राजकोटः गुजरात के राजकोट में मंगलवार (24 फरवरी) को नगर निगम द्वारा अजी नदी पर के किनारे बसी अवैध बस्तियों को हटाने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाया गया। इस अभियान के तहत 1,300 घरों को ध्वस्त कर दिया गया।
समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, यह अभियान राजकोट नगर निगम का अब तक सबसे बड़ा अभियान है। इसे कड़ी सुरक्षा के बीच अंजाम दिया गया। इस दौरान इलाके में 2,500 से अधिक पुलिस बल की तैनाती की गई थी।
1,500 संपत्तियों को जारी किया गया था नोटिस
उप नगर आयुक्त महेश जानी के मुताबिक, करीब 1,500 संपत्तियों को नोटिस जारी किया गया था। इनमें से नदी किनारे 681 घर शामिल थे। नगर निगम के प्रमुख अधिकारी तुषार सुमेरा के मुताबिक, दोपहर दो बजे तक राजकोट नगर निगम ने इनमें से 1,350 मकानों को ध्वस्त कर दिया है।
पीटीआई की खबर के मुताबिक, इस दौरान स्थानीय पुलिस, सर्विलांस टीम, ड्रोन सर्विलांस यूनिट, विशेष अभियान समूह कर्मी, त्वरित प्रतिक्रिया दल (क्यूआरटी) और राज्य आरक्षित पुलिस बल घटनास्थल पर मौजूद रहे।
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नदी के किनारे स्थित जांगलेश्वर का 2.5 किलोमीटर का क्षेत्र विध्वंस अभियान के अंतर्गत आएगा। इसमें कुल 1,400 से अधिक अवैध बस्तियां स्थित हैं।
आवास योजना के तहत विस्थापितों को किया जाएगा समायोजित
उप नगर आयुक्त महेश जानी ने कहा कि नगरपालिका अवैध बस्तियों को हटाने के लिए दृढ़ संकल्पित है और विस्थापित परिवारों को आवास योजना के तहत समायोजित किया जाएगा। जानी ने कहा कि योजना के अनुसार एक सप्ताह के भीतर वहां एक नई सड़क का निर्माण किया जाएगा।
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक बहुमंजिला इमारतों और आलीशान बंगलों की मौजूदगी के कारण ध्वस्तीकरण में कुछ समय लग रहा है, जिन्हें भी गिराया जा रहा है। इसके लिए क्षेत्र को सात जोन में विभाजित किया गया था और इस अभियान में प्रथम श्रेणी के अधिकारियों और तकनीकी टीमों को तैनात किया गया था।
इसके लिए जेसीबी, ट्रैक्टर, ब्रेकर और डंपर समेत 260 से अधिक मशीनों का इस्तेमाल किया गया। आलीशान बंगलों को ध्वस्त करने के लिए 65 से अधिक मिट्टी खोदने वाली मशीनों और अतिरिक्त-बड़े हाइड्रोलिक उत्खनन यंत्रों को तैनात किया गया है।
पीटीआई ने जानी के हवाले से लिखा कि इस अभियान के दौरान शांति बहाल रही और स्थानीय लोगों का सहयोग मिला।

