Friday, March 20, 2026
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भारत में तेजी से बढ़ रही गुटखा और दूसरे तंबाकू प्रोडक्ट की खपत, गरीब परिवारों में चलन ज्यादा: सर्वे

सर्वे के अनुसार ग्रामीण भारत में, तंबाकू का सेवन करने वाले परिवार 9.9 करोड़ (सभी परिवारों का 59.3 प्रतिशत) से बढ़कर 13.3 करोड़ (68.6 प्रतिशत) हो गए हैं। इस तरह केवल एक दशक में 33 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

नई दिल्ली: भारत में तंबाकू का सेवन तेजी से बढ़ रहा है और व्यापक रूप से ये चलन बढ़ता ही जा रहा है। खासकर गरीब परिवारों में गुटखा और दूसरे तंबाकू प्रोडक्ट के चलन ज्यादा तेजी से बढ़े हैं। पारिवारिक उपभोग व्यय सर्वेक्षण (HCES) 2023-24 के जरिए ये कड़वी सच्चाई सामने आई है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने अगस्त 2023 से जुलाई 2024 के दौरान घेरेलू उपभोग व्यय पर यह सर्वेक्षण कराया था। तंबाकू सेवन के गरीब घरों के लोगों की जिंदगी में और गहराई से जड़ें जमाने की सच्चाई उस समय सामने आई है, जब सरकारें सार्वजनिक रूप से वित्तपोषित स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार कर रही है।

EAC-PM (प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद) की सदस्य शमिका रवि और उनके सहयोगी पार्थ प्रोतिम बर्मन के इंडियन एक्सप्रेस में छपे एक हालिया लेख में इस पर और विस्तार से जानकारी दी गई है।

इसी साल जनवरी में प्रकाशित हुए विश्लेषण में इस बात पर जोर दिया गया है कि गुटखा का इस्तेमाल सभी तरह के लोगों में एक आम बात हो गई है। खासकर देश के उत्तरी राज्यों में ऐसा है। हालांकि, दक्षिणी राज्यों में भी इसके इस्तेमाल में चिंताजनक बढ़ोतरी देखी जा रही है।

तंबाकू के सेवन में चिंताजनक वृद्धि

सर्वे के अनुसार 2011-12 और 2023-24 के बीच तंबाकू पर प्रति व्यक्ति खर्च ग्रामीण भारत में 58 प्रतिशत और शहरी इलाकों में 77 प्रतिशत बढ़ गया। अब ग्रामीण इलाकों में तंबाकू मासिक प्रति व्यक्ति उपभोग खर्च (MPCE) का लगभग 1.5 प्रतिशत और शहरी इलाकों में 1 प्रतिशत है।

ये आंकड़े देखने में मामूली लग सकते हैं लेकिन तंबाकू का सेवन करने वाले परिवारों की संख्या में बढ़ोतरी चिंताजनक है। ग्रामीण भारत में, तंबाकू का सेवन करने वाले परिवार 9.9 करोड़ (सभी परिवारों का 59.3 प्रतिशत) से बढ़कर 13.3 करोड़ (68.6 प्रतिशत) हो गए हैं। इस तरह केवल एक दशक में 33 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

वहीं, शहरी भारत में यह वृद्धि 59 प्रतिशत की है। शहरों में तंबाकू का सेवन करने वाले परिवार 2.8 करोड़ (34.9 प्रतिशत) से बढ़कर 4.7 करोड़ (45.6 प्रतिशत) हो गए हैं।

गुटखा का सेवन तेजी से बढ़ रहा

रिपोर्ट के अनुसार ग्रामीण इलाकों में मुख्य रूप से गुटखा और पत्ते वाले तंबाकू के इस्तेमाल में तेजी आई है। वहीं, शहरों में सिगरेट की खपत तेजी से बढ़ी है, लेकिन गुटखा भी बहुत पीछे नहीं है। सर्वे का सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा ग्रामीण इलाकों में गुटखा के इस्तेमाल से जुड़ा है। ग्रामीण परिवारों में गुटखा का इस्तेमाल छह गुना तक बढ़ गया है। यह 5.3 प्रतिशत से बढ़कर 30.4 प्रतिशत परिवारों तक फैल गया है।

सर्वे के मुताबिक आज की तारीख में ग्रामीण इलाकों में तंबाकू पर होने वाले कुल खर्च का 41 प्रतिशत गुटखा पर खर्च हो रहा है। शहरी भारत में सिगरेट सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला तंबाकू प्रोडक्ट है, जिसका इस्तेमाल 18.1 प्रतिशत शहरी परिवार करते हैं। वहीं, अब लगभग 16.8 प्रतिशत शहरी परिवार गुटखा का भी इस्तेमाल करते हैं।

किन राज्यों में गुटखा का सबसे ज्यादा इस्तेमाल?

सर्वे बताती है कि गुटखा का सेवन मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में सबसे ज्यादा होता है। ग्रामीण मध्य प्रदेश में 10 में से छह से ज्यादा घरों में गुटखा खाया जाता है। ऐसे ही उत्तर प्रदेश में भी यह आंकड़ा 50 प्रतिशत पार कर गया है। हैरान करने वाली बात ये है कि शहरी पैटर्न भी ग्रामीण पैटर्न जैसे होने लगे हैं।

मध्य प्रदेश के लगभग आधे शहरी घरों में गुटखा खाया जाता है, जबकि यूपी, बिहार और राजस्थान में यह दर एक-तिहाई से काफी ज्यादा है। पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में भी ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में गुटखा का सेवन राष्ट्रीय औसत से ज्यादा दर्ज किया गया है। दक्षिणी राज्यों में कुल मिलाकर इसका चलन कम है, लेकिन यहाँ भी आंकड़े कम परेशान करने वाले नहीं हैं। उदाहरण के तौर पर कर्नाटक में हर चार ग्रामीण घरों में से एक में गुटखा खाया जाता है।

गरीब परिवारों में तंबाकू का तेजी से बढ़ा इस्तेमाल

सर्वे के अनुसार भारत में तंबाकू का इस्तेमाल तेजी से गरीब परिवारों में बढ़ रहा है। ग्रामीण इलाकों में आय के मामले के सबसे निचले 40 प्रतिशत परिवारों में से 70% से ज्यादा लोग तंबाकू का सेवन करते हैं। यूपी, मध्य प्रदेश और बिहार में यह आंकड़ा 85% से ज्यादा है।

गरीब ग्रामीण परिवार अपने प्रति व्यक्ति मासिक उपभोग व्यय (MPCE) का अधिक हिस्सा (1.7 प्रतिशत) तंबाकू पर खर्च करते हैं, जबकि शीर्ष 20 प्रतिशत आय वर्ग के परिवारों में यह हिस्सा 1.2 प्रतिशत है। शहरों में निचले 40 प्रतिशत आय वर्ग के आधे से अधिक परिवार तंबाकू का सेवन करते हैं, जबकि शीर्ष 20 प्रतिशत आय वर्ग में इसका उपयोग 37 प्रतिशत से कम है।

सर्वे के अनुसार गरीब लोग अमीरों की तुलना में अपनी MPCE का लगभग दोगुना हिस्सा तंबाकू पर खर्च करते हैं। ग्रामीण और शहरी दोनों जगहों पर तंबाकू का सेवन सबसे गरीब लोगों में सबसे ज्यादा और सबसे अमीर लोगों में सबसे कम है।

विनीत कुमार
विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
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