Friday, March 20, 2026
Homeभारतवरिष्ठ साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल का निधन, ज्ञानपीठ समेत मिले थे...

वरिष्ठ साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल का निधन, ज्ञानपीठ समेत मिले थे कई पुरस्कार

हिंदी के जाने-माने वरिष्ठ साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल का निधन हो गया। उन्होंने 88 वर्ष की आयु में एम्स रायपुर में अंतिम सांस ली।

रायपुरः छत्तीसगढ़ के जाने माने साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ला दुनिया में नहीं रहे। उनके निधन से साहित्य जगत में शोक की लहर है। वे लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे। रायपुर के एम्स अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। विनोद जी को ज्ञानपीठ पुरस्कार दिए जाने के बाद अशोक वाजपेयी ने अपने साप्ताहिक कॉलम कभी कभार में उनके बारे में लिखा था, बड़बोले, बेसुरे नायकों से आक्रांत समय में अनायकता के गाथाकार। इलाज के दौरान एम्स में उन्होंने अंतिम सांस ली। विनोद जी हिंदी साहित्य के एक सशक्त हस्ताक्षर थे।

उनकी रचनाओं में सामाजिक सरोकार , मानवीय संवेदनाएं और समकालीन जीवन की जटिलताओं का गहरा चित्रण दिखता है। कविता, कहानी और निबंध के क्षेत्र में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। विनोद जी ने अपने लेखन में छत्तीसगढ़ की मिट्टी , संस्कृति और आम जनजीवन को शब्दों में पिरोया।

छत्तीसगढ़ और यहां के आदिवासियों को लेकर उनमें गहरी संवेदना रही है, मसलन इन पंक्तियों को ही देखें, ‘एक आदिवासी/कहीं भी आदिवासी नहीं/चलते-चलते/राह के एक पेड़ के नीचे खड़ा हुआ नहीं/दूर चलते-चलते/दूसरे पेड़ के नीचे, थककर भी बैठा नहीं,/जंगल से बाहर हुआ आदिवासी/एक पेड़ के लिए भी आदिवासी नहीं।’

1997 में विनोद कुमार शुक्ल को उनके उपन्यास ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’, के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार दिया गया था। इसके अलावा उन्हें देश विदेश के अनेक प्रमुख पुरस्कार, सम्मान और फैलोशिप से नवाजा जा चुका है। इनमें ज्ञानपीठ के अलावा गजानन माधव मुक्तिबोध फैलोशिप, रजा पुरस्कार, शिखर सम्मान, साहित्य अकादमी की महत्तर सदस्यता और 2023 का प्रतिष्ठित पैन-नाबोकोव पुरस्कार शामिल है।

प्रदेश के मुखिया विष्णु देव साय ने एक्स पर लिखा कि साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल जी का निधन एक बड़ी क्षति है। नौकर की कमीज, दीवार में एक खिड़की रहती थी जैसी चर्चित कृतियों से साधारण जीवन को गरिमा देने वाले विनोद जी छत्तीसगढ़ के गौरव के रूप में हमेशा हम सबके हृदय में विद्यमान रहेंगे। वेदनाओं से परिपूर्ण उनकी रचनाएं पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी। उनके परिजन एवं पाठकों-प्रशंसकों को हार्दिक संवेदना।

विनोद कुमार शुक्ल का अंतिम संस्कार कल किया जाएगा। समाचार एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक उनका शव घर पहुंच गया है।

उनके निधन पर लेखक व्योमेश शुक्ल ने श्रद्धांजलि व्यक्त की। व्योमेश ने उनके व्यक्तित्व को एक साधु के समान बताया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनके निधन पर दुख व्यक्त किया। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा “ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात लेखक विनोद कुमार शुक्ल जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। हिन्दी साहित्य जगत में अपने अमूल्य योगदान के लिए वे हमेशा स्मरणीय रहेंगे। शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों और प्रशंसकों के साथ हैं। ओम शांति।”

प्रवीण सिंह
प्रवीण सिंह
छत्तीसगढ़ के जांजगीर चांपा जिले का रहने वाला हूं। पिछले 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रतिष्ठित चैनल ईटीवी और सहारा समय के प्रदेश में पहले रिपोर्टर, 2001 में मुंबई से रायपुर आने के बाद लगातार विभिन्न चैनलों , प्रिंट और ईटीवी भारत की वेबसाइट में भी अपनी सेवाएं दी है।
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments