Friday, March 20, 2026
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इंडिगो के चेयरमैन विक्रम सिंह मेहता ने मांगी माफी लेकिन आरोपों को नाकार, हालात बिगड़ने की क्या वजह बताई?

इंडिगो में पिछले दस दिनों से जारी बड़े पैमाने की अव्यवस्था को लेकर कंपनी के चेयरमैन विक्रम सिंह मेहता ने सामने आ कर माफी मांगी है। इंडिगो के आधिकारिक एक्स हैंडल पर पोस्ट किए गए एक वीडियो संदेश में मेहता ने यात्रियों से माफी मांगते हुए कहा कि हजारों लोग फंस गए, कई अपने पारिवारिक कार्यक्रम, बिजनेस मीटिंग, मेडिकल अपॉइंटमेंट और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन मिस कर बैठे। कई यात्रियों का सामान देर से मिला या गलत जगह भेजा गया। उन्होंने माना कि इससे लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ी।

मेहता ने साफ कहा कि कंपनी यात्रियों को निराश कर बैठी है। उन्होंने कहा, “पिछले हफ्ते जो हुआ, उसने एयरलाइन के बेदाग रिकॉर्ड पर धब्बा लगाया है। गलती हमारी है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।” मेहता ने यह भी बताया कि उन्होंने बयान देने में इसलिए समय लिया ताकि सीईओ पीटर एल्बर्स और उनकी टीम को संचालन सुधारने और प्रभावित यात्रियों की मदद करने का पूरा अवसर मिल सके।

मेहता के अनुसार, बुधवार को इंडिगो ने 1,900 उड़ानें संचालित कीं और सभी 138 गंतव्यों को जोड़ा। उन्होंने कहा कि एयरलाइन का ऑन-टाइम परफॉर्मेंस फिर से सामान्य स्तर पर पहुँच गया है।

मेहता ने आरोपों को खारिज किया, हालात के क्या कारण बताए?

मेहता ने अव्यवस्था को लेकर विमान कंपनी पर लगाए आरोपों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि “इंडिगो ने जानबूझकर संकट पैदा किया”, “सरकारी नियमों को बदलवाने की कोशिश की” और “सुरक्षा से समझौता किया” जैसे दावे गलत हैं। उन्होंने कहा कि बोर्ड पूरी तरह शामिल था और एयरलाइन ने पायलट थकान से जुड़े नए नियमों का जुलाई और नवंबर में पूरी तरह पालन किया और सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं किया।

मेहता ने बताया कि ये व्यवधान किसी जानबूझकर की गई हरकत का नतीजा नहीं थे, बल्कि आंतरिक और अप्रत्याशित बाहरी कारणों के संयोजन से हालात बिगड़े। इसमें तकनीकी दिक्कतें, विंटर शेड्यूल से जुड़े बदलाव, खराब मौसम, एविएशन सिस्टम में बढ़ती भीड़ और अपडेट किए गए क्रू रोस्टरिंग नियमों के लागू होने जैसे कारण शामिल थे।

उन्होंने दोहराया कि ये कारण बहाने नहीं हैं। बोर्ड ने स्थिति पर चर्चा के लिए आपात बैठक की और एक संकट प्रबंधन समूह का गठन किया। मेहता ने अंत में इंडिगो के पायलटों, केबिन क्रू, इंजीनियरों, फ्रंटलाइन स्टाफ और सभी कर्मचारियों का आभार जताया और कहा कि उन्होंने इस कठिन समय में धैर्य और टीमवर्क दिखाया।

ये भी पढ़ेंः पायलटों की कमी से बढ़ा इंडिगो संकट, दिसंबर में 7% घटी संख्या, संसद में पेश आंकड़े क्या बताते हैं?

डीजीसीए ने ओवरसाइट टीम गठित की

उधर, डीजीसीए ने स्थिति बिगड़ने पर सख्त रुख अपनाया है। भारी संख्या में फ्लाइट रद्द होने और यात्रियों की मुश्किल बढ़ने के बाद नियामक ने एक विशेष ओवरसाइट टीम गठित की है, जो गुरुग्राम स्थित इंडिगो के कॉर्पोरेट ऑफिस में तैनात रहेगी। आठ सदस्यीय टीम का नेतृत्व डिप्टी चीफ फ्लाइट ऑपरेशंस इंस्पेक्टर कैप्टन विक्रम शर्मा कर रहे हैं।

डीजीसीए ने इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्स को 11 दिसंबर दोपहर तलब किया है। अधिकारियों के अनुसार, उनसे हालिया संचालन गड़बड़ियों का विस्तृत डेटा और अपडेट मांगा गया है। निर्देशों के तहत सीईओ को सभी संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पेश होकर ऑपरेशनल स्थिति पर विस्तृत प्रस्तुति देनी होगी।

निगरानी प्रक्रिया के तहत डीजीसीए के अधिकारी अगले दो से तीन दिन में 11 घरेलू हवाई अड्डों का ऑन-साइट निरीक्षण करेंगे। इनमें नागपुर, जयपुर, भोपाल, सूरत, तिरुपति, विजयवाड़ा, शिरडी, कोचीन, लखनऊ, अमृतसर और देहरादून शामिल हैं। अधिकारियों को अपनी रिपोर्ट 24 घंटे के भीतर दिल्ली स्थित मुख्यालय को भेजनी होगी।

‘कानून जनता की सुविधा के लिए हों, बोझ बनने के लिए नहीं’, इंडिगो संकट पर पीएम मोदी

इंडिगो ने बुधवार को बताया कि डीजीसीए के आदेश के बाद उसने अपनी घरेलू विंटर शेड्यूल में 10 प्रतिशत कटौती की है। इसका सीधा असर कंपनी की तिमाही क्षमता और यात्री राजस्व अनुमान पर पड़ा है। एयरलाइन का कहना है कि तीसरी तिमाही में क्षमता वृद्धि अब पहले के हाई टीन्स अनुमान से घटकर हाई सिंगल से शुरुआती डबल डिजिट पर आ जाएगी। यात्री यूनिट रेवेन्यू में भी पहले की सपाट वृद्धि वाली उम्मीद के मुकाबले “मिड-सिंगल डिजिट” की गिरावट का अनुमान है।

सरकार ने इंडिगो की 10% उड़ानें कम की, क्यों उठाया ये कदम

इसी बीच सरकार ने इंडिगो पर सख्त कदम उठाते हुए उसकी 10 प्रतिशत उड़ानें घटाने का आदेश दिया है। कटौती खास तौर पर उन रूट्स पर की जाएगी जहां मांग ज्यादा है और उड़ानें भी अधिक चलती हैं। इससे रोजाना चलने वाली करीब 2,300 उड़ानों में से लगभग 230 कम हो जाएंगी। डीजीसीए ने एयरलाइन को बुधवार शाम पांच बजे तक नया शेड्यूल जमा करने का निर्देश दिया है। मंगलवार को ही 422 से ज्यादा उड़ानें रद्द हुईं और पिछले आठ दिनों में करीब 5,000 उड़ानें रद्द हो चुकी हैं। मामले की सुनवाई आज दिल्ली हाईकोर्ट में भी होनी है।

डीजीसीए का कहना है कि इंडिगो की घोषित ऑपरेटिंग क्षमता और उसके वास्तविक विमान उपयोग में बड़ा अंतर है। एयरलाइन ने 403 विमान उपलब्ध दिखाकर करीब 6 प्रतिशत ज्यादा विंटर शेड्यूल ले लिया, जबकि अक्टूबर में केवल 339 और नवंबर में 344 विमान ही उड़ पाए। नवंबर में 64,346 निर्धारित उड़ानों में से 59,438 ही संचालित हो सकीं, यानी 4,900 उड़ानें तय शेड्यूल से कम रहीं।

नियामक ने यह भी बताया कि सर्दियों में दबाव सामान्य से अधिक रहता है, इसके बावजूद इंडिगो ने 26 अक्टूबर से शुरू हुए विंटर शेड्यूल में पिछले साल की तुलना में 9.66 प्रतिशत उड़ानें बढ़ा लीं, जबकि उसके पास इसे पूरा करने की क्षमता नहीं थी। इससे पूरे सिस्टम पर अतिरिक्त बोझ पड़ा और हालात और बिगड़ गए।

सरकार ने डीजीसीए को भी जांच के दायरे में लिया

इंडिगो संकट पर अब नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने सिर्फ एयरलाइन ही नहीं, बल्कि डीजीसीए के कामकाज की भी जांच शुरू करने का फैसला किया है। नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने एक इंटरव्यू में कहा कि यात्रियों को भारी परेशानी हुई है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक सामान्य चूक नहीं लगती, बल्कि इसमें गंभीर लापरवाही के संकेत हैं। सरकार यह भी जांच कर रही है कि संचालन जारी होने के बावजूद स्थिति अचानक इतनी खराब कैसे हो गई।

सीईओ को हटाने के सवाल पर नायडू ने साफ कहा कि जरूरत पड़ी तो यह कदम भी उठाया जाएगा। उन्होंने बताया कि वह लगातार बैठकों में लगे हैं और कई दिनों से ठीक से आराम नहीं कर पाए क्योंकि प्राथमिकता यात्रियों की मुश्किलें कम करना है।

कितनी उड़ानें रद्द हुईं?

पिछले मंगलवार से अब तक इंडिगो की 4,600 से ज्यादा उड़ानें रद्द हो चुकी हैं।

  • 2 दिसंबर: 150 से अधिक
  • 3 दिसंबर: करीब 200
  • 4 दिसंबर: 300 से ज्यादा
  • 5 दिसंबर: लगभग 1,600
  • 6 दिसंबर: करीब 850
  • 7 दिसंबर: लगभग 650
  • 8 दिसंबर: 500 से ज्यादा
  • 9 दिसंबर: 400 से अधिक
  • 10 दिसंबर: करीब 220
अनिल शर्मा
अनिल शर्माhttp://bolebharat.in
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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