शनिवार, मार्च 21, 2026
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ट्रंप ने कहा ईरान में बंद हो गई हैं हत्याएं, तेहरान बोला – ‘फांसी चढ़ाने की कोई योजना नहीं’

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान में हत्याएं बंद हो गई हैं। वहीं, तेहरान ने कहा कि फांसी चढ़ाने की कोई योजना नहीं है।

वाशिंगटनः अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार, 15 जनवरी को कहा कि उन्हें बताया गया है कि ईरान में प्रदर्शनकारियों की हत्याएं रोक दी गई हैं लेकिन उन्होंने धमकी भरे सैन्य कार्रवाई के बारे में भी कहा कि वे स्थिति पर नजर रखेंगे।

ट्रंप ने हाल के दिनों में बार-बार ईरान में प्रदर्शनकारियों पर हो रही कार्रवाई के खिलाफ ईरानी जनता की मदद करने की बात कही थी। मानवाधिकार समूहों का कहना है कि इन प्रदर्शनों में कम से कम 3,428 लोग मारे गए हैं।

डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा?

व्हाइट हाउस में एक चौंकाने वाली घोषणा में ट्रंप ने कहा कि उन्हें “दूसरी तरफ के बहुत महत्वपूर्ण सूत्रों” से आश्वासन मिला है कि तेहरान ने हत्याएं रोक दी हैं और फांसी की सजाएं नहीं दी जाएंगी।

ट्रंप ने कहा, “उन्होंने कहा है कि हत्याएं रोक दी गई हैं और फांसी की सजाएं नहीं दी जाएंगी – आज कई लोगों को फांसी दी जानी थी, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा – और हम इसकी पुष्टि करेंगे।”

उन्होंने हालांकि कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी और कहा कि अमेरिका ने अभी तक इन दावों की पुष्टि नहीं की है। ओवल ऑफिस में एएफपी के एक पत्रकार द्वारा यह पूछे जाने पर कि क्या अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की संभावना अब खत्म हो गई है? इस सवाल पर ट्रंप ने जवाब दिया कि “हम स्थिति पर नजर रखेंगे और प्रक्रिया का पता लगाएंगे।”

बाद में अमेरिकी नेटवर्क फॉक्स न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि “आज या कल कोई फांसी नहीं होगी।” इस दौरान उन्होंने बिना कोई सबूत दिए इजरायल पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया।

अराघची ने तर्क दिया कि आर्थिक कठिनाइयों को लेकर 28 दिसंबर को शुरू हुए शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन 7 से 10 जनवरी के बीच व्यापक हिंसा में तब्दील हो गए क्योंकि इन प्रदर्शनों में बाहरी “तत्वों ने घुसपैठ कर ली थी जिनकी योजना बड़ी संख्या में हत्याएं करने की थी ताकि राष्ट्रपति ट्रम्प को इस संघर्ष में शामिल होने और ईरान के खिलाफ एक नया युद्ध शुरू करने के लिए उकसाया जा सके।”

वहीं, ईरान के न्याय मंत्री अमीन हुसैन रहीमी ने भी इस आरोप का समर्थन करते हुए सरकारी समाचार एजेंसियों को बताया कि 7 जनवरी के बाद “वे अब विरोध प्रदर्शन नहीं रहे” और उस समय सड़कों पर गिरफ्तार किया गया कोई भी व्यक्ति “निश्चित रूप से अपराधी था।”

एक मानवाधिकार समूह ने कहा कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार किए गए 26 वर्षीय ईरान के नागरिक इरफान सोलतानी को बुधवार को तय समय पर फांसी नहीं दी जाएगी। उन्होंने इसके लिए उनके परिजनों का हवाला दिया। बुधवार देर रात संयुक्त राष्ट्र के नेतृत्व ने अमेरिका के अनुरोध पर गुरुवार को सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाने की घोषणा की जिसमें “ईरान की स्थिति पर जानकारी दी जाएगी”।

अराघची ने कहा कि ईरानी सरकार “पूरी तरह से नियंत्रण में” है और उन्होंने तीन दिनों के “आतंकवादी अभियान” के बाद “शांतिपूर्ण” माहौल की जानकारी दी।

ईरान ने किसी भी अमेरिकी हमले का जवाब देने के बारे में भी कड़ा रुख अपनाया जबकि वाशिंगटन ने कतर में उस अड्डे पर अपने कर्मचारियों की संख्या कम करना शुरू कर दिया, जिसे तेहरान ने पिछले साल एक हमले में निशाना बनाया था।

ईरान ने अल उदैद अड्डे को बनाया था निशाना

ईरान ने जून में अपने परमाणु संयंत्रों पर अमेरिकी हमलों के जवाब में अल उदैद अड्डे को निशाना बनाया था। सर्वोच्च नेता आयातोल्ला अली खामेनेई के वरिष्ठ सलाहकार अली शमखानी ने ट्रंप को चेतावनी देते हुए कहा था कि यह हमला “किसी भी हमले का जवाब देने की ईरान की इच्छाशक्ति और क्षमता” को दर्शाता है। इस दौरान अमेरिका की संभावित कार्रवाई से इलाके में तनाव बना रहा।

ब्रिटिश सरकार ने कहा कि तेहरान स्थित उसका दूतावास “अस्थायी रूप से बंद” कर दिया गया है जबकि सऊदी अरब स्थित अमेरिकी दूतावास ने कर्मचारियों से सावधानी बरतने और सैन्य प्रतिष्ठानों से दूर रहने का आग्रह किया।

जर्मनी की लुफ्थांसा एयरलाइन ने बुधवार को कहा कि अमेरिका द्वारा ईरान को दी गई धमकियों के मद्देनजर उसकी उड़ानें “अगले आदेश तक” ईरानी और इराकी हवाई क्षेत्र से परहेज करेंगी।

दिसंबर के अंत में शुरू हुए ईरान के विरोध प्रदर्शनों के बाद से ट्रंप कई बार ईरान में सैन्य हस्तक्षेप की धमकी दे चुके हैं। ये प्रदर्शन 1979 में इस्लामी गणराज्य की घोषणा के बाद से सबसे बड़े हैं।

वहीं, 2022 में महिषा अमिनी की पुलिस हिरासत में मौत के बाद भी बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे जिसने दुनियाभर का ध्यान खींचा था।

मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि पांच दिनों के इंटरनेट बंद की आड़ में ईरानी अधिकारी धार्मिक व्यवस्था को खुलेआम चुनौती देने वाले प्रदर्शनों के खिलाफ वर्षों में सबसे कठोर दमनकारी कार्रवाई कर रहे हैं।

वहीं, ईरान के न्यायपालिका प्रमुख ने गिरफ्तार लोगों के लिए त्वरित सुनवाई का वादा किया है जिससे यह आशंका बढ़ गई है कि अधिकारी मृत्युदंड को दमन के हथियार के रूप में इस्तेमाल करेंगे।

तेहरान में अमेरिकी अधिकारियों ने अशांति में मारे गए 100 से अधिक सुरक्षाकर्मियों और अन्य “शहीदों” के लिए अंतिम संस्कार आयोजित किया जिसे अधिकारियों ने “आतंकवादी कृत्य” करार दिया है।

अमरेन्द्र यादव
अमरेन्द्र यादव
लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक करने के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई। जागरण न्यू मीडिया में बतौर कंटेंट राइटर काम करने के बाद 'बोले भारत' में कॉपी राइटर के रूप में कार्यरत...सीखना निरंतर जारी है...
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