Saturday, November 29, 2025
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हांगकांग में रिहायशी इमारत में आग लगने से मरने वालों की संख्या बढ़कर 128 हुई, 3 गिरफ्तार

अधिकारियों का कहना है कि इमारतों की बाहरी दीवारों पर ज्वलनशील सामग्री और खिड़कियों को ब्लॉक करने वाले फोम बोर्ड के कारण आग तेजी से ऊपर और आसपास के टावरों में फैल गई।

हांगकांग में करीब आठ दशकों की सबसे भयावह आग में मरने वालों की संख्या 128 हो गई है। बुधवार हांगकांग के ताई पो क्षेत्र में एक रिहायशी इलाका भीषण आग की चपेट में आ गया था।

रेस्क्यू टीमों ने ताई पो स्थित वांग फुक कोर्ट एस्टेट के मलबे से और शव निकाले हैं। यहां आठ 32 मंजिला इमारतों में आग लगी थी, जो बांस के मचान (स्कैफोल्डिंग) से घिरी हुई थीं।

बुधवार को शुरू हुई आग बेहद तेजी से फैली और कुछ ही मिनटों में कई इमारतों को अपनी चपेट में ले लिया। यह 1948 के बाद हांगकांग की सबसे भीषण आग मानी जा रही है। उस वक्त भी एक वेयरहाउस में लगी आग में 176 लोगों की जान गई थी।

अधिकारियों का कहना है कि इमारतों की बाहरी दीवारों पर ज्वलनशील सामग्री और खिड़कियों को ब्लॉक करने वाले फोम बोर्ड के कारण आग तेजी से ऊपर और आसपास के टावरों में फैल गई।

निर्माण कंपनी के अधिकारी गिरफ्तार

इस एस्टेट में एक साल से रेनोवेशन का काम चल रहा था। इसी मामले में प्रेस्टिज कंस्ट्रक्शन कंपनी के दो डायरेक्टर और एक इंजीनियरिंग कंसल्टेंट को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उन पर गैर-इरादतन हत्या (मैनस्लॉटर) का संदेह है।

पुलिस का कहना है कि निर्माण में गंभीर लापरवाही बरती गई है। कंपनी के ऑफिस से दस्तावेज, कंप्यूटर और फोन जब्त कर लिए गए हैं।

शुक्रवार को भी रेस्क्यू टीम कई फ्लैटों में जबरन घुसकर तलाशी लेती रही। अभी भी कम से कम 25 कॉल ऐसे हैं जिनका जवाब नहीं मिला है। समुदाय केंद्र के बाहर लोग चुपचाप इंतजार करते दिखे, जहां अधिकारियों ने अंदर की तस्वीरें दिखाकर मृतकों की पहचान कराने की प्रक्रिया शुरू की।

मृतकों और लापता लोगों में बड़ी संख्या फिलीपींस और इंडोनेशिया के घरेलू कामगारों की है। फिलीपींस की एक संस्था के मुताबिक 19 फिलीपीनी नागरिक अभी तक लापता हैं। इंडोनेशिया ने पुष्टि की है कि उसके दो नागरिकों की मौत हो चुकी है।

बता दें कि हांगकांग में 3.68 लाख से अधिक घरेलू कामगार हैं, जिनमें अधिकतर गरीब एशियाई देशों से आते हैं और अक्सर उसी घर में रहते हैं जहां वे काम करते हैं।

इस हादसे के बाद हांगकांग में बांस से बनने वाली स्कैफोल्डिंग पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। आग सबसे पहले बांस के मचान से शुरू हुई और तेज हवा के कारण कई टावरों तक पहुंच गई।

कई विशेषज्ञों का कहना है कि अब समय आ गया है कि बांस की जगह धातु की स्कैफोल्डिंग अपनाई जाए, क्योंकि यह आग पकड़ने वाली होती है और 2018 से अब तक 23 मौतें इससे जुड़ी घटनाओं में हुई हैं।

सैकड़ों लोग दूसरी रात भी पास के एक मॉल में सोने को मजबूर थे। वहां प्रभावित लोगों के लिए अस्थायी तंबू और मैट बिछाए गए हैं। लोगों ने कहा कि सरकारी शेल्टर उन लोगों के लिए होने चाहिए जिनके पास बिल्कुल दूसरा विकल्प नहीं है।

स्वयंसेवक खाद्य सामग्री और जरूरी सामान बांट रहे हैं। इस हादसे ने शहर में असुरक्षा की भावना बढ़ा दी है, जहां ऊंचा किराया और पुराने मकान पहले से ही चिंता का विषय रहे हैं।

राहत कोष की घोषणा

हांगकांग के चीफ एग्जीक्यूटिव जॉन ली ने 300 मिलियन हांगकांग डॉलर (करीब 39 मिलियन अमेरिकी डॉलर) की सहायता राशि का ऐलान किया है। चीन की कई बड़ी कंपनियों ने भी सहयोग देने की बात कही है।

बीजिंग भी सक्रिय हुआ है, ताकि यह मामला जनविश्वास का संकट ना बन जाए। फिलहाल आग के शुरू होने का सटीक कारण पता नहीं चला है, लेकिन जांचकर्ताओं का मानना है कि ज्वलनशील बाहरी सामग्री, प्लास्टिक कवर और बांस की स्कैफोल्डिंग ने मिलकर आग को भयंकर रूप दिया।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह हादसा हांगकांग में निर्माण सुरक्षा को लेकर एक अहम मोड़ साबित हो सकता है। इंजीनियर देवांश गुलाटी ने कहा, “यह त्रासदी सबक से भरी है। गलत हालात कैसे एक साथ आकर आपदा बन जाते हैं, यह इसका बड़ा उदाहरण है।”

अनिल शर्मा
अनिल शर्माhttp://bolebharat.in
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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