Friday, March 20, 2026
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गलगोटिया विवाद: रोबो डॉग की तरह क्या ‘सॉकर ड्रोन’ को लेकर भी गलत दावे किए गए?

विवादों के बीच बुधवार को गलगोटिया यूनिवर्नेसिटी ने रोबो डॉग वाले पूरे प्रकरण पर माफी मांगी है। यूनिवर्सिटी ने बयान जारी कर कहा कि यह सबकुछ गलतफहमी की वजह से हुआ था।

नई दिल्ली: गलगोटिया यूनिवर्सिचटी की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में प्रदर्शित रोबोटिक कुत्ते को लेकर मचे बवाल के बीच, नोएडा स्थित यह संस्थान एक ‘सॉकर ड्रोन’ को बनाने के दावों को लेकर नए सिरे से सवालों के दायरे आ गया है।

मंगलवार को वायरल हुए गलगोटिया यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नेहा सिंह से जुड़े वीडियो में कहा गया था कि ‘सॉकर ड्रोन’ का विकास पूरी तरह से आंतरिक इंजीनियरिंग के माध्यम से किया गया है, जिसमें डिजाइन से लेकर उपयोग तक सब कुछ शामिल है। हालांकि, अब ये दावे सामने आ रहे हैं कि इसे यूनिवर्सिटी द्वारा नहीं तैयार किया गया है, बल्कि इसे एक दक्षिण कोरियाई कंपनी ने विकसित किया है।

यह ताजा विवाद बुधवार को ही सामने आया जब कथित तौर पर गलगोटिया यूनिवर्सिटी को नई दिल्ली में इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट एक्सपो क्षेत्र छोड़ने के लिए कहा जा चुका है। यूनिवर्सिटी ने भी बताया है कि उसने समिट से अपना स्टॉल खाली कर दिया है।

क्या है गलगोटिया यूनिवर्सिटी से जुड़ा नया विवाद?

दरअसल, वायरल हुए वीडियो के एक हिस्से में यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर एक ‘सॉकर ड्रोन’ दिखाते हुए कहती नजर आती हैं कि इसे बिल्कुल शुरू से यूनिवर्सिटी में ही बनाया गया है। वीडियो में गलगोटिया यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नेहा सिंह को कहते हुए देखा जा सकता है, ‘यह एक दिलचस्प उपकरण है। इसकी इंजीनियरिंग से लेकर इसके एप्लीकेशन तक, सब कुछ यूनिवर्सिटी में ही विकसित किया गया है।’

उन्होंने यह भी दावा किया कि गलगोटिया ने अपने परिसर में भारत का पहला ‘ड्रोन सॉकर एरिना’ विकसित किया है। वीडियो में उन्हें यह कहते हुए सुना जा सकता है, ‘तो मूल रूप से, इंजीनियरिंग से लेकर एप्लीकेशन तक, हमारे पास एक सिमुलेशन लैब से लेकर एक एप्लीकेशन एरिना तक, सब कुछ है, और यह कैंपस में भारत का पहला ड्रोन सॉकर एरिना है। यहां बच्चे गेम खेलते हैं, फ्लाई करते हैं।’

हालांकि, ऑनलाइन यूजर्स का दावा है कि यह ड्रोन बाजार में उपलब्ध स्ट्राइकर V3 ARF मॉडल से काफी मिलता-जुलता है, जो भारत में लगभग 40,000 रुपये में मिल सकता है। स्ट्राइकर असल में दक्षिण कोरिया के हेलसेल ग्रुप द्वारा ड्रोन खेलों के लिए विकसित किया गया एक सॉकर ड्रोन है।

यूजरों ने सवाल उठाया कि क्या ड्रोन वास्तव में कैंपस में ही डिजाइन किया गया था या केवल असेंबल, मॉडिफाई या रीब्रांड किया गया है। एक यूजर ने लिखा, ‘दावा- कैंपस में स्क्रैच (शुरू से) से इसे बनाया गया। वास्तविकता: बाजार में उपलब्ध मॉडल।’

गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने पूरे विवाद पर क्या कहा है?

बहरहाल, विवादों के बीच बुधवार को गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने रोबो डॉग वाले पूरे प्रकरण पर माफी मांगी है। यूनिवर्सिटी ने बयान जारी कर कहा कि यह सबकुछ गलतफहमी की वजह से हुआ था।

एक्स पर अपने बयान में गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने लिखा, ‘हमारे स्टॉल पर मौजूद हमारी एक प्रतिनिधि को तकनीकी जानकारी सही तरीके से नहीं थी। कैमरे पर उत्साह में उन्होंने उत्पाद से जुड़ी कुछ गलत जानकारी दी, जबकि उन्हें मीडिया से बात करने की अनुमति भी नहीं थी।’

यूनिवर्सिटी ने आगे लिखा, ‘हम आपसे निवेदन करते हैं कि इस स्थिति को समझें, क्योंकि हमारा मकसद किसी भी तरह से इस इनोवेशन को गलत तरीके से पेश करना नहीं था। गलगोटिया यूनिवर्सिटी शैक्षणिक ईमानदारी, पारदर्शिता और अपने काम की जिम्मेदार प्रस्तुति को लेकर प्रतिबद्ध है। आयोजकों की भावना का सम्मान करते हुए हमने आयोजन स्थल खाली कर दिया है।’

विनीत कुमार
विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
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