बांग्लादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी) ने 17 नवंबर को शेख हसीना को मानवाधिकारों के खिलाफ अपराध का दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई थी। मौत की सजा दिए जाने के बाद बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने शेख हसीना और पूर्व गृहमंत्री असदुज्जमान खान कमाल को प्रत्यर्पित करने का आग्रह किया है।
भारत ने बुधवार को कहा कि उसे बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण (एक्सट्रडिशन) को लेकर ढाका से औपचारिक अनुरोध प्राप्त हुआ है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि इस अनुरोध की जांच न्यायिक और आंतरिक कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही है। उन्होंने साथ ही यह भी दोहराया कि भारत बांग्लादेश के लोगों के हित, शांति, लोकतंत्र, स्थिरता और समावेशिता के प्रति प्रतिबद्ध है।
साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में जब शेख हसीना के प्रत्यर्पण के अनुरोध पर सवाल किया गया तो रणधीर जायसवाल ने कहा, “हां, हमें यह अनुरोध प्राप्त हुआ है और इसे न्यायिक व कानूनी प्रक्रियाओं के तहत जांचा जा रहा है। हम बांग्लादेश के लोगों के सर्वोत्तम हितों के लिए प्रतिबद्ध हैं और सभी संबंधित पक्षों के साथ रचनात्मक तरीके से संवाद जारी रखेंगे।”
शेख हसीना के खिलाफ यह फैसला जुलाई 2024 में हुए प्रदर्शनों से जुड़े मामले में दिया गया। इसके बाद बांग्लादेश ने औपचारिक रूप से भारत से प्रत्यर्पण का अनुरोध भेजा, जिसकी पुष्टि हाल ही में विदेश मामलों के सलाहकार तौहीद हुसैन ने की। हालांकि, उन्होंने इस कूटनीतिक संवाद के बारे में अधिक जानकारी देने से परहेज किया।
अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने हसीना के दो करीबी सहयोगियों को भी दोषी पाया। पूर्व गृह मंत्री असदुज्जामान खान कमाल को मौत की सजा दी गई, जबकि पूर्व पुलिस महानिरीक्षक चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून को राज्य का गवाह बनने के बाद पांच साल की सजा सुनाई गई।
शेख हसीना ने क्या आरोप लगाए हैं?
आईसीटी के फैसले के बाद शेख हसीना ने कहा कि यह निर्णय एक धांधली वाले ट्रिब्यूनल से आया है, जिसे अंतरिम सरकार ने स्थापित किया है और जिसका लोकतांत्रिक जनादेश नहीं है। उन्होंने इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित कार्रवाई बताते हुए कहा कि उनका मकसद उन्हें और अवामी लीग को खत्म करना है।
अपने बयान में शेख हसीना ने कहा, “मौत की सजा की मांग कर वे यह स्पष्ट कर रहे हैं कि चरमपंथी ताकतें लोकतांत्रिक व्यवस्था को खत्म कर बांग्लादेश की आखिरी निर्वाचित प्रधानमंत्री को रास्ते से हटाना चाहती हैं। यह जनता के अधिकारों को छीनने की कोशिश है।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आईसीटी की कार्यवाही का उद्देश्य न्याय नहीं बल्कि जुलाई-अगस्त 2025 की घटनाओं से ध्यान हटाना था, ताकि अंतरिम सरकार की नाकामी को छुपाया जा सके।
गौरतलब है कि विदेश मंत्रालय ने इससे पहले भी यह कहा था कि भारत बांग्लादेश के लोकतांत्रिक और स्थिर भविष्य के लिए समर्पित रहेगा। सरकार का रुख यह है कि सभी पक्षों से संवाद जारी रखते हुए क्षेत्रीय स्थिरता और शांति को प्राथमिकता दी जाएगी।

