नई दिल्लीः भारतीय वायु सुरक्षा और मजबूत होने जा रही है। अतिरिक्त S-400 यूनिट्स की खरीद की मंजूरी पर मुहर लगने के बाद भारतीय वायुसेना (IAF) की एक टीम S-400 डिफेंस सिस्टम का निरीक्षण करने रूस पहुंच चुकी है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस अत्याधुनिक मिसाइल सिस्टम के अप्रैल के अंत तक भारत पहुंच की उम्मीद है। खबरों के अनुसार इसे पश्चिमी सेक्टर, खासकर राजस्थान क्षेत्र में तैनात किया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, पांचवां एस-400 सिस्टम भी इस साल नवंबर तक भारत को मिल जाएगा। इसके साथ ही रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने रूस से पांच अतिरिक्त S-400 सिस्टम खरीदने को मंजूरी दे दी है, जिससे भारत के पास कुल 10 S-400 यूनिट हो जाएंगी। गौरतलब है कि भारत ने 2018 में रूस के साथ सरकार-से-सरकार (जी2जी) समझौते के तहत पहले ही 5 S-400 सिस्टम खरीदे थे और अब नए सिस्टम के लिए भी एक साल के भीतर सभी औपचारिकताएं पूरी होने की संभावना है।
कैसे होती रक्षा खरीद प्रक्रिया?
भारत में रक्षा खरीद प्रक्रिया एक सख्त और पारदर्शी व्यवस्था के तहत होती है। सबसे पहले सेना अपनी ऑपरेशनल जरूरत को परिभाषित करती है, जिसे स्टेटमेंट ऑफ केस कहा जाता है। इसके बाद डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड द्वारा इसकी समीक्षा की जाती है। फिर यह प्रस्ताव रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) के पास जाता है, जहां “आवश्यकता की स्वीकृति” दी जाती है। इसके बाद लागत पर विस्तृत बातचीत होती है, फिर वित्तीय मंजूरी ली जाती है और अंत में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) से अंतिम मंजूरी मिलती है।
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भारतीय वायुसेना ने S-400 के साथ रूस के पैंटसिर (Pantsir) शॉर्ट-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम की भी मांग की है। ये दोनों सिस्टम मिलकर एक मजबूत दो-स्तरीय सुरक्षा कवच तैयार करते हैं, जो दुश्मन के फाइटर जेट, ड्रोन और मिसाइलों को सीमा पार से ही नष्ट करने में सक्षम है।
25 अरब डॉलर के नए रक्षा सौदों को मंजूरी
इसी बीच भारत ने अपने सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण के लिए 25 अरब डॉलर के नए रक्षा सौदों को मंजूरी दी है। इस पैकेज में ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, S-400 मिसाइल सिस्टम, रिमोटली पायलटेड स्ट्राइक ड्रोन, टैंक और आर्टिलरी गोला-बारूद, निगरानी उपकरण, सुखोई Su-30 लड़ाकू विमानों का अपग्रेड और तटीय सुरक्षा के लिए होवरक्राफ्ट शामिल हैं। इसके अलावा भारत ने रूस की कंपनी रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के साथ अतिरिक्त एयर डिफेंस सिस्टम के लिए अलग से समझौता भी किया है।
इससे पहले इसी साल भारत 40 अरब डॉलर के रक्षा सौदों को भी मंजूरी दे चुका है, जिसमें राफेल लड़ाकू विमान और P-8 पोसाइडन जैसे अत्याधुनिक विमान शामिल हैं। इन सभी फैसलों के साथ भारत का कुल रक्षा व्यय इस वित्त वर्ष में 71 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो उसे दुनिया के सबसे बड़े रक्षा खर्च करने वाले देशों में शामिल करता है।
पाकिस्तान के साथ हालिया तनाव और चीन के साथ लंबे समय से जारी सीमा विवाद को देखते हुए भारत अपनी सैन्य ताकत को लगातार मजबूत कर रहा है। साथ ही, देश घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए साझेदारों के साथ सहयोग को भी विस्तार दे रहा है।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान S-400 की दिखी थी ताकत
गौरतलब है कि एस-400 की क्षमताओं पर नजर डालें तो यह दुनिया के सबसे उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम्स में गिना जाता है। भारतीय वायुसेना ने इसका पहला कॉम्बैट इस्तेमाल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के खिलाफ किया था। इसका लॉन्ग-रेंज रडार करीब 600 किलोमीटर दूर से आने वाले हवाई खतरों को पहचान सकता है और एक साथ 100 से ज्यादा टारगेट्स को ट्रैक करने की क्षमता रखता है।
यह सिस्टम स्ट्रैटेजिक बॉम्बर, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर एयरक्राफ्ट, टोही विमान, अर्ली वॉर्निंग सिस्टम, फाइटर जेट, आर्म्ड ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल जैसे खतरों को 400 किलोमीटर तक की दूरी से इंटरसेप्ट कर सकता है। एस-400 की खासियत इसकी मल्टी-लेयर मिसाइल क्षमता है, जिसके तहत 400, 250, 120 और 40 किलोमीटर रेंज की अलग-अलग मिसाइलें दागी जा सकती हैं।
भारत ने रूस के साथ 2018 में करीब 39,000 करोड़ रुपये में पांच एस-400 सिस्टम खरीदने का समझौता किया था। इसकी पहली स्क्वाड्रन दिसंबर 2021 में मिली, दूसरी अप्रैल 2022 में और तीसरी फरवरी 2023 में भारत को सौंप दी गई। बाकी बची दो स्क्वाड्रन 2024 में मिलने की उम्मीद थी, लेकिन वह टाइमलाइन पूरी नहीं हो सकी। अब नई टाइमलाइन के मुताबिक इस साल दोनों यूनिट्स मिलने की संभावना है।

