Gold Price Today: सोने की ‘चमक’ ने वैश्विक बाजार में उथल-पुथल मचा दी है। सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने (Gold) की कीमतों ने सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए पहली बार 5,092.71 डॉलर प्रति औंस (भारतीय बाजार के अनुसार लगभग 1.58 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम) का जादुई आंकड़ा पार कर लिया है। सोने के साथ-साथ चांदी (Silver) में भी जबरदस्त तेजी देखी जा रही है, जो 108 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर कारोबार कर रही है।
पिछले एक हफ्ते से सोना लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है और 2026 की शुरुआत से अब तक इसमें 18 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी दर्ज की जा चुकी है। इससे पहले 2025 में सोने ने 64 प्रतिशत की जबरदस्त छलांग लगाई थी, जो 1979 के बाद इसकी सबसे मजबूत वार्षिक बढ़त मानी जा रही है।
चांदी ने भी बाजार को चौंकाते हुए 108 डॉलर प्रति औंस का स्तर पार कर लिया है। बीते शुक्रवार को चांदी पहली बार 100 डॉलर प्रति औंस से ऊपर गई थी। 2025 में चांदी में 147 प्रतिशत की भारी तेजी दर्ज की गई थी, जिसकी वजह खुदरा निवेशकों की मजबूत खरीद और फिजिकल मार्केट में लंबे समय से बनी सप्लाई की तंगी रही।
क्यों तेजी से बढ़ रही हैं कीमतें?
ब्लूमबर्ग के मुताबिक, इसकी बड़ी वजह तथाकथित डिबेसमेंट ट्रेड है, जिसमें निवेशक मुद्राओं और सरकारी बॉन्ड से निकलकर वास्तविक संपत्तियों जैसे सोने में निवेश बढ़ा रहे हैं। पिछले हफ्ते जापान के बॉन्ड बाजार में आई भारी बिकवाली को भी इसी बदलाव का बड़ा संकेत माना जा रहा है, जो यह दर्शाता है कि निवेशक भारी सरकारी खर्च और बढ़ते कर्ज से चिंतित हैं।
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा तेजी केवल भू-राजनीतिक तनाव का नतीजा नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरे आर्थिक कारण भी उतने ही अहम हैं। अमेरिका और नाटो के बीच ग्रीनलैंड को लेकर बढ़ता तनाव, यूक्रेन और गाजा युद्ध, वेनेजुएला को लेकर अमेरिकी रुख और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक विदेश व व्यापार नीतियों ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ाई है। वहीं, दूसरी ओर केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीद, कमजोर डॉलर, नरम मौद्रिक नीतियों की उम्मीद और वैश्विक स्तर पर नकदी की भरमार ने सोने-चांदी की मांग को मजबूत आधार दिया है।
विश्लेषकों का कहना है कि यह तेजी अफवाहों या सट्टेबाजी का नतीजा नहीं, बल्कि मजबूत लॉन्ग टर्म फैक्टर्स से प्रेरित है। एनरिच मनी के सीईओ पोनमुदी आर. के मुताबिक सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग, केंद्रीय बैंकों की खरीद और नरम मौद्रिक नीतियों की संभावनाओं ने कीमतों को स्थायी मजबूती दी है। पहले जिन स्तरों पर रेजिस्टेंस देखने को मिलता था, अब वहीं मजबूत डिमांड बन रही है, जिससे बाजार की धारणा और मजबूत हुई है।
रॉयटर्स से बात करते हुए कैपिटल डॉट कॉम के वरिष्ठ मार्केट विश्लेषक काइल रोडा ने भी कहा कि निवेशकों का सोने की तरफ झुकाव बढ़ रहा। उन्होंने कहा, मौजूदा तेजी दरअसल अमेरिकी प्रशासन और अमेरिकी परिसंपत्तियों पर भरोसे के संकट को दर्शाती है, जो हालिया अस्थिर फैसलों के चलते और गहरा गया है। उन्होंने कहा कि निवेशक इस अनिश्चितता से बचने के लिए सुरक्षित ठिकाने तलाश रहे हैं और सोना इसका सबसे बड़ा लाभार्थी बन रहा है।
वैश्विक कर्ज संकट की आहट!
ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन के वरिष्ठ फेलो रॉबिन ब्रूक्स ने इस तेजी को शानदार लेकिन डराने वाली बताया है। उन्होंने कहा कि दुनिया एक वैश्विक ऋण संकट के मुहाने पर खड़ी है। जहां सरकारें बढ़ते कर्ज के बोझ को महंगाई के जरिए कम करने की कोशिश कर सकती हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर डॉलर कमजोर होता रहा, तो सोने की कीमतों में और तेज उछाल देखने को मिल सकता है, क्योंकि इससे गैर-डॉलर देशों की खरीद क्षमता बढ़ जाती है।
बड़े निवेश बैंक भविष्य को लेकर बेहद तेज अनुमान जता रहे हैं। गोल्डमैन सैक्स ने 2026 के अंत तक सोने का लक्ष्य बढ़ाकर 5,400 डॉलर प्रति औंस कर दिया है। बैंक ऑफ अमेरिका का मानना है कि मौजूदा हालात बने रहने पर 2026 की वसंत ऋतु तक सोना 6,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है। वहीं जेपी मॉर्गन का कहना है कि केंद्रीय बैंकों और निजी निवेशकों की मजबूत मांग लंबी अवधि में भी सोने को 6,000 डॉलर के स्तर तक ले जा सकती है।

