खाड़ी क्षेत्र में संघर्षविराम लागू होने के महज कुछ ही घंटों के भीतर वैश्विक राजनीति का पारा एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर सीजफायर की शर्तों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कड़ी चेतावनी दी है, वहीं ईरान ने भी पलटवार करते हुए अमेरिका को इजरायली कार्रवाइयों पर लगाम लगाने की नसीहत दी है।
ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ के जरिए तेहरान पर तीखा हमला बोला। ट्रंप का गुस्सा विशेष रूप से होर्मुज स्ट्रेट में तेल टैंकरों की आवाजाही को लेकर है। ट्रंप ने अपनी पोस्ट में कहा कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट से तेल टैंकरों को गुजरने की अनुमति देने में बहुत खराब काम कर रहा है और यह संघर्षविराम समझौते की भावना के खिलाफ है।
दरअसल राष्ट्रपति ट्रंप उन रिपोर्टों पर भड़के हुए हैं जिनमें दावा किया गया है कि ईरान इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने वाले टैंकरों से ‘टोल’ या ‘शुल्क’ वसूलने की योजना बना रहा है। उन्होंने कहा कि अगर ईरान ऐसी कोई वसूली कर रहा है, तो उसे तत्काल प्रभाव से बंद करना होगा। हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप पूर्व में खुद भी इस मार्ग पर अमेरिकी टैक्स लगाने की वकालत कर चुके हैं।
ईरान का पलटवार
दूसरी ओर, ईरान ने अपने रुख को दोहराते हुए कहा है कि समुद्री मार्ग पूरी तरह बंद नहीं है, लेकिन सुरक्षित आवागमन कुछ शर्तों के तहत ही संभव होगा। ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि जहाजों की आवाजाही ईरानी सेना के समन्वय और तकनीकी मानकों के अनुरूप ही होगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर अमेरिका अपने वादों का पालन करता है, तो संघर्षविराम के तहत सीमित अवधि के लिए सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराया जा सकता है।
इसी बीच, अराघची ने अमेरिका को चेतावनी दी कि वह इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को कूटनीतिक प्रक्रिया को पटरी से उतारने की छूट न दे। उन्होंने कहा कि 40 दिनों की लड़ाई के बाद हुआ संघर्षविराम एक महत्वपूर्ण मौका है, जिसे कमजोर करना बेवकूफी होगी। ईरान ने यह भी आरोप लगाया कि इजरायल ने संघर्षविराम के बावजूद लेबनान में हमले जारी रखे हैं।
गौरतलब है कि होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल आपूर्ति का एक प्रमुख मार्ग है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की बाधा का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ता है। भारत जैसे ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों के लिए यह स्थिति खास तौर पर चिंताजनक है, क्योंकि सप्लाई में व्यवधान से तेल की कीमतों और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है।
‘अमेरिका के साथ शांति वार्ता नहीं’
बताते चलें कि कूटनीतिक स्तर पर भी हलचल तेज है। ईरानी विदेश मंत्री ने रूस, फ्रांस, स्पेन और जर्मनी के अपने समकक्षों से बातचीत कर संघर्षविराम और क्षेत्रीय हालात पर चर्चा की। वहीं, पाकिस्तान की मध्यस्थता में इस्लामाबाद में शांति वार्ता शुरू होने की तैयारी है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरानी संसद के अध्यक्ष (स्पीकर) मोहम्मद बागेर कलीबाफ इस वार्ता में ईरानी पक्ष का नेतृत्व कर सकते हैं। हालांकि इस बीच सीजफायर को लेकर ईरान ने पाकिस्तान के साथ बातचीत खबरों को खारिज कर दिया है।
ईरानी सरकारी मीडिया ने कहा कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान नहीं पहुंचे हैं। तेहरान ने कहा कि लेबनान में युद्धविराम लागू होने तक इस्लामाबाद में अमेरिका के साथ शांति वार्ता में हिस्सा लेने की कोई योजना नहीं है। यह बातचीत तब तक स्थगित रहेगी जबतक अमेरिका इजराइल को लेबनान में हमले करने से नहीं रोकता।
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