नई दिल्ली: संस्कृति मंत्रालय ने पहली बार अपनी ओर से आधिकारिक टिप्पणी जारी करते हुए बुधवार को कहा कि कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने 2008 में पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के ‘सभी निजी पारिवारिक पत्र और नोट्स’ प्रधानमंत्री संग्रहालय एवं पुस्तकालय (तब नेहरू मेमोरियल संग्रहालय और पुस्तकालय) से ले लिए थे। सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट में संस्कृति मंत्रालय ने ये भी बताया कि प्रधानमंत्री संग्रहालय एवं पुस्तकालय (PMML) उन दस्तावेजों को वापस लेने के लिए सोनिया गांधी से संपर्क में है।
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र शेखावत ने बुधवार को कहा कि सोनिया गांधी ने लिखित में स्वीकार किया है कि ‘ये कागजात उनके पास हैं’ और इस मुद्दे पर ‘सहयोग’ करने का वादा किया है। शेखावत ने कहा कि ये महज निजी पारिवारिक कागजात नहीं हैं, बल्कि ये देश के राष्ट्रीय ऐतिहासिक रिकॉर्ड का हिस्सा हैं।
2008 में सोनिया गांधी ने ले लिए थे ये दस्तावेज!
इससे एक दिन पहले ऐसी खबरें आई थी कि सोनिया गांधी ने देश के पहले प्रधानमंत्री के निजी दस्तावेजों को हासिल करने की कोशिश में PMML को अपने सहयोग का भरोसा दिलाया है। असल में यह पहली बार है जब सोनिया ने PMML के किसी पत्र का जवाब दिया है। इससे पहले सोनिया पर आरोप लगे थे कि 2008 में इन दस्तावेजों का एक बड़ा हिस्सा, जो 51 कार्टन में था, वह अपने साथ ले गई थीं। सूत्रों के अनुसार सोनिया गांधी ने कहा है कि ‘उनका स्टाफ इस मामले को देखेगा।’
कांग्रेस संचार प्रभारी जयराम रमेश के मंगलवार को एक्स पर एक पोस्ट का जवाब देते हुए शेखावत ने कहा कि ‘आपके लिए यह ज्यादा सही होगा कि आप सोनिया गांधी से आग्रह करें कि वे अपना वादा निभाएं और ये कागजात PMML को लौटा दें’ ताकि विद्वान, नागरिक और संसद इन महत्वपूर्ण ऐतिहासिक रिकॉर्ड तक पहुंच सकें और ‘नेहरूवादी’ समय की सच्चाई का निष्पक्ष रूप से आकलन किया जा सके। दरअसल, जयराम रमेश ने अपने पोस्ट में सरकार से पहले के इस दावे के लिए माफी मांगने को कहा था कि कागजात गायब हैं।
शेखावत ने कहा कि नेहरू से जुड़े कोई भी दस्तावेज प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय से लापता नहीं हैं। उन्होंने कहा कि लापता होने का मतलब मौजूदगी का स्थान अज्ञात होना होता है, लेकिन इस विषय में तो पता है कि पेपर्स कहां और किसके अधिकार में हैं।
बता दें कि PMML संस्कृति मंत्रालय के तहत एक ऑटोनॉमस संस्था है। उसने इस साल सोनिया गांधी को दो बार पत्र लिखकर इन कागजात के साथ-साथ नेहरू से जुड़े किसी भी दूसरे लेटर तक पहुंच मांगी थी, जो उनके पास हो सकते हैं।
हालांकि इस मामले पर संगठन की पिछली दो सालाना आम बैठकों (2024 और 2025) में बड़े पैमाने पर चर्चा हुई थी, लेकिन यह पहली बार है कि सरकार ने इस मामले पर आधिकारिक तौर पर कुछ कहा है।
संस्कृति मंत्रालय ने अपने पोस्ट में क्या कुछ कहा?
मंत्रालय ने एक्स पर अपने पोस्ट में कहा, ‘29.04.2008 के पत्र के जरिए श्रीमती सोनिया गांधी के प्रतिनिधि श्री एम वी राजन ने अनुरोध किया था कि श्रीमती गांधी पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के सभी निजी पारिवारिक पत्र और नोट्स वापस लेना चाहती हैं।’
इसमें कहा गया है, ‘इसी के तहत, 2008 में नेहरू पेपर्स के 51 कार्टन सोनिया गांधी को भेजे गए थे। PMML तब से इन पेपर्स को वापस लेने के लिए सोनिया गांधी के ऑफिस के साथ लगातार संपर्क में है, जिसमें PMML की ओर से सोनिया गांधी को 28-01-2025 और 03-07-2025 को लिखे गए पत्र भी शामिल हैं।’
इसमें आगे कहा गया है, ‘ये दस्तावेज, जो भारत के पहले प्रधानमंत्री से जुड़े हैं, देश की दस्तावेजी विरासत का हिस्सा हैं, न कि कोई निजी संपत्ति। इनका PMML के पास होना और नागरिकों और विद्वानों को रिसर्च के लिए इनकी एक्सेस मिलना बहुत जरूरी है।’
PMML के रिकॉर्ड के अनुसार इन दस्तावेजों में नेहरू और जयप्रकाश नारायण, एडविना माउंटबेटन, अल्बर्ट आइंस्टीन, अरुणा आसफ अली, विजया लक्ष्मी पंडित और जगजीवन राम के बीच हुए पत्रों का आदान-प्रदान शामिल है। शेखावत ने इस मामले पर सोनिया से भी स्पष्टीकरण मांगा और पूछा कि गांधी परिवार इन कागजात को अपने पास रखकर क्या छिपा रहा है।
मंत्री ने कहा कि PMML की ओर से कई बार याद दिलाने के बावजूद ये कागजात वापस क्यों नहीं किए गए। देश को इस बारे में स्पष्ट तौर पर जानने का हक है।
उन्होंने कहा, ‘एक तरफ, हमसे उस दौर की गलतियों पर बहस न करने के लिए कहा जा रहा है… दूसरी तरफ, प्राइमरी सोर्स मटेरियल जो जानकारी से भरी बहस को संभव बना सकता है, उसे आम लोगों की पहुंच से दूर रखा गया है। यह कोई मामूली बात नहीं है। इतिहास को चुनिंदा तरीके से नहीं दिखाया जा सकता।’

