नई दिल्ली: इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में प्रदर्शित एक रोबोट डॉग को लेकर उठा विवाद अब और गहरा गया है। चीनी कंपनी के बनाए गए इस रोबोट को कथित रूप से संस्थान की उपलब्धि बताने के आरोप के बाद अधिकारियों द्वारा विश्वविद्यालय को समिट एक्सपो क्षेत्र खाली करने को कहे जाने की खबरें सामने आईं। हालांकि विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों ने ऐसे किसी निर्देश की जानकारी से इनकार करते हुए कहा है कि मशीन को कभी उनकी अपनी तकनीक के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया।
विवाद की शुरुआत एक वायरल वीडियो से हुई, जिसमें विश्वविद्यालय की प्रोफेसर नेहा सिंह ने “ओरियन” नाम से रोबोडॉग का परिचय देते हुए इसे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से विकसित बताया था और इसके निगरानी तथा मॉनिटरिंग जैसे उपयोगों का जिक्र किया था। वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने दावा किया कि यह मशीन चीन की रोबोटिक्स कंपनी द्वारा निर्मित व्यावसायिक उत्पाद है। इसके बाद आलोचना तेज हुई और समिट में विश्वविद्यालय के स्टॉल से रोबोडॉग को हटा लिया गया।
प्रोफेसर ने सफाई में क्या कहा?
विवाद के बीच प्रोफेसर नेहा सिंह ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि “मैं रोबोट की क्षमताओं, उसकी विशेषताओं और उससे जुड़े पहलुओं की जानकारी दे रही थी। इसी दौरान संदेश कहीं थोड़ा भटक गया और बाद में कई बातें विवाद का कारण बन गईं। इसका उद्देश्य केवल छात्रों को इस तकनीक का अध्ययन कराना और आगे इसे विकसित करने के लिए प्रेरित करना था, ताकि वे देश के तकनीकी विकास में योगदान दे सकें। दुर्भाग्य से उत्साह और माहौल के बीच कुछ बातें गलत ढंग से प्रस्तुत हुईं और शब्दों की गलत व्याख्या हुई, जिससे यह विवाद खड़ा हुआ। हमें इसका खेद है और इस बात का अफसोस है कि यह घटना एआई समिट जैसे मंच पर हुई, जहां हमारे छात्रों के काम को प्रदर्शित करना उद्देश्य था।”
प्रोफेसर ने कहा कि उन्होंने कभी यह दावा नहीं किया कि रोबोडॉग विश्वविद्यालय या देश का निर्माण है। उन्होंने कहा कि मशीन पर उसका मूल ब्रांडिंग स्पष्ट रूप से मौजूद था और इसे केवल छात्रों के अध्ययन, अनुसंधान और प्रायोगिक सीख के उद्देश्य से लाया गया था। उन्होंने कहा कि यह दो दिन के प्रदर्शन के लिए रखा गया था और अब छात्रों की प्रयोगशाला में चला गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि विवाद एक गलत व्याख्या के कारण बढ़ा और इंटरनेट पर तेजी से फैल गया। प्रोफेसर ने स्पष्ट किया कि वे प्रबंधन संकाय में संचार विषय की अध्यापक हैं, एआई पढ़ाने से उनका संबंध नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि देश की छवि को नुकसान पहुंचाने के आरोपों से वे सहमत नहीं हैं और संस्थान ने विभिन्न क्षेत्रों में देश का नाम रोशन किया है।
इसी बीच, विश्वविद्यालय की एक अन्य प्रोफेसर ने भी कहा कि उन्हें स्टॉल खाली करने के किसी निर्देश की जानकारी नहीं है और रोबोडॉग को केवल एआई में निवेश और सीख के हिस्से के रूप में लाया गया था, जिसे गलत तरीके से समझा गया।
प्रोफेसर डॉ. ऐश्वर्या श्रीवास्तव ने कहा, फिलहाल हमें इस संबंध में कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। बातचीत जारी है और जल्द ही हम प्रेस विज्ञप्ति जारी करेंगे। शिक्षक और छात्र विश्वविद्यालय के साथ खड़े हैं। उन्होंने आगे कहा, “हम माफी नहीं मांग रहे हैं, लेकिन यह स्वीकार करते हैं कि मामला कुछ हद तक भ्रामक ढंग से प्रस्तुत हुआ और गलत समझा गया। एक छोटा सा मुद्दा सोशल मीडिया पर बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया, जबकि हमारा ऐसा कोई इरादा नहीं था।”
विश्वविद्यालय ने जारी किया बयान
विवाद के बीच विश्वविद्यालय ने भी बयान जारी किया है। विश्वविद्याल की तरफ से कहा गया कि उसके खिलाफ चलाए जा रहे नकारात्मक अभियान से छात्र और शिक्षक आहत हैं। संस्थान के अनुसार रोबोटिक प्रोग्रामिंग छात्रों को एआई एप्लिकेशन विकसित करना सिखाने का हिस्सा है, जिससे वे वैश्विक तकनीकों और संसाधनों का उपयोग कर वास्तविक दुनिया में कौशल विकसित कर सकें।
विश्वविद्यालय ने कहा कि उसका ध्यान छात्रों की सीख और नवाचार पर है और वह आधुनिक तकनीकों तक पहुंच देकर उन्हें भविष्य के लिए तैयार करता है। संस्थान का मानना है कि नकारात्मक माहौल छात्रों के मनोबल को प्रभावित कर सकता है, जबकि वे नई तकनीकों के साथ प्रयोग और कौशल निर्माण में लगे हैं।
सरकार ने क्या कहा?
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस पूरे विवाद पर कहा कि जहां भी किसी ने कुछ गलत किया है, तुरंत कार्रवाई की गई है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा, “एआई समिट में बहुत अच्छे-अच्छे सॉल्यूशन्स आए हैं। अगर यहां पर किसी ने गलत किया है, तो तुरंत उस पर एक्शन भी लिया गया है। जो बाकी दूसरे अच्छे सॉल्यूशन्स हैं, उनको भी देखना चाहिए।”
बता दें कि जिस रोबोट को लेकर विवाद हुआ, वह चार पैरों वाला उन्नत रोबोट है जिसे जानवरों की तरह चलने और विभिन्न कार्य करने के लिए डिजाइन किया जाता है। ऐसे रोबोट बाधाओं को पार करने, निरीक्षण, प्रदर्शन या अनुसंधान में उपयोग किए जाते हैं और तकनीकी प्रदर्शनों में आम तौर पर दिखाए जाते हैं।
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट पांच दिन का कार्यक्रम है, जो “पीपल, प्लैनेट और प्रोग्रेस” जैसे तीन आधार स्तंभों पर केंद्रित है। इसमें नीति निर्माताओं, तकनीकी कंपनियों, नवाचारकर्ताओं, शिक्षाविदों और उद्योग प्रतिनिधियों की भागीदारी होती है और इसका उद्देश्य एआई से जुड़ी वैश्विक चर्चाओं को ठोस विकास परिणामों में बदलना है, खासकर इंडिया एआई मिशन और डिजिटल इंडिया पहल के संदर्भ में।

