बिहार की राजनीति में गुरुवार का दिन उस समय ऐतिहासिक बन गया, जब तीन अलग-अलग दलों के राष्ट्रीय अध्यक्षों ने एक साथ राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल किया।
यह पहली बार है जब प्रदेश की राजनीति में इस तरह का दृश्य देखने को मिला। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में नामांकन प्रक्रिया पूरी हुई, जिससे इस घटनाक्रम का राजनीतिक महत्व और बढ़ गया।
गुरुवार का दिन देश की राजनीति में भी बड़े बदलाव की सूचना देने वाला भी रहा। लंबे अरसे से बिहार की सत्ता वाली राजनीति के पर्याय माने जाने वाले नीतीश कुनार ने राज्य से अंतत: दूरी बना ही ली, वे अब राज्यसभा की ओर जा रहे हैं।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल कर दिया। उनके नामांकन के मौक़े पर गृह मंत्री अमित शाह भी पटना पहुंचे थे।
इस घटनाक्रम के बाद एक ही सवाल हर बिहारी पूछ रहा है कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा? पाटलिपुत्र की धरती पर 20 साल बाद इस सवाल का जवाब ढूंढा जा रहा है। वरना, गठबंधन कोई हो, सीएम पद का उम्मीदवार फिक्स होता था।
इससे पहले अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर लगाई जा रही अटकलों पर नीतीश कुमार ने एक तरह का विराम लगा दिया और उन्होंने ख़ुद के राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने की पुष्टि की। एक्स पर पोस्ट कर उन्होंने ये जानकारी दी।
इसके साथ ही यह तय हो गया कि बिहार में दो दशकों के बाद राज्य की सत्ता में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। नीतीश कुमार को लेकर बिहार के सियासी गलियारों में लगातार यह चर्चा चल रही थी कि वो बिहार की सत्ता से अलग राज्यसभा का रुख़ करने वाले हैं।

नीतीश कुमार साल 2005 से लगातार बिहार में सत्ता का पर्याय बने हुए थे। उसके बाद से बिहार की सत्ता पर लगातार नीतीश ही बने हुए हैं। नीतीश पहली बार साल 2000 में बिहार के मुख्यमंत्री बने थे, लेकिन वो अपना बहुमत साबित नहीं कर पाए थे।
इसके बाद साल 2005 में नीतीश कुमार ने बीजेपी के साथ बहुमत की सरकार बनाई थी। हालांकि साल 2014-15 में कुछ महीनों के लिए उन्होंने अपनी पार्टी से जीतन राम मांझी को बिहार का मुख्यमंत्री बनाया था।
इसके बाद नीतीश कुमार वापस सीएम की कुर्सी पर आ गए थे और कहा जाता था कि बिहार में किसी भी गठबंधन की सरकार बने, मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नीतीश कुमार ही होते हैं।
नए राज्यपालों और उपराज्यपाल की नियुक्ति
वहीं इन सबके बीच देश की संवैधानिक व्यवस्था में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नौ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नए राज्यपाल और उपराज्यपाल नियुक्त किए हैं। यह बदलाव ऐसे समय किया गया है जब कई राज्यों में राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं और आने वाले समय में चुनावी माहौल भी बनने वाला है। केंद्र ने इस फेरबदल में अनुभवी राजनेताओं, पूर्व नौकरशाहों और प्रशासनिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों को जिम्मेदारी देकर संवैधानिक संस्थाओं को और मजबूत करने का संदेश दिया है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल डॉ. सीवी आनंद बोस का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है इसके साथ ही केंद्र सरकार ने कई राज्यों में राज्यपाल और उपराज्यपाल के पदों पर नए बदलाव किए हैं राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी अधिसूचना में बताया गया कि अलग-अलग राज्यों में नई नियुक्तियां की गई हैं इन सभी अधिकारियों की जिम्मेदारी तब से शुरू होगी जब वे अपने नए पद का कार्यभार संभालेंगे माना जा रहा है कि इन बदलावों का मकसद राज्यों में प्रशासन को और मजबूत करना है।
नई सूची के अनुसार हिमाचल प्रदेश के मौजूदा राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला को अब तेलंगाना का राज्यपाल बनाया गया है वहीं तेलंगाना के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा को महाराष्ट्र का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है इसके अलावा वरिष्ठ नेता नंद किशोर यादव को नागालैंड का राज्यपाल बनाया गया है केंद्र सरकार ने इन नियुक्तियों के जरिए अलग-अलग राज्यों में नई जिम्मेदारियां तय की हैं, ताकि प्रशासनिक कामकाज बेहतर तरीके से चल सके।
सरकार ने लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन को बिहार का नया राज्यपाल नियुक्त किया है वहीं तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि को अब पश्चिम बंगाल का राज्यपाल बनाया गया है इसके साथ ही केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर को अतिरिक्त जिम्मेदारी देते हुए तमिलनाडु का कार्यभार भी सौंपा गया है इन बदलावों के बाद कई राज्यों में नई प्रशासनिक टीम काम करेगी और सरकार को उम्मीद है कि इससे कामकाज में बेहतर तालमेल बनेगा।
कुछ केंद्र शासित प्रदेशों में भी बदलाव किए गए हैं लद्दाख के उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता को अब हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल बनाया गया है वहीं दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना को लद्दाख का नया उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है इसके अलावा पूर्व राजनयिक तरनजीत सिंह संधू को दिल्ली का नया उपराज्यपाल बनाया गया है माना जा रहा है कि इन बदलावों से केंद्र शासित प्रदेशों में प्रशासनिक काम और बेहतर ढंग से चल सकेगा।
नई नियुक्तियों को सरकार की बड़ी प्रशासनिक पहल माना जा रहा है खासकर पश्चिम बंगाल में आर.एन. रवि की नियुक्ति पर राजनीतिक हलकों की नजर है वह पहले तमिलनाडु में राज्यपाल रहते हुए कई मुद्दों को लेकर चर्चा में रहे थे वहीं बिहार में सैयद अता हसनैन की नियुक्ति को भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि उन्हें सेना और प्रशासन का अच्छा अनुभव है दूसरी तरफ दिल्ली में तरनजीत सिंह संधू के उपराज्यपाल बनने के बाद उम्मीद की जा रही है कि केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच बेहतर तालमेल देखने को मिल सकता है।

