नई दिल्लीः डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के तहत टैरिफ (आयात शुल्क) को लेकर जारी वैश्विक अनिश्चितता के बीच, भारत सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर जल्दबाजी में हस्ताक्षर नहीं करेगी। सोमवार को एक आधिकारिक ब्रीफिंग के दौरान वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि वाशिंगटन जब वैश्विक टैरिफ दरों को फिर से बहाल करेगा, उसके बाद ही भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर किए जाएंगे।
गौरतलब है कि पिछले महीने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए पारस्परिक (रेसिप्रोकल) टैरिफ को निरस्त कर दिया था। हालांकि अदालत के फैसले के कुछ ही घंटों बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश जारी कर कुछ टैरिफ कार्रवाइयों को समाप्त कर दिया और अमेरिका में आने वाले सामान पर 10 प्रतिशत का अस्थायी आयात अधिभार (इंपोर्ट सरचार्ज) लगाने की घोषणा कर दी। बाद में उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए इस शुल्क को बढ़ाकर 15 प्रतिशत भी कर दिया।
राजेश अग्रवाल ने बताया कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते के विभिन्न पहलुओं को अंतिम रूप देने के लिए नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच बातचीत जारी है। समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार दोनों देश समझौते की रूपरेखा तय करने के लिए लगातार संपर्क में हैं।
वाणिज्य सचिव ने यह भी बताया कि अमेरिका के अलावा भारत इस समय कई अन्य देशों और क्षेत्रीय समूहों के साथ भी मुक्त व्यापार समझौतों पर बातचीत कर रहा है, ताकि वैश्विक व्यापार साझेदारियों का दायरा बढ़ाया जा सके। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक भारत की ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका, पेरू, चिली, यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (ईएईयू) और इजरायल के साथ भी एफटीए को लेकर वार्ता चल रही है।
राजेश अग्रवाल ने यह भी कहा कि अमेरिका फिलहाल भारत के लिए सबसे बड़ा निर्यात बाजार बना हुआ है, जबकि चीन भारत के लिए आयात का सबसे बड़ा स्रोत है। ऐसे में भारत सरकार व्यापार संबंधों को संतुलित और मजबूत बनाने के लिए विभिन्न देशों के साथ नए समझौतों पर जोर दे रही है।
इसी बीच ट्रंप प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद फिर से टैरिफ दबाव बनाने की दिशा में कदम उठाए हैं। हाल ही में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (यूएसटीआर) ने भारत समेत 15 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के खिलाफ कथित अनुचित विनिर्माण प्रथाओं की जांच शुरू करने की घोषणा की है।
यह जांच 1974 के ट्रेड एक्ट के तहत धारा 301 के अंतर्गत की जा रही है। इस प्रावधान के तहत अगर किसी देश पर अनुचित व्यापार व्यवहार का आरोप साबित होता है तो अमेरिका उस देश के खिलाफ नए टैरिफ लगा सकता है, आयात पर प्रतिबंध लगा सकता है या व्यापार समझौतों के तहत दी गई रियायतों को निलंबित कर सकता है।

