नई दिल्लीः प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दिल्ली के लालकिले के पास हुए धमाके के बाद जांच के दायरे में आए अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट और अल-फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी के खिलाफ पीएमएलए की विशेष अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया है। एजेंसी ने यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में की है जिसके तहत करीब 139.97 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति कुर्क की गई। इसमें अल-फलाह यूनिवर्सिटी परिसर के भीतर स्थित लगभग 54 एकड़ जमीन और उस पर बने निर्माण शामिल हैं।
ईडी के मुताबिक अब तक इस पूरे मामले में अपराध से अर्जित धन की राशि करीब 493.24 करोड़ रुपये आंकी गई है। सिद्दीकी को पीएमएलए, 2002 की धारा 19 के तहत 18 नवंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में है।
ईडी ने चार्जशीट में क्या-क्या आरोप लगाए गए हैं?
ईडी की जांच में सामने आया है कि जवाद अहमद सिद्दीकी का अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट, अल-फलाह यूनिवर्सिटी और उससे जुड़ी संस्थाओं पर पूर्ण नियंत्रण था। मैनेजिंग ट्रस्टी और चांसलर के रूप में वह प्रशासनिक, वित्तीय और परिचालन फैसले खुद लेता था, जबकि अन्य पदाधिकारी केवल नाममात्र या प्रॉक्सी के तौर पर काम कर रहे थे। एजेंसी का दावा है कि सिद्दीकी ही अवैध कमाई का मुख्य लाभार्थी था।
ईडी ने आरोप लगाया है कि मेडिकल कॉलेज के संचालन में नियामक संस्थाओं के नियमों का उल्लंघन किया गया। मंजूरी और प्रमाणपत्र हासिल करने के लिए गलत जानकारी दी गई और जरूरी तथ्यों को छिपाया गया। जांच में यह भी सामने आया कि यूनिवर्सिटी और ट्रस्ट से जुड़े ठेके, जैसे हॉस्टल कैटरिंग और कैंपस में निर्माण कार्य, सिद्दीकी से जुड़ी कंपनियों को ही दिए गए।
जांच के अनुसार, संस्थानों के फंड को परिवार द्वारा नियंत्रित कंपनियों के जरिए इधर-उधर किया गया। इनमें आमला एंटरप्राइजेज एलएलपी, करकुन कंस्ट्रक्शन एंड डेवलपर्स और दियाला कंस्ट्रक्शन एंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। ईडी को विदेशी लेनदेन और विदेश में फंड की हेराफेरी के भी सबूत मिले हैं। एजेंसी के मुताबिक सिद्दीकी की पत्नी के नाम पर 3 करोड़ रुपये से ज्यादा और बेटे के नाम पर करीब 1 करोड़ रुपये के विदेशी लेनदेन पाए गए हैं।
फर्जी मान्यता के नाम पर ठगी का आरोप, आतंकी मॉड्यूल से भी जुड़ाव
ईडी का कहना है कि यूनिवर्सिटी ने यूजीसी मान्यता और एनएएसी एक्रिडिटेशन के नाम पर छात्रों और आम लोगों को गुमराह किया, जिससे करीब 415 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की गई। एजेंसी को शक है कि इस पैसे का एक हिस्सा खाड़ी देशों समेत विदेशों में भेजा गया।
यह मनी लॉन्ड्रिंग केस फरीदाबाद के एक व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल की जांच से भी जुड़ा है। इस मॉड्यूल में शामिल कुछ डॉक्टर अल-फलाह यूनिवर्सिटी में काम कर चुके थे या वहां पढ़ाई कर चुके थे। 10 नवंबर को लाल किले के पास हुए विस्फोट में शामिल डॉक्टर उमर-उन-नबी ने इसी संस्थान में पढ़ाई की थी। वहीं, डॉ. मुजम्मिल शकील और डॉ. शाहीन शाहिद को धमाके से कुछ घंटे पहले गिरफ्तार किया गया था।
ईडी ने यह भी बताया कि जवाद अहमद सिद्दीकी का आपराधिक इतिहास रहा है। वर्ष 2001 में उसे फर्जी निवेश कंपनियां बनाकर लोगों से पैसा जमा कराने के मामले में गिरफ्तार किया गया था। उस समय करीब 7.5 करोड़ रुपये निजी खातों में डायवर्ट किए गए थे। बाद में 2004 में पीड़ितों को रकम लौटाने के आश्वासन पर उसे जमानत मिली थी।

