Friday, March 20, 2026
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Goa NightCub Fire: सिर्फ 2 एग्जिट गेट, लकड़ी के फर्नीचर, रिपोर्ट में तेजी से आग फैलने और 25 लोगों की मौत की क्या वजह सामने आई?

Goa NightCub Fire: रिपोर्ट के मुताबिक रात 11:45 बजे मैपसा फायर कंट्रोल रूम को आग की सूचना मिली। टीम मौके पर पहुंची तो करीब 300 वर्गमीटर क्षेत्र में बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर पूरी तरह लपटों में घिरे हुए थे। आग इतनी फैल चुकी थी कि उसे बुझाने में लगभग पांच घंटे लगे। तड़के 4:45 बजे आग पूरी तरह काबू में लाई जा सकी।

Goa NightCub Fire: गोवा के अर्पोरा गांव में शनिवार आधी रात नाइटक्लब Birch by Romeo Lane में लगी भीषण आग पर तैयार की गई शुरुआती तकनीकी रिपोर्ट ने कई गंभीर खामियां सामने आई हैं। इस हादसे में 25 लोगों की मौत हुई है, जबकि छह लोग घायल हुए।

रिपोर्ट के मुताबिक रात 11:45 बजे मैपसा फायर कंट्रोल रूम को आग की सूचना मिली थी। फायरब्रिगेड टीम मौके पर पहुंची तो करीब 300 वर्गमीटर क्षेत्र में बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर पूरी तरह लपटों में घिरे हुए थे। आग इतनी फैल चुकी थी कि उसे बुझाने में लगभग पांच घंटे लगे। तड़के 4:45 बजे आग पूरी तरह काबू में लाई जा सकी।

पोस्टमॉर्टम के लिए भेजे गए 17 शवों की जांच पूरी हो चुकी है। छह शव परिजनों को सौंप दिए गए हैं और बाकी की पहचान की जा रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक जांच में सामने आया कि क्लब में केवल दो एग्जिट गेट थे और अंदर लकड़ी के ढांचे तथा फर्नीचर की वजह से आग तेजी से फैल गई। रिपोर्ट के अनुसार, अंदर लकड़ी के पैनल, पार्टिशन, सजावट, प्लास्टिक फर्नीचर और भारी मात्रा में ज्वलनशील सामग्री मौजूद थी जो आग को भड़काने में सहायक बनीं।

पुलिस और फायर विभाग के अनुसार, आग किसी धमाके की वजह से नहीं लगी, बल्कि ज्वलनशील अंदरूनी सामान की वजह से तेजी से फैली। फायर टीम को शुरुआती जांच में मुख्य स्टेज के ऊपर लगे इलेक्ट्रिकल सिस्टम में शॉर्ट-सर्किट की आशंका मिली है। इसके अलावा उस समय क्लब के बाहरी हिस्से में पटाखे जलाए जाने के संकेत भी मिले हैं, जिसने आग को और बढ़ाया होगा।

फायर विभाग ने कहा है कि रिकॉर्ड के अनुसार क्लब के पास कोई वैध फायर एनओसी नहीं था। यह सीधे तौर पर गंभीर नियम उल्लंघन है।

दम घुटने से हुई ज्यादातर मौतें

अधिकारियों ने बताया कि 25 मृतकों में से 23 के शरीर पर जलने के निशान नहीं मिले। इसका मतलब है कि उनकी मौत आग की लपटों से नहीं, बल्कि बेसमेंट किचन एरिया में ऑक्सीजन की कमी और जहरीले धुएं के कारण दम घुटने से हुई। दो शव ही बुरी तरह झुलसे मिले हैं।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, फायर विभाग की तकनीकी रिपोर्ट में कहा गया है कि आग ने सबसे खतरनाक रूप तब लिया जब वह तेजी से बेसमेंट में फैल गई। वहां वेंटिलेशन बेहद खराब था, धुआं बाहर निकलने का रास्ता नहीं था और एग्जिट पाथ भी अवरुद्ध पाए गए।

रिपोर्ट में कहा गया कि बेसमेंट जैसे बंद स्थानों में कार्बन मोनोऑक्साइड, हाइड्रोजन सायनाइड और कार्बन डाइऑक्साइड जैसे जहरीले धुएं तुरंत जमा हो जाते हैं, जिससे कुछ ही मिनटों में लोग बेहोश हो जाते हैं और उनकी जान चली जाती है। यही वजह रही कि इतने बड़े पैमाने पर जानें गईं।

नाइट क्लब, रेस्टोरेंट, बार और इवेंट वेन्यू के लिए एडवाइजरी जारी

गोवा नाइटक्लब हादसे के बाद राज्य सरकार ने सभी नाइट क्लब, रेस्टोरेंट, बार, इवेंट वेन्यू और इसी तरह संचालित होने वाली जगहों के लिए सख्त एडवाइजरी जारी की है। स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी ने कहा है कि अब हर प्रतिष्ठान को फायर सेफ्टी, इलेक्ट्रिकल सेफ्टी, इमरजेंसी तैयारी और स्ट्रक्चरल सेफ्टी के मानकों का बिना किसी चूक पालन करना होगा।

एडवाइजरी उस वीडियो के सामने आने के बाद जारी की गई है, जिसमें दिखा कि स्टेज पर प्रदर्शन के दौरान अचानक आग भड़क गई और कुछ ही सेकंड में पूरी जगह लपटों में घिर गई। भगदड़ में 25 लोगों की जान चली गई। प्रशासन ने कहा कि यह घटना साफ तौर पर दर्शाती है कि सुरक्षा मानकों को हल्के में लेना घातक हो सकता है।

क्या-क्या निर्देश दिए गए

अथॉरिटी ने सभी प्रतिष्ठानों से कहा है कि उनके पास वैध फायर NOC हो और फायर सर्विस विभाग के सभी नियम लागू हों। निर्धारित ऑक्यूपेंसी लिमिट और अधिकतम क्षमता का सख्ती से पालन करने और भीड़ को नियंत्रित रखने के निर्देश दिए गए हैं।

सभी जगहों पर यह अनिवार्य किया गया है कि स्मोक और हीट डिटेक्टर, अलार्म सिस्टम, स्प्रिंकलर, हाइड्रेंट, होज रील और फायर एक्सटिंग्विशर पूरी तरह काम कर रहे हों। इलेक्ट्रिकल वायरिंग केवल सर्टिफाइड तकनीशियन द्वारा की गई हो और कहीं भी ओवरलोड या अस्थायी कनेक्शन न लगे हों।

एडवाइजरी में कहा गया है कि सभी इमरजेंसी एग्जिट खुले और साफ हों, उन पर रोशनी वाले एग्जिट साइन, इवैक्युएशन मैप और इमरजेंसी लाइटिंग लगी हो। हर शिफ्ट में एक फायर सेफ्टी ऑफिसर तैनात किया जाए और समय-समय पर दस्तावेज तैयार इवैक्युएशन ड्रिल कराई जाए।

स्टाफ को उन तरीकों की ट्रेनिंग भी दी जाए, जिनसे किसी आपात स्थिति में जान बचाई जा सके। उदाहरण के तौर पर, अगर किसी ऊंची जगह पर फंस जाएं तो बेडशीट जोड़कर अस्थायी रस्सी या सीढ़ी बनाकर नीचे उतरने जैसे उपायों की जानकारी दी जाए।

सभी प्रतिष्ठानों को सात दिनों के भीतर एक विस्तृत आंतरिक सुरक्षा ऑडिट कराना होगा। यह रिपोर्ट जिला प्रशासन, फायर सर्विस या राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा निरीक्षण के समय प्रस्तुत करनी होगी।

अथॉरिटी ने चेतावनी दी है कि नियमों की अनदेखी पर सख्त दंड दिया जाएगा। इसमें लाइसेंस रद्द या निलंबित करना और कानूनी कार्रवाई शामिल है।

चार गिरफ्तार, मालिक फरार

पुलिस ने अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें गेट मैनेजर ठाकुर शामिल है। क्लब के मालिक सौरभ लुथरा और गौरव लुथरा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और दोनों के लिए गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया गया है।
पुलिस टीम दिल्ली भेजी गई है क्योंकि मालिक वहीं के रहने वाले बताए जाते हैं और दोनों फिलहाल फरार हैं।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि ट्रेड लाइसेंस और अन्य अनुमति देने वाले अधिकारियों को सस्पेंड किया जाएगा और उनके खिलाफ पुलिस जांच शुरू होगी। यह कदम बढ़ते सवालों और साफ-साफ दिख रही नियामकीय चूक को देखते हुए उठाया जा रहा है।

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दिल्ली के 4 लोगों की मौत, झारखंड के भी तीन शामिल

इस हादसे में दिल्ली के एक ही परिवार के 4 लोगों की मौत हुई है। परिवार छुट्टियां मनाने के लिए गोवा गया था। इसके अलावा प्रभावितों में झारखंड के तीन लोग शामिल हैं। झारखंड के तीन मृतकों के शवों को गोवा सरकार ने विशेष विमान से रांची भेजा, ताकि उन्हें जल्द से जल्द उनके परिवारों को सौंपा जा सके। मीडिया रिपोर्ट्स और स्थानीय सूचनाओं के अनुसार, इस घटना में उत्तराखंड के कुछ नागरिकों के संभावित रूप से प्रभावित होने की भी आशंका जताई गई है।

इसे गंभीरता से लेते हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तुरंत गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत से फोन पर बातचीत करके घटना के बारे में विस्तृत जानकारी ली। गोवा सरकार से अनुरोध किया कि यदि किसी भी प्रभावित व्यक्ति की पहचान उत्तराखंड निवासी के रूप में होती है, तो उनके परिजनों से तुरंत संपर्क किया जाए और आवश्यक सहायता सुनिश्चित की जाए।

अनिल शर्मा
अनिल शर्माhttp://bolebharat.in
दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में उच्च शिक्षा। 2015 में 'लाइव इंडिया' से इस पेशे में कदम रखा। इसके बाद जनसत्ता और लोकमत जैसे मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला। अब 'बोले भारत' के साथ सफर जारी है...
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