नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर की खबर बुधवार की सबुह दुनिया भर के मुल्कों के लिए राहत लेकर आई। इससे पहले मंगलवार को डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी देते हुए कहा था कि वे ईरान की पूरी सभ्यता खत्म कर देंगे।
ट्रंप की इस धमकी के बाद से ही दुनिया सांस रोककर बैठी थी। ट्रंप ने ईरान पर ‘विनाशकारी हमले’ की डेडलाइन भारतीय समय के अनुसार बुधवार सुबह 5.30 बजे तक की रखी थी।
इससे ठीक डेढ़ घंटे पहले ट्रंप ने सोशल मीडिया पर सीजफायर के संकेत दिए। इसके कुछ देर बाद ईरान की ओर से युद्धविराम के लिए राजी होने की बात कही गई। बाद में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी अमेरिकी डेडलाइन के खत्म होने के कुछ मिनट पहले लिखा कि ईरान और अमेरिका तत्काल प्रभाव से सीजफायर के लिए तैयार हो गए हैं।
इस सीजफायर तक दोनों देशों के पहुंचने की जो कहानी अब तक सामने आई है, वो बहत सीधी नजर आती है। हालांकि, माना जा रहा है कि इसमें कई दिलचस्प ट्विस्ट हैं, जिसके बारे में शायद अगले कुछ दिनों में पता चलेगा। ट्रंप और ईरानी नेतृत्व दोनों ही इसे अपनी-अपनी जीत बता रहे हैं। चीन और पाकिस्तान की भी भूमिका की बात सामने आई है।
ट्रंप की धमकी के बाद रात भर क्या कुछ हुआ?
ट्रंप की ईरान की सभ्यता खत्म कर देने वाली धमकी के बाद से तेहरान से लेकर पूरी दुनिया में हलचल थी। सवाल उठने लगे थे कि क्या अमेरिका परमाणु हमलों का सहारा लेगा। ट्रंप के एक रात में पूरा देश तबाह करने की धमकी के बीच B-2 स्पिरिट बमवर्षक विमानों के एक्टिव किए जाने जैसी खबरें भी आई।
दूसरी ओर ईरान में कई अहम जगहों और खासकर बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर वाले स्थानों पर लोग ह्यूमन चेन बनाकर खड़े होते नजर आए।
हालांकि, देर रात होते-होते किसी समझौते तक पहुंचने की खबरें आने लगी थी। पाकिस्तान की ओर से इसके संकेत दिए गए। माना जा रहा है कि चीन ने भी ईरान पर दबाव बनाया जिससे वो अमेरिका के साथ बातचीत और युद्धविराम के लिए तैयार हुआ।
पाकिस्तान की भूमिका की कहानी क्या है?
सीबीएस न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप ने दो सप्ताह के युद्धविराम को अंतिम रूप देने से पहले इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और पाकिस्तान के फील्ड मार्शल मुनीर से बात की। रिपोर्टों के अनुसार, फील्ड मार्शल मुनीर इस दौरान अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के साथ ‘पूरी रात’ संपर्क में रहे।
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया के जरिए युद्धविराम की पुष्टि करते हुए एक पोस्ट किया। इसकी शुरुआत उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के प्रति ‘कृतज्ञता और प्रशंसा’ व्यक्त करने से की और लिखा कि इन्होंने ‘क्षेत्र में युद्ध को समाप्त करने के लिए अथक प्रयास किए।’ अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भी ट्रुथ सोशल पर अराघची के इस पोस्ट को साझा किया, जिससे यह साफ है कि वाशिंगटन ने शांति वार्ता में इस्लामाबाद की भूमिका का समर्थन किया है।
हालांकि, पाकिस्तान की इस कूटनीतिक सफलता पर एक गलती का भी साया पड़ गया, जिससे कई सवाल खड़े हुए। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की ओर से आधी रात के बाद एक पोस्ट किया गया जिसमें उन्होंने ट्रंप से समय सीमा बढ़ाने की अपील की गई थी। यह अपील गलती से ऊपर एक अन्य पंक्ति के साथ पोस्ट हो गई थी, जिसमें लिखा था- ‘ड्राफ्ट – एक्स पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का संदेश।’
बाद में गलती नजर आने पर इसे हटा दिया गया, लेकिन तब तक इसका स्क्रिनशॉट वायरल हो गया। दावे किए जाने लगे कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने व्हाइट हाउस द्वारा भेजे गए संदेश को ‘कट पेस्ट’ किया है।

यह भी गौर करने वाली बात है कि पाकिस्तानी पीएम ने ट्रंप को युद्धविराम की अपील करते हुए जो कुछ पहले एक्स पर लिखा था, सबकुछ वैसा ही हुआ। बाद में ट्रंप ने पाकिस्तानी पीएम के इसी पोस्ट को आधार बताते हुए सीजफायर के लिए तैयार होने की बात कही।
ट्रंप ने सीजफायर के लिए राजी होने की बात करते हुए ट्रूथ सोशल पर लिखा, ‘पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के साथ हुई बातचीत के आधार पर…और क्योंकि उन्होंने अनुरोध किया है कि ईरान पर विनाशकारी सैन्य कार्रवाई को फिलहाल रोका जाए, मैं, ईरान पर बमबारी और हमले को दो सप्ताह के लिए रोकने के लिए तैयार हूं। लेकिन ये शर्त है कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोलने पर सहमत हो।’
बहरहाल, सीजफायर की घोषणा के साथ दोनों ही पक्षों ने पाकिस्तान का शुक्रिया अदा किया है। वहीं, पाकिस्तान की ओर से दोनों पक्षों को शुक्रवार को इस्लामाबाद में बातचीत के लिए बुलाया गया है।
पाकिस्तान पर क्यों जताया अमेरिका और ईरान ने भरोसा
अमेरिका के साथ संबंधों को लेकर ईरान अब अपने अरब पड़ोसियों पर बहुत भरोसा नहीं कर सकता। ईरान ने इस जंग में अमेरिका-इजराइल के हवाई हमलों के जवाब में खाड़ी देशों पर भी बमबारी की थी।
दूसरी ओर पाकिस्तान ईरान के साथ बॉर्डर साझा करता है और दोनों देशों के बीच अच्छे राजनयिक संबंध रहे हैं। इसका संकेत अराघची द्वारा शरीफ और मुनीर को ‘प्रिय भाई’ कहने से भी मिलता है। इसके अलावा, फिलिस्तीन मुद्दे के कारण पाकिस्तान के इजराइल के साथ कोई राजनयिक संबंध नहीं हैं, और यह एक और कारण है कि तेहरान उस पर भरोसा कर रहा है।
दूसरी ओर अमेरिका की अगर बात है, तो पिछले साल से पाकिस्तान के साथ उसके संबंध बेहतर हुए हैं। गाजा में शांति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से गठित ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस में भी पाकिस्तान शामिल हुआ है। ट्रंप पहले ही पाकिस्तानी सेना प्रमुख मुनीर को अपना ‘पसंदीदा फील्ड मार्शल’ कह चुके हैं। अमेरिका को अहसास है कि वह पाकिस्तान को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर सकता है।
इन सबके अलावा मुस्लिम देश होने की वजह से पाकिस्तान के अन्य खाड़ी देशों के साथ भी अच्छे संबंध हैं। ऐसे में सभी पक्षों से बात कर सकता है। इन सबके अलावा युद्ध खत्म कराने में पाकिस्तान का अपना फायदा भी है। उसकी अर्थव्यवस्था पहले ही बुरी स्थिति में है। तेल आदि की सप्लाई से उस पर और मार पड़ रही है।
देश के भीतर भी स्थिरता को लेकर चिंताएं हैं। अमेरिका-इजराइल के हमले में अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे, जिनमें कई लोगों की जान चली गई। युद्धविराम में पाकिस्तान के अपने हितों ने भी मध्यस्थ के रूप में दोनों पक्षों का विश्वास जीतने में उसकी मदद की। चीन के ठोस समर्थन ने उसकी विश्वसनीयता को और बढ़ाया है।

