भारत ने दुनिया भर में स्थित अपने दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों के जरिए चीनी नागरिकों के लिए पर्यटक वीजा फिर से शुरू कर दिया है। हालांकि इस फैसले की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक वीजा जारी करने की प्रक्रिया इस सप्ताह से शुरू हो चुकी है।
अप्रैल-मई 2020 में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तनाव और गलवान घाटी में हिंसक झड़प के बाद चीनी नागरिकों के लिए टूरिस्ट वीजा पूरी तरह बंद कर दिया गया था। वहीं इसी साल जुलाई में 5 साल बाद सीमित स्तर पर बीजिंग, शंघाई, ग्वांगझू और हांगकांग के भारतीय दूतावासों में वीजा प्रक्रिया शुरू की गई थी। लेकिन अब इसे वैश्विक स्तर पर लागू किया गया है।
रिश्तों को सामान्य करने की कोशिश
हिंदुस्तान टाइम्स ने सूत्रों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में बताया है कि हाल के महीनों में दोनों देशों ने संबंधों को पटरी पर लाने के लिए जन-केंद्रित कदम उठाए हैं। गलवान घाटी में हुई सैन्य झड़प और हिंसक टकराव के बाद दोनों देशों के संबंध छह दशकों में सबसे निचले स्तर पर पहुँच गए थे। इस झड़प में 20 भारतीय सैनिक और कम से कम चार चीनी सैनिक मारे गए थे। हालांकि अब भारत और चीन अपने द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने की लगातार कोशिश कर रहे हैं।
अक्टूबर में दोनों देशों के बीच बंद पड़ी सीधी उड़ानें फिर से शुरू की गई थीं। इसके साथ ही इस बार कैलाश मानसरोवर यात्रा को भी गर्मियों में बहाल करने पर सहमति बनी थी। दोनों देशों के दूतावासों में कूटनीतिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। विभिन्न श्रेणियों में वीजा सुविधा बढ़ाने और आपसी आर्थिक सहयोग पर भी सहमति बनी है।
अक्टूबर 2024 में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर अग्रिम पंक्ति की सेनाओं को हटाने पर समझौता हुआ था। इसके बाद कजान (रूस) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात हुई, जिसमें सीमा विवाद सहित कई लंबित मुद्दों पर बातचीत आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया।
तब से अब तक विदेश, रक्षा मंत्रियों और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के बीच कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। एनएसए अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी की विशेष प्रतिनिधि स्तर की मुलाकातों से सीमाई और आर्थिक मुद्दों पर सहयोग का रास्ता खुला है।
चीन ने भारत की व्यापार संबंधी चिंताओं पर काम शुरू कर दिया है। विशेष रूप से दुर्लभ खनिजों के निर्यात प्रतिबंधों को कम करने जैसे कदम उठाए गए हैं, जिससे आर्थिक सहयोग को गति मिल सकती है।

