नई दिल्लीः भारत ने एक बड़ी छलांग लगाते हुए विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गई है। भारत ने जीडीपी के मामले में जापान को पीछे छोड़ दिया है। सरकार ने अपनी वार्षिक आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट में इसकी जानकारी दी है। भारत की कुल जीडीपी 4.18 ट्रिलियन डॉलर है। वहीं, भारत अगले दो-तीन सालों में जर्मनी को पिछाड़ कर तीसरे स्थान की ओर अग्रसर है।
ऐसे में भारत अमेरिका और चीन के बाद सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। सरकार द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा गया “4.18 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी)के साथ भारत ने जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है और अगले 2.5 से 3 वर्षों में जर्मनी को तीसरे स्थान से विस्थापित करने की स्थिति में है, जिसका अनुमानित जीडीपी 2030 तक 7.3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर होगा।”
भारत सरकार ने जारी किए आंकड़े
सरकार द्वारा ये आंकड़े सोमवार (29 दिसंबर) को जारी किए गए। इसमें इस बात पर प्रकाश डाला गया कि “विकास की गति ने उम्मीद से कहीं अधिक सकारात्मक रुख दिखाया, 2025-26 की दूसरी तिमाही में जीडीपी छह तिमाहियों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई, जो वैश्विक व्यापार अनिश्चितताओं के बीच भारत के लचीलेपन को दर्शाती है। मजबूत निजी उपभोग के नेतृत्व में घरेलू कारकों ने इस विस्तार को समर्थन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।”
हालांकि भारत द्वारा जापान की अर्थव्यवस्था को पीछे छोड़ने के आंकड़ों की पुष्टि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) द्वारा 2026 की पहली छमाही के आंकड़े जारी करने के बाद होगी। आईएमएफ 2025 के अंतिम आंकड़े जारी करेगी।
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आईएमएफ के 2026 के पूर्वानुमान के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था का मूल्य 4.51 ट्रिलियन डॉलर है जो जापान के अनुमानित 4.46 ट्रिलियन डॉलर से थोड़ा अधिक है।
अमेरिकी टैरिफ के बीच चुनौतियों का सामना कर रही भारतीय अर्थव्यवस्था
भारत सरकार की तरफ से यह आंकड़े ऐसे समय में जारी किए गए हैं जब भारतीय अर्थव्यवस्था चुनौतियों का सामना कर रही है। इनमें अमेरिका द्वारा भारत से निर्यात की जाने वाली वस्तुओं पर अतिरिक्त टैरिफ समेत अन्य कारण शामिल हैं। अमेरिका द्वारा टैरिफ लगाए जाने से कपड़ा उद्योग, हीरा उद्योग, चमड़ा उद्योग में संकट की आशंका बनी हुई है। हालांकि, केंद्र सरकार ने इससे निपटने के लिए जीएसटी की दरें घटाई हैं जिससे भारतीय बाजार में लोगों की क्रय क्षमता बढ़े और लोग अधिक सामान खरीदें।
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सरकार द्वारा जारी समीक्षा में आगे कहा गया है “मुद्रास्फीति न्यूनतम सहनशीलता सीमा से नीचे बनी हुई है, बेरोजगारी में गिरावट आ रही है और निर्यात प्रदर्शन में लगातार सुधार हो रहा है। इसके अलावा, वित्तीय परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं, वाणिज्यिक क्षेत्र में ऋण प्रवाह मजबूत है जबकि शहरी उपभोग में और मजबूती के कारण मांग की स्थिति भी स्थिर बनी हुई है।”

