नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच हुए ट्रेड डील को लेकर विस्तृत जानकारी अभी पूरी तरह सार्वजनिक नहीं की गई है। हालांकि, इस बीच इस डील को कैसे अंजाम दिया गया, इसे लेकर कुछ अहम जानकारियां अब सामने आ रही हैं। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका के साथ ट्रेड डील में एक अहम भूमिका भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल की भी रही।
रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल सितंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूस और चीन के राष्ट्रपतियों व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग से मुलाकात के तुरंत बाद एनएसए को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से मिलने के लिए अमेरिका भेजा गया था। ब्लूमबर्ग ने दिल्ली में एक अधिकारी के हवाले से बताया कि डोभाल ने रुबियो से कहा था कि भारत मतभेदों को भुलाकर बातचीत की मेज पर वापस आना चाहता है।
‘ट्रंप का कार्यकाल खत्म होने का इंतजार भी कर सकते हैं’
एनएसए डोभाल ने कहा कि भारत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके सहयोगियों के बयानबाजी से परेशान नहीं होगा। डोभाल ने यह तक संदेश दिया था कि भारत ट्रंप के कार्यकाल के समाप्त होने का इंतजार करने के लिए भी तैयार है क्योंकि उसने अतीत में भी अन्य शत्रुतापूर्ण अमेरिकी प्रशासनों का सामना किया है। हालांकि, नई दिल्ली चाहती है कि अमेरिकी प्रशासन भारत की आलोचना कम करे ताकि दोनों देशों के संबंध फिर से पटरी पर आ सकें।
गौरतलब है कि पिछले साल अगस्त में ट्रंप ने भारत को ‘डेड इकॉनमी’ कहा था और भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत का टैरिफ लगा दिया था। ट्रंप ने कहा था कि भारत द्वारा रूस से तेल मॉस्को को यूक्रेन युद्ध के लिए वित्त पोषित कर रही है।
रिपोर्ट के अनुसार डोभाल की मुलाकात के तुरंत बाद तनाव में कमी के संकेत दिखने लगे, ट्रंप ने 16 सितंबर को मोदी को उनके जन्मदिन पर बधाई दी और ‘शानदार काम’ के लिए उनकी प्रशंसा की। अगले चार महीनों में दोनों ने फोन पर चार बार और बात की।
हालांकि, डोभाल और रूबियो के बीच निजी बातचीत का विवरण दोनों पक्षों द्वारा सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन अमेरिकी विदेश विभाग के एक प्रवक्ता ने ब्लूमबर्ग को बताया कि यह एक राजनयिक प्रक्रिया है।
ट्रंप ने भारत पर टैरिफ घटाया
इसी हफ्ते सोमवार को ट्रंप ने भारत और अमेरिका के बीच एक व्यापार समझौते की घोषणा करते हुए कहा कि रेसिप्रोकल टैरिफ 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है। साथ ही अतिरिक्त 25 प्रतिशत का टैरिफ भी हटाने का ट्रंप ने ऐलान किया। ट्रंप ने अपने पोस्ट में कहा कि इसके बदले में भारत ने 500 अरब डॉलर मूल्य के अमेरिकी सामान खरीदने पर सहमति जताई है, जिसमें अमेरिकी और संभवतः वेनेजुएला का तेल भी शामिल है।
ट्रंप की घोषणा के कुछ ही देर बाद पीएम मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट में पुष्टि की कि टैरिफ कम कर दिए गए हैं। हालांकि, उन्होंने ट्रेड डील के बारे में कोई और जानकारी नहीं दी। पीएम मोदी ने कहा, ‘जब दो बड़ी अर्थव्यवस्थाएं और दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र एक साथ काम करते हैं, तो इससे हमारे लोगों को लाभ होता है और पारस्परिक रूप से लाभकारी सहयोग के अपार अवसर खुलते हैं।’
पीएम मोदी ने कहा, ‘वैश्विक शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए राष्ट्रपति ट्रंप का नेतृत्व अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत शांति के लिए उनके प्रयासों का पूर्ण समर्थन करता है। मैं अपनी साझेदारी को अभूतपूर्व ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए उनके साथ मिलकर काम करने के लिए उत्सुक हूं।’
वहीं, मंगलवार को केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि अमेरिका के साथ ‘बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौता’ सफलतापूर्वक हो गया है।
गोयल ने यह भी कहा कि सरकार ने भारत की अर्थव्यवस्था के संवेदनशील क्षेत्रों, विशेष रूप से कृषि और डेयरी क्षेत्र को बचाकर रखा है। उन्होंने कहा, ‘अमेरिका के साथ व्यापार समझौते में भारत की अर्थव्यवस्था के संवेदनशील क्षेत्रों, विशेष रूप से कृषि और डेयरी क्षेत्र को संरक्षित किया गया है। हमें देश भर से रिपोर्टें मिली हैं; इस पर व्यापक उत्साह है।’ उन्होंने आगे कहा कि दोनों देश जल्द ही एक संयुक्त बयान जारी करेंगे जिसमें समझौते का विवरण होगा, और जिस पर अमेरिका और भारत के बीच जल्द ही हस्ताक्षर किए जाएंगे।

