नई दिल्ली: IDFC फर्स्ट बैंक की चंडीगढ़ शाखा में सामने आए 590 करोड़ रुपये के घोटाले का असर सोमवार को बैंक के शेयर पर भी दिखा। बैंक के शेयर में 20 प्रतिशत की गिरावट के साथ लोअर सर्किट देखा गया। इससे निवेशकों की संपत्ति में 14,000 करोड़ रुपये से अधिक की गिरावट आई है। दिन की शुरुआत में शेयर बाजार पिछले सत्र की क्लोजिंग 83.51 रुपये की बजाए 10 प्रतिशत की गिरावट के साथ 75.16 रुपये पर खुला।
इसके बाद भी गिरावट बढ़ती चली गई और बैंक का शेयर 20 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 66.80 रुपये पर पहुंच गया। हालांकि, बाद में कुछ रिकवरी भी हुई और दोपहर 12.25 बजे तक ये 70.80 रुपये पर आ गया था। IDFC फर्स्ट बैंक में हुआ ये घोटाला तब सामने आया जब हरियाणा सरकार से जुड़ी संस्थाओं ने बैंक खातों में दर्ज वास्तविक राशि और रिकॉर्ड में दर्ज राशि में विसंगति की शिकायत की।
क्या है IDFC फर्स्ट बैंक में 590 करोड़ का फ्रॉड?
- आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने कहा है कि उसकी चंडीगढ़ शाखा के कर्मचारियों ने हरियाणा राज्य सरकार से जुड़े खातों में अनधिकृत लेनदेन किए, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 590 करोड़ रुपये की जमा राशि में गड़बड़ी हुई।
- यह संदिग्ध धोखाधड़ी कितनी बड़ी है, इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि घोटाले की ये राशि (590 करोड़) बैंक की तीसरी तिमाही के 503 करोड़ रुपये के शुद्ध लाभ से कहीं अधिक है।
- प्रारंभिक आंतरिक जांच से पता चला कि अनियमितताएं बैंक की चंडीगढ़ शाखा में रखे गए हरियाणा सरकार से संबंधित खातों के एक विशेष समूह तक ही सीमित थीं।
- इस बड़े घोटाले में संलिप्तता के संदेह में चार शाखा अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। बैंक ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है, अपने वैधानिक लेखा परीक्षकों को सूचित किया है और स्वतंत्र फोरेंसिक जांच के लिए KPMG को नियुक्त किया है।
- बैंक ने स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में कहा है, ‘पहली झलक में लगता है कि चंडीगढ़ की एक विशेष शाखा में कुछ कर्मचारियों द्वारा हरियाणा राज्य सरकार के कुछ खातों में अनधिकृत और धोखाधड़ी वाली गतिविधियां की गई हैं, जिनमें संभवतः अन्य व्यक्ति/संस्थाएं/सहयोगी भी शामिल हैं।’
- स्वतंत्र ब्रोकरेज फर्मों के अनुमानों के अनुसार, संदिग्ध धोखाधड़ी बैंक की कुल संपत्ति का लगभग 0.9 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2026 के कर-पूर्व लाभ का 20 प्रतिशत है।
- पूरा मामला तब सामने आया जब हरियाणा सरकार के एक विभाग ने अपना खाता बंद कर शेष राशि को दूसरे बैंक में स्थानांतरित करने का अनुरोध किया। इस प्रक्रिया के दौरान खाते में दर्ज राशि और वास्तविक शेष में अंतर पाया गया। 18 फरवरी से अन्य सरकारी खातों में भी इसी तरह की विसंगतियां सामने आईं।
- बैंक ने स्पष्ट किया है कि प्रारंभिक आंतरिक जांच के अनुसार यह मामला केवल चंडीगढ़ शाखा द्वारा संचालित हरियाणा सरकार से जुड़े कुछ खातों तक सीमित है और अन्य ग्राहकों पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। पहचाने गए खातों में कुल मिलानाधीन राशि लगभग 590 करोड़ रुपये आंकी गई है। अंतिम राशि आगे की जांच और संभावित वसूली के बाद तय होगी।
- आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के प्रबंध निदेशक और सीईओ वी. वैद्यनाथन ने मामले के प्रभाव पर कहा कि चूक सीमित दायरे में हुई थी और किसी व्यापक संरचनात्मक कमजोरी के बजाय ये आंतरिक मिलीभगत का नतीजा है। इकोनॉमिक्स टाइम्स के अनुसार वैद्यनाथन ने बताया, ‘बैंक में चेक या डेबिट निर्देशों को क्लियर करने के लिए मेकर, चेकर और ऑथराइजर सहित सभी आवश्यक नियंत्रण मौजूद हैं।’ उन्होंने आगे कहा, ‘हम 10 वर्षों से अधिक समय से परिचालन में हैं और 1,000 से अधिक शाखाएं खोल चुके हैं, और इससे पहले ऐसी कोई घटना नहीं हुई है।’
- धोखाधड़ी के मामलों की निगरानी के लिए बैंक के बोर्ड की विशेष समिति की बैठक भी 20 फरवरी को बुलाई गई थी, जिसके बाद 21 फरवरी को पूर्ण लेखापरीक्षा समिति और बोर्ड की बैठकें हुईं। सोमवार तड़के जमा किए गए एक नियामक दस्तावेज में, बैंक ने कहा कि उसने इस मामले के बारे में बैंकिंग नियामक को सूचित कर दिया है और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।
हरियाणा सरकार का एक्शन
इस बीच हरियाणा सरकार ने एक आधिकारिक परिपत्र के अनुसार आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक को तत्काल प्रभाव से अगले आदेश तक सरकारी कामकाज से हटा दिया है। इसमें सभी विभागों, बोर्डों, निगमों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को इन बैंकों का उपयोग जमा, निवेश या किसी भी अन्य वित्तीय लेनदेन के लिए बंद करने का निर्देश दिया गया है।
अधिकारियों को इन दोनों बैंकों में मौजूद शेष राशि को तुरंत स्थानांतरित करने और खातों को बंद करने के लिए भी कहा गया है।
राज्य के वित्त विभाग ने सावधि जमा (एफडी) से संबंधित निर्देशों के पालन में गंभीर चूक की ओर इशारा किया है। विभाग के अनुसार, कुछ मामलों में जिन धनराशियों को फ्लेक्सी डिपॉजिट या अधिक ब्याज वाली एफडी योजनाओं में रखा जाना था, उन्हें कथित तौर पर बचत खातों में रखा गया, जिससे राज्य को कम ब्याज प्राप्त हुआ और वित्तीय नुकसान हुआ।
विभागों को अनुमोदित जमा शर्तों का सख्ती से पालन करने, बैंकों द्वारा अनुपालन की नियमित रूप से पुष्टि करने, मासिक मिलान करने और किसी भी विसंगति की रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। सभी मिलान 31 मार्च, 2026 तक पूरे किए जाने चाहिए और एक प्रमाणित अनुपालन रिपोर्ट 4 अप्रैल, 2026 तक प्रस्तुत की जानी चाहिए।
(समाचार एजेंसी IANS के इनपुट के साथ)

