इथियोपिया के हैली गुब्बी ज्वालामुखी से उठा विशाल राख का बादल सोमवार रात उत्तर-पश्चिम भारत तक पहुंच गया। यह ज्वालामुखी करीब 10 हजार साल से निष्क्रिय था और रविवार को अचानक फट पड़ा, जिसके बाद राख और सल्फर डाइऑक्साइड का घना स्तंभ आसमान की ऊंचाई तक उठ गया। बादल 100–130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से 10 से 15 किलोमीटर की ऊंचाई पर यात्रा करता हुआ राजस्थान, गुजरात, दिल्ली-एनसीआर, पंजाब और महाराष्ट्र के ऊपर से गुजरा और पूर्व की ओर बढ़ रहा है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, सबसे पहले यह राख का बादल पश्चिमी राजस्थान में दाखिल हुआ। इंडिया मेट स्काई वेदर की चेतावनी में कहा गया, “जोधपुर-जैसलमेर क्षेत्र से राख का बादल भारतीय उपमहाद्वीप में प्रवेश कर चुका है और 120 से 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उत्तर-पूर्व दिशा की ओर बढ़ रहा है। आसमान कुछ समय के लिए अजीब और अनोखा दिखाई दे सकता है, लेकिन चिंता की बात कम है, क्योंकि राख की परत 25,000 से 45,000 फीट की ऊंचाई पर मौजूद है।”
देर शाम तक यह बादल राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली के हिस्सों पर फैल गया। वहीं, इसका एक हिस्सा गुजरात को भी छूने की आशंका जताई गई। पूर्वानुमान में कहा गया कि रात में पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र और हिमाचल प्रदेश के कुछ इलाकों में भी इसका असर महसूस हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि राख जमीन से इतनी ऊंचाई पर है कि फिलहाल इससे स्वास्थ्य को खतरा कम है, हालांकि हल्की राख गिरने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। मंगलवार सुबह सूर्योदय के समय आसमान असामान्य रंगों में नजर आ सकता है, जबकि वायु गुणवत्ता पूर्व की तरह खराब ही रहने की उम्मीद है। सोशल मीडिया पर इसकी कुछ तस्वीरें भी सामने आई हैं, हालांकि बोले भारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।
अब तक क्या कुछ जानकारी सामने आई है, 10 पाइंट्स में समझें-
1. इथियोपिया के हैली गुब्बी ज्वालामुखी का यह विस्फोट बेहद दुर्लभ है क्योंकि यह करीब 10–12 हजार साल बाद पहली बार सक्रिय हुआ। रविवार को फटने के बाद इसने सल्फर डाइऑक्साइड और राख का विशाल स्तंभ 14 किलोमीटर की ऊंचाई तक भेजा।
2. सोमवार शाम 6.30 बजे राख का बादल भारत के वायुक्षेत्र में दाखिल हुआ। सबसे पहले यह राजस्थान के जैसलमेर और जोधपुर क्षेत्र में दिखाई दिया और 100–130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उत्तर-पूर्व की ओर बढ़ता रहा।
3. रात 11 बजे के आसपास यह बादल दिल्ली-एनसीआर के ऊपर पहुंच गया। आसमान का रंग असामान्य दिखने लगा और दृश्यता प्रभावित हुई। इस राख ने कई उड़ानें भी प्रभावित कीं। इंडिगो ने कम से कम छह फ्लाइटें रद्द कीं जबकि अकासा एयर ने 24–25 नवंबर के लिए जेद्दा, कुवैत और अबू धाबी की सेवाएं रोक दीं। नीदरलैंड एयरलाइन केएलएम ने दिल्ली-एम्सटर्डम की दोनों उड़ानें रद्द कर दीं।
4 सोमवार रात एक्स पर एयर इंडिया ने लिखा, “इथियोपिया में ज्वालामुखी विस्फोट के बाद कुछ क्षेत्रों में राख देखी गई है। हम लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और अपने ऑपरेटिंग क्रू के साथ संपर्क में हैं। अभी तक हमारी उड़ानों पर बड़ा असर नहीं पड़ा है।”

5. डीजीसीए ने स्थिति को गंभीर मानते हुए ASHTAM जारी किया और एयरलाइंस को निर्देश दिए कि वे रूट और फ्यूल प्लान दोबारा तैयार करें। उड़ान दलों को इंजन की किसी भी गड़बड़ी या केबिन में बदबू जैसी स्थिति की तुरंत रिपोर्ट करने को कहा गया है।
6. अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस पाकिस्तानी एयरस्पेस से रीरूट होने लगीं, लेकिन भारतीय एयरलाइंस इस मार्ग का उपयोग नहीं कर सकतीं। इससे देरी और रद्दीकरण की संख्या बढ़ी। एयरपोर्ट्स को रनवे व टैक्सीवे की तत्काल जांच के लिए तैयार रहने को कहा गया है।
7. दिल्ली-एनसीआर में राख आने से पहले ही हवा ‘बहुत खराब’ श्रेणी में थी। सोमवार शाम दिल्ली का एक्यूआई 382 रहा, गाजियाबाद 396 और नोएडा 397 तक पहुंच गया। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि राख मौजूदा प्रदूषण को और बिगाड़ सकती है।
8. मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक प्लूम में ज्वालामुखी राख, सल्फर डाइऑक्साइड, चट्टान और कांच के सूक्ष्म कण मौजूद हैं। ये कण विमान के इंजनों को नुकसान पहुंचा सकते हैं और दृश्यता को कम कर सकते हैं, इसलिए इसे गंभीर उड़ान खतरा माना जा रहा है।
9. अनुमान है कि मंगलवार सुबह सूर्योदय के समय आसमान के रंग असामान्य दिख सकते हैं। हल्की राख की बूंदाबांदी की संभावना है। मौसम विभाग का कहना है कि सतही स्वास्थ्य पर बड़ा असर नहीं होगा लेकिन तापमान बढ़ सकता है और हल्की धुंध रहेगी।
10. इस घटना ने भारत की मौसम निगरानी, प्रदूषण नियंत्रण और विमानन प्रणाली के लिए चुनौती खड़ी कर दी है। डीजीसीए लगातार स्थिति की निगरानी कर रहा है और मौसम एजेंसियां बादल की दिशा ट्रैक कर रही हैं। अगली एडवाइजरी तय करेगी कि अगले 24 घंटे कितने संवेदनशील होंगे।

