नई दिल्ली: भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच 27 जनवरी को ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर मुहर लग गई। यह समझौता कई दौर की बातचीत का नतीजा है और मौजूदा वैश्विक व्यापार परिवेश में मचे उथलपुथल के बीच दोनों पक्षों के लिए बड़ी उपलब्धि है। इस समझौते से दोनों यानी भारत सहित यूरोप को भी बड़ा फायदा होने की उम्मीद है।
भारत और 27 सदस्यीय यूरोपीय संघ मिलकर वैश्विक आर्थिक उत्पादन का लगभग एक चौथाई हिस्सा और लगभग दो अरब लोगों का संयुक्त बाजार बनाते हैं। वस्तुओं में द्विपक्षीय व्यापार पहले ही 136 अरब डॉलर से अधिक हो चुका है, लेकिन नीति निर्माताओं और अर्थशास्त्रियों का मानना है कि नया समझौता कई मायनों में फायदेमंद है। यह लागत कम कर सकता है और वैश्विक विनिर्माण और निर्यात केंद्र के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत कर सकता है।
कई साल की बातचीत के बाद FTA पर सहमति
नई दिल्ली और ब्रुसेल्स के बीच वार्ता मूल रूप से एक दशक से भी अधिक समय पहले शुरू हुई थी। हालांकि बाजार पहुंच, शुल्क और नियामक मानकों पर असहमति के कारण नौ वर्षों तक बातचीत ठप रही। इस बातचीत को 2022 में औपचारिक रूप से फिर शुरू किया गया। पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन द्वारा चर्चाओं को गति देने पर सहमति के बाद इसमें और तेजी आई।
यूरोपीय संघ के लिए भारत के साथ संबंधों को मजबूत करना आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने और किसी एक बाजार पर निर्भरता कम करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा भी है।
ब्रसेल्स ने हाल ही में मर्कोसुर (Mercosur/दक्षिण अमेरिकी देशों का एक क्षेत्रीय व्यापार संगठन) और कई एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के साथ व्यापार समझौते संपन्न किए हैं। जबकि दूसरी ओर भारत ने ब्रिटेन, न्यूजीलैंड और ओमान के साथ समझौतों को आगे बढ़ाया है। दोनों पक्षों के लिए इन उपलब्धियों के बीच भारत और ईयू ने आपसी मतभेदों को सुलझाने के लिए कई प्रयास किए। खासकर ऑटोमोबाइल, इस्पात और नियामक बाधाओं जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दों पर बातचीत अंतिम चरण तक चली।
भारत में विदेशी कारें होंगी सस्ती
इस डील के तहत भारत ने कई यूरोपीय उत्पादों पर आयात शुल्क में काफी कमी करने की प्रतिबद्धता जताई है। वहीं यूरोपीय संघ विनिर्माण, रसायन, कपड़े और इलेक्ट्रॉनिक्स सहित भारतीय निर्यात की एक विस्तृत श्रृंखला के लिए बेहतर बाजार पहुंच प्रदान करेगा।
इस समझौते के दौरान ऑटोमोबाइल क्षेत्र सबसे विवादास्पद क्षेत्र के रूप में उभरा। भारत वर्तमान में विदेशी निर्मित कारों, विशेष रूप से प्रीमियम सेगमेंट की कारों पर 100 प्रतिशत से अधिक का आयात शुल्क लगाता है। अब समझौते के तहत यूरोपीय संघ में निर्मित वाहनों पर शुल्क लगभग 40 प्रतिशत तक कम होने की उम्मीद है।
सरकार ने घोषणा की है कि मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तहत शुल्क धीरे-धीरे घटाकर 10% कर दिया जाएगा, लेकिन वार्षिक कटौती की सटीक दर अभी तक घोषित नहीं की गई है। हालांकि, इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए यह समय सीमा लंबी है, क्योंकि अगले पांच वर्षों तक कोई शुल्क कटौती नहीं की जाएगी।
बहरहाल, ताजा समझौता फॉक्सवैगन, बीएमडब्ल्यू, मर्सिडीज-बेंज और रेनॉल्ट जैसी यूरोपीय कार निर्माताओं के लिए सबसे तेजी से बढ़ते ऑटोमोटिव बाजारों में से एक में बेहतर भागीदारी के दरवाजे खोलेगा।
भारत के लिए ये फायदे भी…
इस डील से भारत के लिए 75 अरब डॉलर (6.41 लाख करोड़ रुपए) के निर्यात के रास्ते खुलेंगे। भारतीय मैन्युफैक्चरर्स और एमएसएमई के लिए आगे बढ़ने के रास्ते खुलेंगे और यूरोप के हाई-वैल्यू ग्राहकों तक सीधी पहुंच मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक ट्वीट में कहा गया कि कि भारत-ईयू ट्रेड डील से भारतीय निर्यात मूल्य के 99 प्रतिशत हिस्से को ईयू में ड्यूटी फ्री एंट्री मिलेगी।
दोनों देशों के बीच हुए ट्रेड समझौते से भारत को यूरोप के आईटी, फाइनेंशियल और शिक्षा जैसे सब-सेक्टर्स तक पहुंच मिलेगी।
यह समझौता छात्रों के लिए भी बड़ी सौगात लेकर आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जारी पोस्टर में बताया गया कि इस डील के तहत छात्रों को शिक्षा के बाद नौ महीने का गारंटीड वीजा की व्यवस्था की गई है। इस समझौते के तहत ईयू और भारत एआई, क्लीन टेक और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में कॉरपोरेशन को मजबूत करेंगे।
लेदर और टेक्सटाइल इंडस्ट्री को फायदा
भारत-ईयू के बीच एफटीए देश के अधिक श्रम उपयोग वाले सेक्टर्स जैसे लेदर एंड फुटवियर, जेम्स एवं ज्वैलरी और टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए भी बड़ी सौगात लेकर आया है। अब यह सेक्टर जीरो ड्यूटी पर यूरोप के 27 देशों में आसानी से निर्यात कर पाएंगे।
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर की गई पोस्ट में कहा गया कि भारत-ईयू एफटीए से देश के अधिक श्रम उपयोग वाले सेक्टर्स को बढ़ावा मिलेगा और उनके निर्यात में तेज वृद्धि देखने को मिलेगी।
पोस्ट में बताया गया कि इस ट्रेड डील से यूरोप को भारत के टेक्सटाइल और अपैरल निर्यात पर जीरो ड्यूटी लगेगी। इससे भारतीय निर्यातकों को ईयू के 263 अरब डॉलर के टेक्सटाइल बाजार में सीधे प्रवेश मिलेगा। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भारत-ईयू एफटीए से लेदर एंड फुटवियर पर ड्यूटी जीरो हो गई है, जो कि पहले 17 प्रतिशत थी। इससे भारतीय निर्यातकों को यूरोप के 100 अरब डॉलर के बाजार में जीरो ड्यूटी पर निर्यात के मौके मिलेंगे।
इसके साथ ही, इस एफटीए से रत्न और आभूषण उद्योग को भी फायदा होगा। इससे यूरोप के 79 अरब डॉलर के प्रीमियम मार्केट में नए अवसर खुलेंगे। वहीं, भारतीय निर्यातकों को यूरोप के 2 ट्रिलियन डॉलर के इंडस्ट्रियल बाजार में प्राथमिकता के आधार पर डायरेक्ट एंट्री मिलेगी।
भारत और ईयू के बीच समझौता, आगे क्या?
दोनों पक्षों के बीच बातचीत समाप्त हो चुकी है, फिर भी समझौता तुरंत लागू नहीं होगा। समझौते की पांच से छह महीने तक कानूनी जांच होगी, जिसके बाद औपचारिक हस्ताक्षर और पुष्टि की प्रक्रिया होगी। साथ ही समझौते को लागू करने से पहले यूरोपीय संसद की मंजूरी आवश्यक होगी। वैसे, दोनों पक्षों के अधिकारियों को उम्मीद है कि यह समझौता लगभग एक वर्ष के भीतर लागू हो जाएगा।

