शुक्रवार, मार्च 20, 2026
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आज से रद्द होंगे H1b वीजा आवेदन, आवेदकों के लिए क्या हैं इसके मायने?

वाशिंगटनः एच-1बी वीजा कार्यक्रम में 20 मार्च यानी आज से महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। इसके तहत विदेशी श्रम गेटवे (फ्लैग) अपने पुराने आवेदकों को हटा रहा है तथा अमेरिका नागरिकता एवं आव्रजन सेवाएं (यूएससीआईएस) इस प्रक्रिया के लिए नई प्रणाली लागू कर रहा है। 

एच-1 बी वीजा विदेशी में काम करने वाले पेशेवरों के लिए एक प्रमुख माध्यम है। नई प्रणाली लाने के पीछे का उद्देश्य प्रक्रिया को और सरल और प्रभावी बनाना है।

हटाया जाएगा पांच साल पुराना रिकॉर्ड

इसके तहत सिस्टम से पांच साल पुराना कोई भी रिकॉर्ड हटाया जाएगा। इसके तहत यदि किसी मामले की तारीख 25 मार्च 2020 है तो इसे 25 मार्च 2025 को हटा दिया जाएगा। इसलिए नियोक्ताओं को 19 मार्च तक पांच साल से पुराने डेटा को डाउनलोड करने के लिए कहा गया था। 

फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, एच-1 बी सभी स्थायी श्रम शर्त आवेदनों को 20 मार्च से हटा दिया जाएगा तथा उन्हें फ्लैग प्रणाली से हटा दिया जाएगा। इसके बाद यूएससीआईएस एक नई आवेदन प्रक्रिया शुरू करेगा जिसे सभी आवेदकों के लिए अधिक निष्पक्ष और समान बताया जाएगा। 

जहां पुरानी प्रक्रिया में बहुत से नियोक्ताओं एक व्यक्ति के लिए आवेदन कर सकते थे। नई प्रणाली में इसे अधिक न्यायसंगत बनाया जाएगा। इससे सभी आवेदकों को समान अवसर प्रदान किए जाएंगे। चाहे कितने भी नियोक्ता उनके लिए आवेदन करें।

नई प्रणाली से क्या होगा लाभ? 

इस नई प्रणाली में आवेदनों की बजाय लाभार्थियों का चयन किया जाएगा जिससे एक ही व्यक्ति के लिए डुप्लिकेट प्रविष्टियों को रोका जा सकेगा। इससे बड़ी कंपनियों को मिलने वाला लाभ समाप्त हो जाएगा। पुरानी प्रणाली में वह एक ही व्यक्ति के लिए कई आवेदन कर सकती थी। 

हालांकि, नई प्रणाली में पंजीकरण शुल्क बढ़ जाएगा। पहले जहां आवेदन शुल्क 10 डॉलर यानी करीब 850 रुपये था। वो अब बढ़कर 250 डॉलर यानी 21 हजार से अधिक हो जाएगा। 

इसके अलावा एक और बदलाव यह है कि यूएससीआईएस उम्मीदवारों को आनलाइन पंजीकरण कराना होगा। नियोक्ताओं को एच-1 बी वीजा याचिका पूरी तरह दाखिल करने से पहले पंजीकरण कराना होगा। इससे यूएससीआईएस को प्रक्रिया में तेजी लाने में मदद मिलेगी। 

चूंकि नई प्रणाली बेहतर चयन और अधिक निष्पक्षता का वादा करती है इसलिए इससे नियोक्ताओं का खर्च भी बढ़ेगा। ऐसे में नियोक्ताओं को अब सावधानीपूर्वक यह चुनना होगा कि वह किसे प्रायोजित करती है। 

अमरेन्द्र यादव
अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...
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