कोलकाताः भारतीय चुनाव आयोग (एसीआई) ने पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया के दौरान गंभीर अनियमितताएं पाए जाने पर बड़ी कार्रवाई की है। आयोग ने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम (RP Act) 1950 की धारा 13CC के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए राज्य के सात सरकारी अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। साथ ही मुख्य सचिव को उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
समाचार एजेंसी एनआई के अनुसार, इन अधिकारियों पर कर्तव्यों में लापरवाही, वैधानिक शक्तियों के दुरुपयोग और गंभीर कदाचार के आरोप हैं।
किन अधिकारियों पर गिरी गाज
निलंबित किए गए अधिकारियों में मुर्शिदाबाद जिले के समशेरगंज निर्वाचन क्षेत्र के एईआरओ (AERO) डॉ. सफाउर रहमान और फरक्का के एईआरओ नीतीश दास शामिल हैं। इनके अलावा मयनागुड़ी से डालिया राय चौधरी, सुती ब्लॉक से मुर्शिद आलम, कैनिंग पूर्व से सत्यजीत दास और जोयदीप कुंडू, तथा देबरा विधानसभा क्षेत्र से देवाशीष विश्वास पर भी यह कार्रवाई की गई है।
टेबल में देखें नाम–
| क्रमांक | अधिकारी का नाम | तैनाती (AC / जिला) | पद |
|---|---|---|---|
| 1 | शफौर रहमान | शमशेरगंज AC (मुर्शिदाबाद) | कृषि विभाग में सहायक निदेशक |
| 2 | नीतीश दास | फरक्का AC | राजस्व अधिकारी |
| 3 | दालिया राय चौधरी | मयनागुड़ी AC (जलपाईगुड़ी) | महिला विकास अधिकारी |
| 4 | मुर्शिद आलम | सूती AC | एडीए (Suti Block) |
| 5 | सत्यजीत दास | कैनिंग पूर्व AC | संयुक्त बीडीओ (Joint BDO) |
| 6 | जयदीप कुंडू | कैनिंग पूर्व AC | एफईओ (FEO) |
| 7 | देवाशीष विश्वास | डबरा AC | संयुक्त बीडीओ (Joint BDO) |
मतदाता सूची पुनरीक्षण और आगामी प्रक्रियापश्चिम बंगाल में मतदाता सूची में मौजूद तार्किक विसंगतियों और त्रुटियों को दूर करने के लिए आयोजित सुनवाई की प्रक्रिया शनिवार को पूरी हो गई है। आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इन सुनवाइयों के समापन के बाद अब 28 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। यह अभ्यास 27 दिसंबर से शुरू हुआ था, जिसके तहत राज्य भर के स्कूलों, क्लबों और सरकारी भवनों में शिविर लगाकर नाम गायब होने या वर्तनी की गलतियों जैसे मामलों का निपटारा किया गया।
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दस्तावेजों की जांच का आदेश
अधिकारियों को 21 फरवरी तक जमा किए गए दस्तावेजों की जांच जारी रखने का निर्देश दिया गया है। सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों को सोमवार तक सभी शेष डेटा पोर्टल पर अपलोड करने के लिए कहा गया है। घर-घर जाकर किए गए गणना अभियान के दौरान लगभग 58 लाख नाम हटाने के लिए चिह्नित किए गए थे। इनमें ऐसे मतदाता शामिल हैं जिनकी मृत्यु हो चुकी है, जो अन्य स्थानों पर स्थानांतरित हो गए हैं या जिनके नाम एक से अधिक बार दर्ज थे।
अंतिम सूची के प्रकाशन की तिथिचुनाव आयोग ने पहले अंतिम मतदाता सूची जारी करने के लिए 14 फरवरी की तारीख तय की थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 28 फरवरी कर दिया गया। हालांकि अभी हटाए जाने वाले नामों की सटीक संख्या स्पष्ट नहीं है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि बार-बार नोटिस मिलने के बावजूद बड़ी संख्या में लोग सुनवाई के लिए उपस्थित नहीं हुए, जिसके कारण उनके नाम सूची से हटाए जा सकते हैं।
बिहार सरकार में मंत्री मंगल पांडे ने मामले में टिप्पणी करते हुए आरोप लगाया कि वे राज्य सरकार के अधिकारी कम और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तथा तृणमूल कांग्रेस के प्रतिनिधि के रूप में अधिक काम करते नजर आते हैं। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई उन अधिकारियों के लिए एक संकेत है जो चुनाव आयोग के निर्देशों का पालन करने के बजाय टीएमसी और मुख्यमंत्री के आदेशों को प्राथमिकता देते हैं।

