोल्यूशनरी गार्ड की करीबी माने जाने वाले अर्ध-सरकारी फार्स न्यूज एजेंसी ने दावा किया है कि प्रदर्शनों के दौरान करीब 250 पुलिसकर्मी और बसीज बल के 45 सदस्य घायल हुए हैं।
क्यों भड़की है विरोध की आग?
ईरान में यह संकट मुख्य रूप से आर्थिक बदहाली की वजह से शुरू हुआ है। मार्च 2025 से वहां महंगाई की दर 36% से ऊपर बनी हुई है। डॉलर के मुकाबले ईरानी मुद्रा ‘रियाल’ की कीमत आधी रह गई है, जिससे आम जनता का जीना मुहाल हो गया है।
दिसंबर में ईरानी रियाल गिरकर 14 लाख प्रति डॉलर तक पहुंच गया था। वहीं परमाणु कार्यक्रम को लेकर पश्चिमी प्रतिबंधों की वापसी और 2026 में संभावित मंदी की चेतावनियों ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। शुरू में यह विरोध व्यापारियों और दुकानदारों ने शुरू किया था, लेकिन अब इसमें छात्र और आम नागरिक भी शामिल हो गए हैं। यह प्रदर्शन अब 27 प्रांतों तक फैल चुका है।
स्थिति तब और संवेदनशील हो गई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर ईरानी प्रशासन शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हिंसक हत्या करता है तो अमेरिका हस्तक्षेप कर सकता है। ट्रंप ने रविवार रात को भी कहा कि अगर और प्रदर्शनकारी मारे गए तो ईरानी अधिकारियों को बहुत बुरी तरह से नुकसान पहुंचाया जाएगा।
ट्रंप के इस बयान पर तेहरान में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली और ईरानी नेतृत्व से जुड़े अधिकारियों ने मध्य-पूर्व में तैनात अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाने की धमकी दी। दूसरी तरफ वेनेजुएला पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी पर भी ईरान भड़का हुआ है।
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने देश के अंदरूनी मामलों में किसी भी तरह की दखलअंदाजी को पूरी तरह से खारिज किया और अमेरिका को चेतावनी दी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में अराघची ने कहा कि ईरान की सेना जानती है कि अगर उसकी संप्रभुता का उल्लंघन होता है तो उसे कहां निशाना साधना है।
इस बीच हिंसक हो चुके प्रदर्शन को लेकर ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों को दंगाई बताते हुए सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को अपनी जगह दिखाने (सख्ती से कुचलने) की बात कही है। वहीं दूसरी ओर राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने गृह मंत्रालय को निर्देश दिया है कि प्रदर्शनकारियों के साथ नरमी और जिम्मेदारी से पेश आएं। उनका मानना है कि ताकत के दम पर समाज को शांत नहीं किया जा सकता।
गौरतलब है मौजूदा प्रदर्शन 2022 के बाद ईरान में सबसे बड़ा माना जा रहा है, जब महसा अमीनी की पुलिस हिरासत में मौत के बाद देशव्यापी आंदोलन हुआ था। हालांकि मौजूदा आंदोलन अभी उस स्तर तक नहीं पहुंचा है। प्रदर्शनों की वास्तविक स्थिति का आकलन करना मुश्किल बना हुआ है। सरकारी मीडिया सीमित जानकारी दे रहा है, जबकि सोशल मीडिया पर सामने आने वाले वीडियो भी बिखरी और अधूरी तस्वीर पेश करते हैं।
भारत ने ट्रैवल एडवाइजरी जारी की
ईरान में बिगड़ती स्थिति को देखते हुए भारत ने अपने नागरिकों के लिए ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है। विदेश मंत्रालय ने ईरान में बिगड़ते हालात को देखते हुए भारतीय नागरिकों से गैर-जरूरी यात्रा टालने को कहा है। ईरान में रह रहे भारतीयों और भारतीय मूल के लोगों को सतर्क रहने, प्रदर्शन स्थलों से दूर रहने और भारतीय दूतावास की वेबसाइट व सोशल मीडिया अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी गई है। रेजिडेंट वीजा पर ईरान में मौजूद भारतीय नागरिकों से दूतावास में पंजीकरण कराने को भी कहा गया है।
ईरान में करीब 10 हजार भारतीय नागरिक रहते हैं, जिनमें अधिकांश छात्र हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में शिया तीर्थयात्री भी वहां जाते हैं। भारत की यह सलाह ऐसे समय आई है जब अमेरिका की संभावित कार्रवाई और ईरानी नेतृत्व की जवाबी चेतावनियों ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने हालांकि गृह मंत्रालय को प्रदर्शनकारियों के प्रति संयमित और जिम्मेदार रवैया अपनाने का निर्देश दिया है और कहा है कि बल प्रयोग से समाज को शांत नहीं किया जा सकता।

