अमेरिका के टैरिफ एक्शन के बीच भारत के लिए अच्छी खबर है। भारत की जीडीपी वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में अपेक्षा से अधिक बेहतर रही है। यही नहीं, ये पिछली पांच तिमाहियों में उच्चतम है। भारत की जीडीपी इस वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत रही है। जबकि पिछली तिमाही में यह 7.4 प्रतिशत थी।
सरकार की ओर से जारी आंकड़े में यह बताया गया है। यह वृद्धि सरकार के अपने अनुमान से भी बेहतर है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने इस तिमाही में 6.5 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान लगाया था। वैसे, ये आंकड़े अमेरिका की ओर से भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ से पहले के हैं।
कृषि और सर्विस सेक्टर में शानदार प्रदर्शन
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSSO) की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार पहली तिमाही में बेहतर प्रदर्शन में अहम योगदान कृषि क्षेत्र और सर्विस सेक्टर का है। कृषि क्षेत्र में 3.7% की वृद्धि दर्ज हुई है जो पिछले साल इसी तिमाही में 1.5% थी।
इसके अलावा सर्विस सेक्टर का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा, जिसकी वृद्धि दर 9.3 प्रतिशत रही। यह पिछले दो वर्षों में सबसे तेज वृद्धि रही, जबकि वित्त वर्ष 2024- 25 की चौथी तिमाही में यह 7.3 प्रतिशत थी। सरकारी सेवाओं में 12 तिमाहियों के उच्चतम स्तर 9.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि वित्तीय सेवाओं (8.6 प्रतिशत) और व्यापार, होटल, परिवहन एवं संचार (9.5 प्रतिशत) में पिछले दो वर्षों में सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई है। सर्विस सेक्टर का भारत की जीडीपी में अब 53 प्रतिशत का योगदान है।
विनिर्माण मजबूत, निर्माण निराशाजनक
रिपोर्ट के अनुसार औद्योगिक उत्पादन के धीमे संकेतों के बावजूद विनिर्माण क्षेत्र में 7.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह पिछले वर्ष के 7.6 प्रतिशत के उच्च आधार के लगभग बराबर है। वहीं, निर्माण क्षेत्र में वृद्धि दर घटकर 7.6 प्रतिशत रह गई, जबकि वित्त वर्ष 2024-25 की चौथी तिमाही में यह 10.8 प्रतिशत और पहली तिमाही में 10.1 प्रतिशत थी।
खनन क्षेत्र में सबसे अधिक गिरावट आई है। इसमें 3.1 प्रतिशत की गिरावट आई, जो 11 तिमाहियों में इसका सबसे कमजोर प्रदर्शन है। मानसून के जल्दी आने से उत्पादन प्रभावित होने के कारण बिजली उत्पादन में साल-दर-साल केवल 0.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो 19 तिमाहियों का सबसे निचला स्तर है।
मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था और उपभोग
रिपोर्ट के मुताबिक मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था की वजह से निजी उपभोग (Private consumption) बढ़कर पिछली तीन-तिमाही के उच्चतम स्तर 7 प्रतिशत पर पहुँच गया है। सरकारी उपभोग में 7.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि सकल स्थायी पूँजी निर्माण में कमी आई है। हालाँकि निवेश-जीडीपी अनुपात तीन साल के उच्चतम स्तर 34.6 प्रतिशत पर पहुँच गया है।
निजी उपभोग अब सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी का 56.7 प्रतिशत है, जो विकास की गति को बनाए रखने में इसकी केंद्रीय भूमिका को दर्शा रहा है।
इन सबके बीच भारत के लिए आने वाली तिमाहियों में टैरिफ, असमान मानसून की बारिश और वैश्विक अनिश्चितताएँ मंडरा रही हों। एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने लगभग दो दशक के अंतराल के बाद हाल ही में भारत की रेटिंग को बीबीबी में अपग्रेड किया है। एजेंसी ने वित्त वर्ष 2026 में भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए 6.5 प्रतिशत और अगले तीन वर्षों में 6.8 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया है।