Friday, March 20, 2026
Homeभारतरूस-यूक्रेन युद्ध में फंसा गुजरात का छात्र, पीएम मोदी से मांगी मदद,...

रूस-यूक्रेन युद्ध में फंसा गुजरात का छात्र, पीएम मोदी से मांगी मदद, कहा- घर आना चाहता हूं

यूक्रेन में पकड़े गए गुजरात के 23 वर्षीय छात्र साहिल मोहम्मद हुसैन मजोठी ने भारत सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सुरक्षित स्वदेश वापसी की अपील की है। साहिल को रूसी सेना की ओर से लड़ते हुए यूक्रेनी बलों ने पकड़ा था। यूक्रेनी अधिकारियों द्वारा साझा किए गए वीडियो संदेशों में साहिल ने रूस जाने वाले भारतीय युवाओं को ठगी और फर्जी मामलों से सावधान रहने की चेतावनी भी दी है।

साहिल ने यूक्रेन की सैन्य हिरासत से एक वीडियो संदेश जारी कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से अपनी रिहाई की गुहार लगाई है। साहिल को रूसी सेना की ओर से लड़ते हुए यूक्रेनी बलों ने पकड़ा था और अब वह खुद को एक ‘युद्ध अपराधी’ के रूप में फंसा हुआ महसूस कर रहा है।

साहिल मोरबी जिले का रहने वाला है और 10 जनवरी 2024 को छात्र वीजा पर रूस के सेंट पीटर्सबर्ग गया था। वहां उसने आईटीएमओ यूनिवर्सिटी में रूसी भाषा और संस्कृति का कोर्स जॉइन किया था।

रूस में क्या हुआ साहिल के साथ

परिवार के अनुसार, पढ़ाई के साथ-साथ साहिल एक कूरियर कंपनी में पार्ट-टाइम काम भी कर रहे थे, ताकि अपने खर्च पूरे कर सकें। इसी दौरान वह कानूनी मुश्किलों में फंस गए। साहिल का आरोप है कि रूसी पुलिस ने उन्हें झूठे नशीले पदार्थों के मामले में फंसा दिया और सात साल की सजा सुनाई गई। उन्होंने दावा किया कि जेल से बचने के बदले उन्हें रूसी सेना में शामिल होने के लिए मजबूर किया गया।

यूक्रेन की हिरासत से भेजे गए दो वीडियो संदेशों में, एक अंग्रेजी और दूसरा हिंदी में, साहिल ने अपनी स्थिति को बेहद गंभीर बताया। एक वीडियो में वह कहता है, “इस वक्त मैं यूक्रेन में युद्ध अपराधी के तौर पर फंसा हुआ हूं। मुझे नहीं पता आगे क्या होगा।” वह यह भी कहता है कि जो लोग रूस पढ़ाई या काम के लिए आना चाहते हैं, वे बहुत सावधान रहें। यहां बहुत सारे स्कैमर्स हैं। आपराधिक या ड्रग्स जैसे मामलों में फंसाया जा सकता है।

अंग्रेजी वीडियो में साहिल ने कहा कि रूसी जेल में रहते हुए उसने युद्ध में जाने का अनुबंध साइन किया था। वह कहता है कि वह मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती थी। उसने दावा किया कि उसे केवल 15 दिन का प्रशिक्षण देकर सीधे युद्ध क्षेत्र में भेज दिया गया। साहिल के मुताबिक, मोर्चे पर पहुंचते ही उसने यूक्रेनी बलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया।

साहिल ने भारतीय सरकार से मदद मांगी है। उसने कहा, “मैं भारत सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से अनुरोध करता हूं कि मेरी मदद करें।” एक अन्य वीडियो में कहा कि हाल ही में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत आए थे और भारत सरकार को रूस से बात कर उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करनी चाहिए।

यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, ये वीडियो “I Want to Live” नामक पहल के तहत साझा किए गए हैं। यह यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय और रक्षा खुफिया एजेंसी के सहयोग से शुरू किया गया एक सरकारी प्रोजेक्ट है, जिसका उद्देश्य रूसी सशस्त्र बलों के उन सैनिकों से संपर्क करना है, जो स्वेच्छा से आत्मसमर्पण करना चाहते हैं।

साहिल ने यह भी बताया कि यूक्रेनी सैनिकों ने उनकी मां से संपर्क किया और भारत में इस तरह के मामलों के प्रति जागरूकता फैलाने को कहा। इसके बाद साहिल की मां ने दिल्ली की एक अदालत में बेटे की सुरक्षित वापसी के लिए याचिका दाखिल की है, जिस पर अगली सुनवाई फरवरी में होनी है।

साहिल की माँ ने कई खुलासे किए थे

अक्टूबर में साहिल की माँ हसीना माजोटी ने आईएएनएस से बात करते हुए कई बातों का खुलासा किया था। उन्होंने कहा था कि भारतीय दूतावास ने रूस में रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए पहले ही एक चेतावनी जारी की थी, जिसमें साफ कहा गया था कि रूसी सेना चाहे कितनी भी बार आग्रह करे या किसी भी बहाने से दबाव बनाए, उसमें शामिल न हों।

उन्होंने कहा था, “यह संदेश अपने बेटे तक पहुंचाने के लिए मैंने उसे एक पत्र लिखा था। यह पत्र मैंने भारतीय दूतावास को भेजा, लेकिन वह साहिल तक नहीं पहुंच सका। इसके बाद मैंने अपने वकील के जरिए भी पत्र भेजने की कोशिश की, लेकिन तब भी वह उसे नहीं मिल पाया। साहिल को इस तरह की किसी भी एडवाइजरी की जानकारी ही नहीं थी।”

हसीना माजोटी ने कहा कि रूसी अदालत से साहिल को परिवार से बात करने की कानूनी अनुमति मिली हुई है, लेकिन इसके बावजूद पिछले 19 महीनों से उसे उनसे बात नहीं करने दी गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि रूस से किसी व्यक्ति ने संपर्क कर दावा किया था कि वह एक करोड़ रुपये के बदले साहिल की रिहाई करा सकता है। हसीना माजोटी ने कहा था, हमारे पास इतनी बड़ी रकम नहीं थी, इसलिए हमने इनकार कर दिया। बाद में हमने भारत और रूस, दोनों जगह शिकायत दर्ज कराई और वह व्यक्ति ठग निकला।

माजोटी के मुताबिक, रूसी सरकार की ओर से साहिल को नागरिकता का प्रस्ताव भी मिला था, जिसे उसने ठुकरा दिया था। इसके बाद उस पर रूसी सेना में शामिल होने का दबाव बनाया गया।

सरकार क्या कर रही

इस बीच, भारत सरकार ने भी ऐसे मामलों पर सक्रियता दिखाई है। 5 दिसंबर को विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा था कि भारत रूसी सशस्त्र बलों में शामिल हुए भारतीय नागरिकों की वापसी के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह मुद्दा राष्ट्रपति पुतिन के साथ बातचीत में उठाया है। मिस्री ने भारतीय नागरिकों से अपील की कि वे रूसी सेना में शामिल होने से जुड़े किसी भी प्रस्ताव को स्वीकार करने से पहले अत्यधिक सावधानी बरतें।

अनिल शर्मा
अनिल शर्माhttp://bolebharat.in
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments