Friday, March 20, 2026
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ईरानः देशव्यापी प्रदर्शनों में कम से कम 5,000 लोग मारे गए, अदालत ने फांसी के दिए संकेत

तेहरानः ईरान में विरोध प्रदर्शनों में कम से कम 5,000 लोग मारे गए हैं जिनमें लगभग 500 सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। क्षेत्र में मौजूद एक ईरानी अधिकारी ने रविवार (19 जनवरी) को सत्यापित आंकड़ों का हवाला देते हुए यह जानकारी दी और “आतंकवादियों और सशस्त्र दंगाइयों” पर “निर्दोष ईरानियों” की हत्या का आरोप लगाया। वहीं, अदालत ने संकेत दिया कि फांसी की सजाएं आगे बढ़ सकती हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बार-बार धमकी दी है कि अगर सड़कों पर प्रदर्शनकारियों की हत्याएं या उन्हें फांसी दी जाती रही तो वे हस्तक्षेप करेंगे। शुक्रवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में उन्होंने तेहरान के नेताओं को धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्होंने 800 लोगों की निर्धारित फांसी को रद्द कर दिया है।

आयातुल्ला अली खामेनेई ने ट्रंप को ‘अपराधी’ कहा

एक दिन बाद सर्वोच्च नेता आयातुल्ला अली खामेनेई ने एक सार्वजनिक भाषण में ट्रंप को “अपराधी” करार दिया और कहा कि प्रदर्शनकारियों का समर्थन करके उन्होंने ईरान में जो जानमाल का नुकसान पहुंचाया है उसके लिए वे जिम्मेदार हैं।

खामेनेई ने कहा, “हम देश को युद्ध में नहीं घसीटेंगे लेकिन हम घरेलू या अंतरराष्ट्रीय अपराधियों को बिना सजा के नहीं छोड़ेंगे।” उन्होंने अमेरिका और इजराइल से जुड़े “आतंकवादियों और दंगाइयों” द्वारा किए गए “कई हजार मौतों” को स्वीकार किया।

ईरान की अदालत ने संकेत दिया है कि फांसी की सजाएं आगे बढ़ सकती हैं। रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ईरानी न्यायपालिका के प्रवक्ता असगर जहांगीर ने बताया, “कई कृत्यों को मोहरेब के रूप में पहचाना गया है जो इस्लाम में सबसे कठोर दंडों में से एक है।”

मोहरेब एक इस्लामी कानूनी शब्द है जिसका अर्थ है ईश्वर के विरुद्ध युद्ध करना और ईरानी कानून के तहत इसके लिए मृत्युदंड दिया जा सकता है।

शनिवार को पॉलिटिको को दिए एक साक्षात्कार में ट्रंप ने कहा, “ईरान में नए नेतृत्व की तलाश का समय आ गया है।” अमेरिका स्थित मानवाधिकार समूह एचआरएएनए ने शनिवार को बताया कि मृतकों की संख्या 3,308 हो गई है और 4,382 मामलों की समीक्षा की जा रही है। समूह ने यह भी बताया कि उसने 24,000 से अधिक गिरफ्तारियों की पुष्टि की है।

ईरानी अधिकारी ने कहा कि सत्यापित मृतकों की संख्या में “तेजी से वृद्धि” होने की संभावना नहीं है, और साथ ही यह भी कहा कि “इजराइल और विदेशों में सशस्त्र समूहों” ने सड़कों पर उतरने वालों का समर्थन और उन्हें हथियार मुहैया कराए हैं।

धार्मिक प्रतिष्ठान नियमित रूप से अशांति के लिए अमेरिका और इजराइल सहित विदेशी शत्रुओं को दोषी ठहराता है। इजराइल इस्लामी गणराज्य का कट्टर शत्रु है जिसने जून में सैन्य हमले किए थे।

निवासियों और सरकारी मीडिया के मुताबिक हिंसक कार्रवाई से विरोध प्रदर्शनों को काफी हद तक दबा दिया गया है। तेहरान के एक निवासी ने बताया कि उसने दंगा पुलिस को प्रदर्शनकारियों के एक समूह पर सीधे गोली चलाते देखा जिनमें ज्यादातर युवा पुरुष और महिलाएं थीं। सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो जिनमें से कुछ की रॉयटर्स ने पुष्टि की है। इन वीडियोज में सुरक्षा बलों को देश भर में प्रदर्शनों पर हिंसक कार्रवाई करते हुए दिखाया गया है।

कुर्द क्षेत्र में सबसे अधिक मौतें

द रॉयटर्स ने नाम न बताने की शर्त पर एक ईरानी अधिकारी ने यह भी कहा कि सबसे भीषण झड़पें और सबसे अधिक मौतें देश के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में स्थित ईरानी कुर्द क्षेत्रों में हुईं।

कुर्द अलगाववादी वहां सक्रिय रहे हैं और उनके बीच हुए संघर्ष अतीत में अशांति के दौर में सबसे हिंसक रहे हैं। तीन सूत्रों ने 14 जनवरी को रॉयटर्स को बताया कि सशस्त्र कुर्द अलगाववादी समूहों ने इराक से ईरान में सीमा पार करने की कोशिश की जो इस बात का संकेत है कि विदेशी ताकतें अस्थिरता का फायदा उठाने की कोशिश कर रही हैं।

अमरेन्द्र यादव
अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...
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