Friday, March 20, 2026
Homeकारोबारबीमा क्षेत्र में अब 100% FDI, क्या है ‘सबका बीमा सबकी रक्षा’...

बीमा क्षेत्र में अब 100% FDI, क्या है ‘सबका बीमा सबकी रक्षा’ विधेयक? लोकसभा के बाद राज्य सभा से पारित

लोकसभा में यह विधेयक मंगलवार (16 दिसंबर) को पारित हुआ था। इसमें बीमा क्षेत्र से जुड़े कई अहम बदलाव की बात है। इसी के तहत एक बदलाव बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा को 74 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने का भी है।

नई दिल्ली: ‘सबका बीमा सबकी रक्षा (बीमा कानूनों में संशोधन) विधेयक, 2025’ बुधवार को राज्य सभा में ध्वनि मत से पारित हो गया। इस विधेयक को लोकसभा से पहले ही पास किया जा चुका है। इस विधेयक में बीमा क्षेत्र में कई अहम सुधारों का प्रावधान है, जिसमें एक बदलाव इस क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा को 74 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने से जुड़ा है। सरकार के अनुसार इसका उद्देश्य बीमा इंडस्ट्री का आधुनिकीकरण करना और साल 2047 तक देश में सभी के लिए बीमा के लक्ष्य को हासिल करना है।

लोकसभा में यह विधेयक मंगलवार (16 दिसंबर) को पारित हुआ था। इसके तहत बीमा अधिनियम, 1938; भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) अधिनियम, 1956; और बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) अधिनियम, 1999 में संशोधन किया गया है। विधेयक का मकसद वैश्विक पूंजी आकर्षित करना, कारोबार सुगमता बढ़ाना, पॉलिसीधारकों की सुरक्षा को मजबूत करना और बीमा पहुंच को और ज्यादा लोगों तक सुगम बनाना है।

विधेयक के पक्ष में सरकार की ओर से क्या कहा गया?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों को मजबूत करने के लिए लगातार कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि तीन गैर-जीवन सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों में 17,450 करोड़ रुपये का निवेश किया गया, जिसके चलते पिछले साल एलआईसी, जीआईसी और कृषि बीमा कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड (एआईसीआईएल) ने रिकॉर्ड मुनाफा दर्ज किया।

सीतारमण ने 2014 के बाद बीमा क्षेत्र में हुई प्रगति भी गिनाई। उन्होंने कहा कि बीमा कंपनियों की संख्या 53 से बढ़कर पिछले कुछ सालों में 74 पहुंच गई है। बीमा पैठ 3.3 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 3.8 प्रतिशत, प्रति व्यक्ति बीमा घनत्व 55 डॉलर से बढ़कर 97 डॉलर, कुल प्रीमियम 4.15 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 11.93 लाख करोड़ रुपये और प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियां तीन गुना बढ़कर 74.43 लाख करोड़ रुपये हो गई हैं।

वित्त मंत्री ने बताया कि कि विदेशी निवेश सीमा यानी एफडीआई को चरणबद्ध तरीके से 26 प्रतिशत से 49 प्रतिशत, फिर 74 प्रतिशत तक बढ़ाने से विदेशी पुनर्बीमा कंपनियों की शाखाएं खुलीं और घरेलू क्षमता मजबूत हुई। वर्ष 2019 में बीमा मध्यस्थों के लिए 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति से सलाहकारी सेवाओं में सुधार हुआ।

वित्त मंत्री ने साथ ही 56वीं जीएसटी परिषद के उस फैसले की भी प्रशंसा की, जिसमें व्यक्तिगत जीवन और स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर जीएसटी 18 प्रतिशत से घटाकर शून्य कर दिया गया। इससे बीमा अधिक किफायती बना।

उन्होंने ‘आपकी पूंजी, आपका अधिकार’ अभियान का जिक्र करते हुए बताया कि जिला स्तर पर आयोजित शिविरों के माध्यम से 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की लावारिस राशि लोगों को लौटाई गई है, जबकि ‘बीमा भरोसा’ पोर्टल दावों के निपटारे में मदद कर रहा है।

मनमाने तरीके से कंपनियां नहीं बढ़ा सकेंगी प्रीमियम

वित्त मंत्री सीतारमण ने बताया कि सभी बीमा कंपनियों के लिए ग्रामीण और सामाजिक क्षेत्र की अनिवार्य जिम्मेदारियां तय रहेंगी। साथ ही, दंड की राशि 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये की जा रही है, जिसका उपयोग पॉलिसीधारकों की शिक्षा के लिए किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रीमियम पर सीमा रहेगी और निजी कंपनियां मनमाने ढंग से प्रीमियम तय नहीं कर सकेंगी।

हालांकि, विपक्ष ने विधेयक का कड़ा विरोध किया। डीएमके सांसद डॉ. कनिमोझी एनवीएन सोमु ने आरोप लगाया कि विदेशी बोर्ड प्रीमियम पर नियंत्रण करेंगे, जिससे काले धन का खतरा और राज्यों की स्वायत्तता पर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि यह सहकारी बीमा कंपनियों और एलआईसी जैसे सार्वजनिक उपक्रमों को नुकसान पहुंचाएगा और तंज कसते हुए कहा, ‘यह सबका बीमा नहीं, बल्कि सबका बकवास है।’

तृणमूल कांग्रेस सांसद साकेत गोखले ने बीमा को सामाजिक सुरक्षा बताते हुए कहा कि इस क्षेत्र में शेयरधारकों से अधिक पॉलिसीधारकों के हितों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने विधेयक को जल्दबाजी में लाने का आरोप लगाया।

विपक्षी दलों ने इसे प्रवर समिति को भेजने की मांग की और डेटा गोपनीयता, मुनाफे की विदेश वापसी और संप्रभुता पर संभावित असर को लेकर चिंता जताई। वहीं, समर्थकों का कहना है कि 100 प्रतिशत एफडीआई से विशेषज्ञता आएगी और सस्ते बीमा उत्पाद उपलब्ध होंगे।

विनीत कुमार
विनीत कुमार
पूर्व में IANS, आज तक, न्यूज नेशन और लोकमत मीडिया जैसी मीडिया संस्थानों लिए काम कर चुके हैं। सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एंड वीडियो प्रोडक्शन की डिग्री। मीडिया प्रबंधन का डिप्लोमा कोर्स। जिंदगी का साथ निभाते चले जाने और हर फिक्र को धुएं में उड़ाने वाली फिलॉसफी में गहरा भरोसा...
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments